औरंगाबाद को मिली सीतयोग विश्वविद्यालय की सौगात, मगध क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि, 24 जून को कैबिनेट से लगी मुहर।
हजारों छात्रों को अब अपने ही जिले में मिलेगी गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और रोजगार। चेयरमैन योगेन्द्र नारायण सिंह, सचिव डॉ. राजेश कुमार सिंह ने जताया CM सम्राट चौधरी का आभार।
*औरंगाबाद(बिहार)*
औरंगाबाद जिले के शैक्षणिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। बिहार सरकार ने 24 जून 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सीतयोग को विश्वविद्यालय का दर्जा देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। इस फैसले से न केवल संस्थान बल्कि पूरे औरंगाबाद एवं मगध क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आयोजित प्रेस वार्ता में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने कहा कि यह मील का पत्थर क्षेत्र में उच्च शिक्षा, शोध और रोजगार की दिशा में नया युग शुरू करेगा।
सीतयोग यूनिवर्सिटी के सचिव डॉ. राजेश कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया:
1. *गुणवत्तापूर्ण शिक्षा*: छात्रों को आधुनिक, रोजगारोन्मुखी और कौशल आधारित शिक्षा मिलेगी। डिग्री के साथ ज्ञान, नैतिक मूल्य और आत्मनिर्भरता पर जोर होगा।
2. *नए पाठ्यक्रम*: समय की मांग के अनुसार नए स्नातक, स्नातकोत्तर, व्यावसायिक और स्किल बेस्ड कोर्स शुरू किए जाएंगे।
3. *आधुनिक सुविधाएं*: अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी, रिसर्च सेंटर और अनुभवी शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई होगी।
4. *पलायन रुकेगा*: अब औरंगाबाद और आसपास के जिलों के छात्रों को बड़े शहरों में शिक्षा के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा। यहीं विश्वस्तरीय सुविधा मिलेगी।
5. *रोजगार के अवसर*: विश्वविद्यालय के दर्जे से सैकड़ों लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा। शिक्षा, शोध और नवाचार से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
*2. चेयरमैन और सचिव ने क्या कहा*
चेयरमैन कुमार योगेन्द्र नारायण सिंह ने कहा कि "मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने औरंगाबाद को ध्यान में रखकर यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है। औरंगाबाद वासियों की तरफ से हम CM का दिल से आभार व्यक्त करते हैं।"
*सचिव डॉ. राजेश कुमार सिंह ने कहा, "सीतयोग यूनिवर्सिटी का उद्देश्य सिर्फ डिग्री देना नहीं है। हम छात्रों को ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। सरकार के इस दूरगामी निर्णय से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जिलेवासियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों और छात्रों के सहयोग से ही यह सपना साकार हुआ है।"
*3. सीतयोग का सफर - इंजीनियरिंग कॉलेज से यूनिवर्सिटी तक*
1. *11 सितंबर 2011*: सीतयोग इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में स्थापना
2. *बाद में*: ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के रूप में विस्तार, मेडिकल, पैरामेडिकल, मैनेजमेंट आदि कोर्स जुड़े
3. *8 नवंबर 2025*: NAAC मान्यता प्राप्त
4. *24 जून 2026*: बिहार कैबिनेट से विश्वविद्यालय का दर्जा स्वीकृत
प्रेस वार्ता में विश्वविद्यालय की भावी विकास योजनाओं, शैक्षणिक विस्तार, शोध गतिविधियों, उद्योगों के साथ सहयोग और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
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Aurangabad, Aurangabad | Jun 26, 2026