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टिहरी मे मृतक केतन के पीड़ित परिवार से मिलने के लिए भारी बारिश के बीच पैदल ही जाते हुए सांसद चंद्रशेखर आजाद..
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#bhimarmy
#ChandrashekharAzad 
#ASP 
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टिहरी मे मृतक केतन के पीड़ित परिवार से मिलने के लिए भारी बारिश के बीच पैदल ही जाते हुए सांसद चंद्रशेखर आजाद.. #tehri #bhimarmy #ChandrashekharAzad #ASP #uttrakhand_devbhoomi

Roorkee, Haridwar | Jul 1, 2026

टिहरी मे मृतक केतन के पीड़ित परिवार से मिलने के लिए भारी बारिश के बीच पैदल ही जाते हुए सांसद चंद्रशेखर आजाद!

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टिहरी मे मृतक केतन के पीड़ित परिवार से मिलने के लिए भारी बारिश के बीच पैदल ही जाते हुए सांसद चंद्रशेखर आजाद! #tehri #bhimarmy #ChandrashekharAzad #ASP #uttrakhand_devbhoomi

Roorkee, Haridwar | Jun 30, 2026

#सोमवती अमावस्या स्नान के दौरान तेज बहाव में फंसे व्यक्ति को किया रेस्क्यू 

#आज दिनांक 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या स्नान के दौरान हाथी पुल के क्षेत्र में रोहताश (उम्र 26 वर्ष), पुत्र दयाचंद, निवासी ग्राम ऊन, थाना बॉन्डकला जिला चरखी दादरी(हरियाणा) के गुम होने की सूचना प्राप्त हुई।

जिसके बाद सूचना मिली कि उक्त युवक नदी के तेज बहाव में फंस गया है।

#सूचना मिलते ही ड्यूटी पर तैनात 40वीं वाहिनी पीएसी रेस्क्यू टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खोजबीन प्रारम्भ की। रेस्क्यू टीम के सदस्य बिशन सिंह(APC), निर्दोष कुमार(हेड कांस्टेबल), रवि वालिया(हिक्स कांस्टेबल), विनोद बिष्ट(आरक्षी), चित्र मोहन(आरक्षी), नितेश नौटियाल(आरक्षी) एवं अंकुर कुमार(आरक्षी) द्वारा अथक प्रयास एवं सूझबूझ का परिचय देते हुए युवक को सकुशल नदी के बहाव से निकालकर एवं खोजकर उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया।

#युवक एवं उसके परिजनों द्वारा रेस्क्यू टीम तथा पुलिस वालों का तहे दिल से आभार व्यक्त किया गया।

#उत्तराखंडसरकर #highlightseveryone #followerseveryone #uttrakhand_devbhoomi #haridwarpolice #PSC #UttarakhandPolice #सोमवतीआमवस्या

#सोमवती अमावस्या स्नान के दौरान तेज बहाव में फंसे व्यक्ति को किया रेस्क्यू #आज दिनांक 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या स्नान के दौरान हाथी पुल के क्षेत्र में रोहताश (उम्र 26 वर्ष), पुत्र दयाचंद, निवासी ग्राम ऊन, थाना बॉन्डकला जिला चरखी दादरी(हरियाणा) के गुम होने की सूचना प्राप्त हुई। जिसके बाद सूचना मिली कि उक्त युवक नदी के तेज बहाव में फंस गया है। #सूचना मिलते ही ड्यूटी पर तैनात 40वीं वाहिनी पीएसी रेस्क्यू टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खोजबीन प्रारम्भ की। रेस्क्यू टीम के सदस्य बिशन सिंह(APC), निर्दोष कुमार(हेड कांस्टेबल), रवि वालिया(हिक्स कांस्टेबल), विनोद बिष्ट(आरक्षी), चित्र मोहन(आरक्षी), नितेश नौटियाल(आरक्षी) एवं अंकुर कुमार(आरक्षी) द्वारा अथक प्रयास एवं सूझबूझ का परिचय देते हुए युवक को सकुशल नदी के बहाव से निकालकर एवं खोजकर उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। #युवक एवं उसके परिजनों द्वारा रेस्क्यू टीम तथा पुलिस वालों का तहे दिल से आभार व्यक्त किया गया। #उत्तराखंडसरकर #highlightseveryone #followerseveryone #uttrakhand_devbhoomi #haridwarpolice #PSC #UttarakhandPolice #सोमवतीआमवस्या

