#प्रतिशोध_की_आग_ने_डकैत_बना_दिया..
भरतपुर। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए कभी सिरदर्द बना 11 लाख रुपए का इनामी डकैत, अजमेर की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली हाई-सिक्योरिटी जेल के भीतर अपने ही साथी कैदी के हाथों मारा गया। बीहड़ के बीती सदियों के इतिहास में पुलिस की सैकड़ों गोलियों और मुठभेड़ों से बच निकलने वाले जगन गुर्जर का सफर जेल की चारदीवारी के भीतर एक मामूली तौलिए से गला घोंटे जाने पर खत्म हुआ। एक साधारण युवक की तरह दूध बेचने वाले जगन ने प्रतिशोध की आग में जुर्म का रास्ता अपनाया था। एक छोटे से विवाद में गांव के कुछ दबंगों द्वारा उसके पिता का सरेआम अपमान किए जाने और बाद में उसके जीजा की बेरहमी से हत्या कर दिए जाने की घटना ने जगन के भीतर प्रतिशोध की आग भड़का दी। कानून से भरोसा उठने के बाद उसने थर्टी-थ्री बोर की राइफल थाम ली और चंबल के बीहड़ों का रुख कर लिया। देखते ही देखते उसने अपना एक मजबूत गिरोह तैयार कर लिया और डांग के गांवों में उसका ऐसा खौफ कायम हो गया। 1994 से शुरू हुआ जगन के अपराध का अध्याय 32 साल बाद आज 29 जून को जेल में समाप्त हो गया है।
Bharatpur, Bharatpur | Jun 29, 2026