♻️ हल्द्वानी न्यूज़- कूड़े के पहाड़ से मिलेगी मुक्ति: नगर निगम की बड़ी पहल; लाखों मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण के लिए शुरू हुआ टेंडर कार्य! 🚛🏗️
🔥 स्वच्छ हल्द्वानी का संकल्प: पुराने कचरे के साथ-साथ दैनिक कूड़े के प्रबंधन के लिए तैयार हुई नई कार्ययोजना; नगर आयुक्त ने दी जानकारी! 👇
हल्द्वानी: कुमाऊं के सबसे बड़े नगर निगम, हल्द्वानी के लिए एक राहत भरी खबर है। शहर के टचिंग ग्राउंड में जमा लाखों मीट्रिक टन कचरे को साफ करने के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है। नगर आयुक्त परितोष वर्मा के अनुसार, कचरा निस्तारण की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू की जा रही है।
📋 अभियान की मुख्य कार्ययोजना:
दोहरे स्तर पर काम: निगम द्वारा दो अलग-अलग टेंडर जारी किए गए हैं—पहला 2018 से पहले के पुराने कूड़े के निस्तारण के लिए, और दूसरा वर्तमान में जमा हो रहे कूड़े को साफ करने के लिए।
दैनिक प्रबंधन: शहर से रोजाना निकलने वाले लगभग 220 मीट्रिक टन कूड़े का अलग से निस्तारण किया जा रहा है।
खाद का निर्माण: गीले कूड़े को कंपोस्ट खाद में बदलने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है, जिससे कचरे की मात्रा कम करने में मदद मिल रही है।
लंबी प्लानिंग: 2018 से पहले से जमा लाखों मीट्रिक टन कचरे के पूर्ण खात्मे के लिए लंबी अवधि की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिस पर काम शुरू हो चुका है।
🏛️ प्रशासनिक दृष्टिकोण:
नगर आयुक्त परितोष वर्मा का कहना है कि हल्द्वानी नगर निगम में जिले की अन्य निकायों का भी कूड़ा आता है, जिसके कारण प्रबंधन की चुनौती बढ़ जाती है। हालांकि, नई प्लानिंग के बाद शहर जल्द ही कूड़ा मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
"हमने कूड़ा निस्तारण के लिए लंबी अवधि की प्लानिंग तैयार कर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। हमारा लक्ष्य केवल कचरा हटाना नहीं, बल्कि उसे वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करना है ताकि हल्द्वानी को एक स्वच्छ और सुंदर शहर बनाया जा सके।" — परितोष वर्मा, नगर आयुक्त, हल्द्वानी।
हल्द्वानी के लिए यह अभियान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि टचिंग ग्राउंड में कचरे का बढ़ता बोझ न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से चिंताजनक था, बल्कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए भी चुनौती बना हुआ था। इस पहल से शहर में स्वच्छता के नए युग की शुरुआत की उम्मीद है।
💬 आपकी राय: क्या आपको लगता है कि इस तरह की वैज्ञानिक निस्तारण प्रक्रिया के साथ-साथ घरों से कूड़ा अलग करने (गीला-सूखा) के अभियान को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता है? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में साझा करें। 🔄
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Uttarakhand, India | Jun 17, 2026