Uttarakhand, India | Jun 15, 2026

गजब :-21 साल का ‘फर्जी ब्रिगेडियर’! NEET की तैयारी छोड़ पहन ली सेना की वर्दी, 50 लाख उड़ाकर रच डाला हैरतअंगेज़ खेल

#दिल्ली। भारतीय सेना में ब्रिगेडियर बनने के लिए जहां दशकों की कठिन सेवा, अनुभव और नेतृत्व क्षमता की आवश्यकता होती है, 

वहीं दिल्ली में रहकर NEET की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय आर्यन वर्मा ने खुद को सीधे ब्रिगेडियर घोषित कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि वह सेना की वर्दी, सेना जैसी गाड़ी, ड्राइवर और दो महंगे बाउंसरों के साथ घूमता था, जिन्हें वह नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के कमांडो बताता था।

बताया जा रहा है कि इस पूरे फर्जी तामझाम पर आर्यन ने करीब 50 लाख रुपये खर्च कर दिए। आमतौर पर ब्रिगेडियर का पद सेना में 25 से 30 वर्ष की सेवा के बाद मिलता है और इस रैंक तक पहुंचने वाले अधिकारियों की उम्र प्रायः 52 से 55 वर्ष के बीच होती है। लेकिन आर्यन को इतना इंतजार मंजूर नहीं था, 

इसलिए उसने करियर की शुरुआत ही ब्रिगेडियर बनकर कर दी।
मामला तब खुला जब सेना के अधिकारियों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ। उसे पकड़ने के लिए एक सैन्य अधिकारी ने खुद को आम नागरिक बताकर संपर्क किया और उसे मोटिवेशनल स्पीच देने के लिए आमंत्रित किया। जैसे ही आर्यन वहां पहुंचा, उसकी पोल खुल गई और कथित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया।

सूत्रों के अनुसार, युवक लंबे समय से लोगों के बीच खुद को सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल केवल रुतबा दिखाने के लिए किया था या इसके पीछे कोई और मकसद भी था।

एक तरफ युवा सेना में भर्ती होने के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ 21 साल के इस युवक ने वर्दी और दिखावे के दम पर खुद को ब्रिगेडियर बताकर ऐसा भ्रम खड़ा कर दिया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया।

#uttarakhandupdate #uttrakhand_devbhoomi #followerseveryone #highlightseveryone #farjiBirgediyarDehli

गजब :-21 साल का ‘फर्जी ब्रिगेडियर’! NEET की तैयारी छोड़ पहन ली सेना की वर्दी, 50 लाख उड़ाकर रच डाला हैरतअंगेज़ खेल #दिल्ली। भारतीय सेना में ब्रिगेडियर बनने के लिए जहां दशकों की कठिन सेवा, अनुभव और नेतृत्व क्षमता की आवश्यकता होती है, वहीं दिल्ली में रहकर NEET की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय आर्यन वर्मा ने खुद को सीधे ब्रिगेडियर घोषित कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि वह सेना की वर्दी, सेना जैसी गाड़ी, ड्राइवर और दो महंगे बाउंसरों के साथ घूमता था, जिन्हें वह नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के कमांडो बताता था। बताया जा रहा है कि इस पूरे फर्जी तामझाम पर आर्यन ने करीब 50 लाख रुपये खर्च कर दिए। आमतौर पर ब्रिगेडियर का पद सेना में 25 से 30 वर्ष की सेवा के बाद मिलता है और इस रैंक तक पहुंचने वाले अधिकारियों की उम्र प्रायः 52 से 55 वर्ष के बीच होती है। लेकिन आर्यन को इतना इंतजार मंजूर नहीं था, इसलिए उसने करियर की शुरुआत ही ब्रिगेडियर बनकर कर दी। मामला तब खुला जब सेना के अधिकारियों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ। उसे पकड़ने के लिए एक सैन्य अधिकारी ने खुद को आम नागरिक बताकर संपर्क किया और उसे मोटिवेशनल स्पीच देने के लिए आमंत्रित किया। जैसे ही आर्यन वहां पहुंचा, उसकी पोल खुल गई और कथित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया। सूत्रों के अनुसार, युवक लंबे समय से लोगों के बीच खुद को सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल केवल रुतबा दिखाने के लिए किया था या इसके पीछे कोई और मकसद भी था। एक तरफ युवा सेना में भर्ती होने के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ 21 साल के इस युवक ने वर्दी और दिखावे के दम पर खुद को ब्रिगेडियर बताकर ऐसा भ्रम खड़ा कर दिया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। #uttarakhandupdate #uttrakhand_devbhoomi #followerseveryone #highlightseveryone #farjiBirgediyarDehli

