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Hooldiwas

171वें हूल दिवस पर शहीद सिदो-कान्हू को श्रद्धांजलि, निकली शोभायात्रा | #hooldiwas | Pakur News |

171वें हूल दिवस पर शहीद सिदो-कान्हू को श्रद्धांजलि, निकली शोभायात्रा | #hooldiwas | Pakur News |

India | Jul 1, 2026

हूल दिवस पर सांसद मनीष जायसवाल ने सिद्धो-कान्हू को किया नमन | #HoolDiwas | Hazaribagh News |

हूल दिवस पर सांसद मनीष जायसवाल ने सिद्धो-कान्हू को किया नमन | #HoolDiwas | Hazaribagh News |

India | Jul 1, 2026

जमुई: आदिवासी समाज द्वारा आयोजित हूल दिवस समारोह में  डॉ. नीरज साह ने कहा आदिवासियों के हक़ और अधिकार की लड़ाई में रहूंगा साथ

जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड कार्यालय के मैदान में मंगलवार की शाम 5 बजे तक आदिवासी सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास समिति की ओर से स्वतंत्रता संग्राम में संथाल विद्रोह के नायक सिद्धो- कान्हो की 171 वीं जयंती हूल दिवस के रूप में समारोहपूर्वक मनाई गई। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी सह प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज साह शामिल हुए। उनके आगमन पर समिति के सदस्यों ने फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत संथाल विद्रोह के महानायक सिद्धो- कान्हो के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर व माल्यार्पण कर की गई। इसके बाद आदिवासी समाज की बच्चियों ने पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर समारोह को आकर्षक बना दिया। 

वहीं मुख्य अतिथि डॉ. नीरज साह ने कहा कि आदिवासी की पहचान उनकी संस्कृति से है। इसे संभालने के लिए आदिवासी समाज के साथ हमेशा खड़ा रहूंगा। हूल दिवस आदिवासी समाज के साहस, बलिदान और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव तथा फूलो-झानो ने सीमित संसाधनों और केवल तीर-धनुष के बल पर अंग्रेजी शासन को चुनौती दी थी। अपने जल, जंगल, जमीन और सम्मान की रक्षा के लिए हजारों आदिवासियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता।  हम सभी को भी एकजुट रहकर अपने हक़ अधिकार की लड़ाई लड़ना होगा। 

मौके पर संजीव कुमार साह समेत अन्य लोगों ने हूल दिवस की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला और समाज को एकजुट होकर अपने इतिहास और संस्कृति को संरक्षित रखने का आह्वान किया। इस दौरान बताया गया कि 30 जून 1855 को झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गांव से सिदो-कान्हू के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन के खिलाफ ऐतिहासिक संथाल विद्रोह की शुरुआत हुई थी। इसे भारत के प्रथम संगठित जन-आंदोलनों और आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम के रूप में भी जाना जाता है।
समिति के सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2018 से लक्ष्मीपुर में लगातार हूल दिवस का आयोजन किया जा रहा है और इस वर्ष 171वां हूल दिवस मनाया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष रामजी मुर्मू, संरक्षक बीरबल टुड्डू, संयोजक सुमन मरांडी, प्रवक्ता सुरेश हेंब्रम, कोषाध्यक्ष स्टेफन सोरेन, सचिव अरुण मुर्मू, विष्णुदेव हांसदा, मधुसूदन ऋषिकेश मरांडी, राजकुमार सुरेन, संतोष मरांडी, राहुल मरांडी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। #jamuitopnews #drnirajsah #viralreelsシ #viralvideoシ #jamuicity #jamuibihar #HoolDiwas #adiwasi #sidhokanho

जमुई: आदिवासी समाज द्वारा आयोजित हूल दिवस समारोह में डॉ. नीरज साह ने कहा आदिवासियों के हक़ और अधिकार की लड़ाई में रहूंगा साथ जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड कार्यालय के मैदान में मंगलवार की शाम 5 बजे तक आदिवासी सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास समिति की ओर से स्वतंत्रता संग्राम में संथाल विद्रोह के नायक सिद्धो- कान्हो की 171 वीं जयंती हूल दिवस के रूप में समारोहपूर्वक मनाई गई। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी सह प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज साह शामिल हुए। उनके आगमन पर समिति के सदस्यों ने फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत संथाल विद्रोह के महानायक सिद्धो- कान्हो के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर व माल्यार्पण कर की गई। इसके बाद आदिवासी समाज की बच्चियों ने पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर समारोह को आकर्षक बना दिया। वहीं मुख्य अतिथि डॉ. नीरज साह ने कहा कि आदिवासी की पहचान उनकी संस्कृति से है। इसे संभालने के लिए आदिवासी समाज के साथ हमेशा खड़ा रहूंगा। हूल दिवस आदिवासी समाज के साहस, बलिदान और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव तथा फूलो-झानो ने सीमित संसाधनों और केवल तीर-धनुष के बल पर अंग्रेजी शासन को चुनौती दी थी। अपने जल, जंगल, जमीन और सम्मान की रक्षा के लिए हजारों आदिवासियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। हम सभी को भी एकजुट रहकर अपने हक़ अधिकार की लड़ाई लड़ना होगा। मौके पर संजीव कुमार साह समेत अन्य लोगों ने हूल दिवस की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला और समाज को एकजुट होकर अपने इतिहास और संस्कृति को संरक्षित रखने का आह्वान किया। इस दौरान बताया गया कि 30 जून 1855 को झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गांव से सिदो-कान्हू के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन के खिलाफ ऐतिहासिक संथाल विद्रोह की शुरुआत हुई थी। इसे भारत के प्रथम संगठित जन-आंदोलनों और आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम के रूप में भी जाना जाता है। समिति के सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2018 से लक्ष्मीपुर में लगातार हूल दिवस का आयोजन किया जा रहा है और इस वर्ष 171वां हूल दिवस मनाया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष रामजी मुर्मू, संरक्षक बीरबल टुड्डू, संयोजक सुमन मरांडी, प्रवक्ता सुरेश हेंब्रम, कोषाध्यक्ष स्टेफन सोरेन, सचिव अरुण मुर्मू, विष्णुदेव हांसदा, मधुसूदन ऋषिकेश मरांडी, राजकुमार सुरेन, संतोष मरांडी, राहुल मरांडी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। #jamuitopnews #drnirajsah #viralreelsシ #viralvideoシ #jamuicity #jamuibihar #HoolDiwas #adiwasi #sidhokanho

Jamui, Jamui | Jun 30, 2026

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