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गजब :-21 साल का ‘फर्जी ब्रिगेडियर’! NEET की तैयारी छोड़ पहन ली सेना की वर्दी, 50 लाख उड़ाकर रच डाला हैरतअंगेज़ खेल #दिल्ली। भारतीय सेना में ब्रिगेडियर बनने के लिए जहां दशकों की कठिन सेवा, अनुभव और नेतृत्व क्षमता की आवश्यकता होती है, वहीं दिल्ली में रहकर NEET की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय आर्यन वर्मा ने खुद को सीधे ब्रिगेडियर घोषित कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि वह सेना की वर्दी, सेना जैसी गाड़ी, ड्राइवर और दो महंगे बाउंसरों के साथ घूमता था, जिन्हें वह नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के कमांडो बताता था। बताया जा रहा है कि इस पूरे फर्जी तामझाम पर आर्यन ने करीब 50 लाख रुपये खर्च कर दिए। आमतौर पर ब्रिगेडियर का पद सेना में 25 से 30 वर्ष की सेवा के बाद मिलता है और इस रैंक तक पहुंचने वाले अधिकारियों की उम्र प्रायः 52 से 55 वर्ष के बीच होती है। लेकिन आर्यन को इतना इंतजार मंजूर नहीं था, इसलिए उसने करियर की शुरुआत ही ब्रिगेडियर बनकर कर दी। मामला तब खुला जब सेना के अधिकारियों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ। उसे पकड़ने के लिए एक सैन्य अधिकारी ने खुद को आम नागरिक बताकर संपर्क किया और उसे मोटिवेशनल स्पीच देने के लिए आमंत्रित किया। जैसे ही आर्यन वहां पहुंचा, उसकी पोल खुल गई और कथित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया। सूत्रों के अनुसार, युवक लंबे समय से लोगों के बीच खुद को सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल केवल रुतबा दिखाने के लिए किया था या इसके पीछे कोई और मकसद भी था। एक तरफ युवा सेना में भर्ती होने के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ 21 साल के इस युवक ने वर्दी और दिखावे के दम पर खुद को ब्रिगेडियर बताकर ऐसा भ्रम खड़ा कर दिया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। #uttarakhandupdate #uttrakhand_devbhoomi #followerseveryone #highlightseveryone #farjiBirgediyarDehli

Uttarakhand, India | Jun 14, 2026

MORE NEWS

मदरसों में 500 वर्ष पुरानी कट्टरपंथी सोच की नहीं, बल्कि आधुनिक, वैज्ञानिक और रोजगारोन्मुखी शिक्षा की आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य है कि समाज के प्रत्येक वर्ग के बच्चे गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा प्राप्त करें, राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ें और देश के विकास तथा राष्ट्रहित में अपना सार्थक योगदान दें।
 स्रोत :- पुष्कर सिंह धामी

मदरसों में 500 वर्ष पुरानी कट्टरपंथी सोच की नहीं, बल्कि आधुनिक, वैज्ञानिक और रोजगारोन्मुखी शिक्षा की आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य है कि समाज के प्रत्येक वर्ग के बच्चे गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा प्राप्त करें, राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ें और देश के विकास तथा राष्ट्रहित में अपना सार्थक योगदान दें। स्रोत :- पुष्कर सिंह धामी

Rishikesh, Dehradun | Jun 8, 2026

समझदारी की बात, बेज़ुबान के साथ!

​प्यास बुझाने के बाद नल को बंद करने की यह ज़िम्मेदारी हर इंसान के लिए एक बड़ा सबक है। जब ये वन्यजीव जल का मोल समझ सकते हैं, तो हमें भी जागरूक बनना होगा।

​पानी बचाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं।

#SaveWater 
#UttarakhandPolice

समझदारी की बात, बेज़ुबान के साथ! ​प्यास बुझाने के बाद नल को बंद करने की यह ज़िम्मेदारी हर इंसान के लिए एक बड़ा सबक है। जब ये वन्यजीव जल का मोल समझ सकते हैं, तो हमें भी जागरूक बनना होगा। ​पानी बचाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं। #SaveWater #UttarakhandPolice

Rishikesh, Dehradun | Jun 8, 2026