Uttarakhand, India | Jun 14, 2026

सेलाकुई के लाल स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह को अंतिम विदाई, पूरे सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

देहरादून/सेलाकुई। असम के जोरहाट एयर बेस पर AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दुर्घटना में शहीद हुए भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह का पार्थिव शरीर आज उनके निवास स्थान राजा रोड, सेलाकुई पहुंचाया गया। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंच रहे हैं। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह AN-32 विमान हादसे में शहीद हुए पांच जवानों में शामिल थे। उनका अंतिम संस्कार आज सेलाकुई श्मशान घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया जाएगा।

परिजनों के अनुसार प्रशांत सिंह अपने परिवार के इकलौते पुत्र थे और घर के अकेले चिराग थे। उनकी शादी महज दो वर्ष पहले ही हुई थी। शहादत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता तत्काल असम के लिए रवाना हो गए थे और अब बेटे के पार्थिव शरीर के साथ वापस लौटे हैं।
प्रशांत सिंह का संबंध एक सैन्य परिवार से था। बचपन से ही उनमें देशसेवा का जज़्बा था और उन्होंने भारतीय वायु सेना में शामिल होकर अपने सपने को साकार किया। उनकी शहादत से न केवल परिवार बल्कि पूरे देहरादून और उत्तराखंड को गहरा आघात पहुंचा है।

शहीद प्रशांत सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों और प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा लगा हुआ है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही बात है—"देश ने अपना वीर सपूत खो दिया।"

शत्-शत् नमन, वीर सपूत स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह। 

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सेलाकुई के लाल स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह को अंतिम विदाई, पूरे सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार देहरादून/सेलाकुई। असम के जोरहाट एयर बेस पर AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दुर्घटना में शहीद हुए भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह का पार्थिव शरीर आज उनके निवास स्थान राजा रोड, सेलाकुई पहुंचाया गया। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंच रहे हैं। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह AN-32 विमान हादसे में शहीद हुए पांच जवानों में शामिल थे। उनका अंतिम संस्कार आज सेलाकुई श्मशान घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया जाएगा। परिजनों के अनुसार प्रशांत सिंह अपने परिवार के इकलौते पुत्र थे और घर के अकेले चिराग थे। उनकी शादी महज दो वर्ष पहले ही हुई थी। शहादत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता तत्काल असम के लिए रवाना हो गए थे और अब बेटे के पार्थिव शरीर के साथ वापस लौटे हैं। प्रशांत सिंह का संबंध एक सैन्य परिवार से था। बचपन से ही उनमें देशसेवा का जज़्बा था और उन्होंने भारतीय वायु सेना में शामिल होकर अपने सपने को साकार किया। उनकी शहादत से न केवल परिवार बल्कि पूरे देहरादून और उत्तराखंड को गहरा आघात पहुंचा है। शहीद प्रशांत सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों और प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा लगा हुआ है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही बात है—"देश ने अपना वीर सपूत खो दिया।" शत्-शत् नमन, वीर सपूत स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह। #followerseveryone #highlightseveryone #uttrakhand_devbhoomi #uttarakhandheaven #uttarakhandupdate #vikasnagarbairagiwalahtyakand #BreakingNews #mantriprasadnaithani

Uttarakhand, India | Jun 14, 2026

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