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चम्बा की शान 'सलूणी सफेद मक्का' को मिला GI टैग, संगठन ने जताई खुशी; किसानों से पारंपरिक सफेद मक्का की अधिक से अधिक बिजाई की अपील
सलूणी (चम्बा): चम्बा जिले की प्रसिद्ध एवं पारंपरिक सलूणी सफेद मक्का को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिलने पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सफेद मक्का संगठन के प्रधान याकूब मागरा और सचिव कृष्ण पंडित ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के किसानों और स्थानीय समुदाय की वर्षों की मेहनत का सम्मान बताया।
संगठन के प्रधान याकूब मागरा ने कहा कि सलूणी सफेद मक्का को GI टैग मिलना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टैग नहीं, बल्कि पूर्वजों द्वारा संरक्षित पारंपरिक बीजों और किसानों की मेहनत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। इससे उत्पाद की प्रामाणिकता सुरक्षित होगी, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
वहीं सलूणी श्वेत मक्का संगठन के प्रधान याक़ूब मागरा, सचिव कृष्ण पंडित आदि जानकारी देते हुऐ।
सलूणी ब्लॉक के सभी किसान भाइयों और बहनों से अपील करते हुए कहा कि GI टैग मिलने से अब सलूणी सफेद मक्का की पहचान वैश्विक बाजार तक पहुंचेगी। उन्होंने किसानों से इस सीजन में अधिक से अधिक क्षेत्र में पारंपरिक सफेद मक्का की बिजाई करने का आग्रह किया। साथ ही आश्वस्त किया कि संगठन किसानों को उन्नत एवं पारंपरिक बीज तथा हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के जिन 8 पारंपरिक उत्पादों को GI टैग प्राप्त हुआ है, उनमें सलूणी सफेद मक्का भी शामिल है। ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से उगाई जाने वाली इस मक्का के दाने सफेद, बड़े, मुलायम और स्वादिष्ट होते हैं, जिनका स्थानीय खान-पान और संस्कृति में विशेष महत्व है। GI टैग मिलने से अब इस अनूठे उत्पाद की पहचान और प्रामाणिकता राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षित हो गई है।
— सुनील पहाड़ी | पहाड़ी न्यूज़
#SalooniWhiteMaize #GITag #Chamba #HimachalPradesh #Salooni #WhiteMaize #Farmers #PahadiNews #Agriculture #TraditionalCrops

चम्बा की शान 'सलूणी सफेद मक्का' को मिला GI टैग, संगठन ने जताई खुशी; किसानों से पारंपरिक सफेद मक्का की अधिक से अधिक बिजाई की अपील सलूणी (चम्बा): चम्बा जिले की प्रसिद्ध एवं पारंपरिक सलूणी सफेद मक्का को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिलने पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सफेद मक्का संगठन के प्रधान याकूब मागरा और सचिव कृष्ण पंडित ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के किसानों और स्थानीय समुदाय की वर्षों की मेहनत का सम्मान बताया। संगठन के प्रधान याकूब मागरा ने कहा कि सलूणी सफेद मक्का को GI टैग मिलना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टैग नहीं, बल्कि पूर्वजों द्वारा संरक्षित पारंपरिक बीजों और किसानों की मेहनत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। इससे उत्पाद की प्रामाणिकता सुरक्षित होगी, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। वहीं सलूणी श्वेत मक्का संगठन के प्रधान याक़ूब मागरा, सचिव कृष्ण पंडित आदि जानकारी देते हुऐ। सलूणी ब्लॉक के सभी किसान भाइयों और बहनों से अपील करते हुए कहा कि GI टैग मिलने से अब सलूणी सफेद मक्का की पहचान वैश्विक बाजार तक पहुंचेगी। उन्होंने किसानों से इस सीजन में अधिक से अधिक क्षेत्र में पारंपरिक सफेद मक्का की बिजाई करने का आग्रह किया। साथ ही आश्वस्त किया कि संगठन किसानों को उन्नत एवं पारंपरिक बीज तथा हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के जिन 8 पारंपरिक उत्पादों को GI टैग प्राप्त हुआ है, उनमें सलूणी सफेद मक्का भी शामिल है। ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से उगाई जाने वाली इस मक्का के दाने सफेद, बड़े, मुलायम और स्वादिष्ट होते हैं, जिनका स्थानीय खान-पान और संस्कृति में विशेष महत्व है। GI टैग मिलने से अब इस अनूठे उत्पाद की पहचान और प्रामाणिकता राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षित हो गई है। — सुनील पहाड़ी | पहाड़ी न्यूज़ #SalooniWhiteMaize #GITag #Chamba #HimachalPradesh #Salooni #WhiteMaize #Farmers #PahadiNews #Agriculture #TraditionalCrops

Chamba, Chamba | Jul 4, 2026

चम्बा की शान 'सलूणी सफेद मक्का' को मिला GI टैग, संगठन ने जताई खुशी; किसानों से पारंपरिक सफेद मक्का की अधिक से अधिक बिजाई की अपील
सलूणी (चम्बा): चम्बा जिले की प्रसिद्ध एवं पारंपरिक सलूणी सफेद मक्का को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिलने पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सफेद मक्का संगठन के प्रधान याकूब मागरा और सचिव कृष्ण पंडित ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के किसानों और स्थानीय समुदाय की वर्षों की मेहनत का सम्मान बताया।
संगठन के प्रधान याकूब मागरा ने कहा कि सलूणी सफेद मक्का को GI टैग मिलना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टैग नहीं, बल्कि पूर्वजों द्वारा संरक्षित पारंपरिक बीजों और किसानों की मेहनत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। इससे उत्पाद की प्रामाणिकता सुरक्षित होगी, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
वहीं सलूणी श्वेत मक्का संगठन के प्रधान याक़ूब मागरा, सचिव कृष्ण पंडित आदि जानकारी देते हुऐ।
सलूणी ब्लॉक के सभी किसान भाइयों और बहनों से अपील करते हुए कहा कि GI टैग मिलने से अब सलूणी सफेद मक्का की पहचान वैश्विक बाजार तक पहुंचेगी। उन्होंने किसानों से इस सीजन में अधिक से अधिक क्षेत्र में पारंपरिक सफेद मक्का की बिजाई करने का आग्रह किया। साथ ही आश्वस्त किया कि संगठन किसानों को उन्नत एवं पारंपरिक बीज तथा हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के जिन 8 पारंपरिक उत्पादों को GI टैग प्राप्त हुआ है, उनमें सलूणी सफेद मक्का भी शामिल है। ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से उगाई जाने वाली इस मक्का के दाने सफेद, बड़े, मुलायम और स्वादिष्ट होते हैं, जिनका स्थानीय खान-पान और संस्कृति में विशेष महत्व है। GI टैग मिलने से अब इस अनूठे उत्पाद की पहचान और प्रामाणिकता राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षित हो गई है।
— सुनील पहाड़ी | पहाड़ी न्यूज़
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चम्बा की शान 'सलूणी सफेद मक्का' को मिला GI टैग, संगठन ने जताई खुशी; किसानों से पारंपरिक सफेद मक्का की अधिक से अधिक बिजाई की अपील सलूणी (चम्बा): चम्बा जिले की प्रसिद्ध एवं पारंपरिक सलूणी सफेद मक्का को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिलने पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सफेद मक्का संगठन के प्रधान याकूब मागरा और सचिव कृष्ण पंडित ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के किसानों और स्थानीय समुदाय की वर्षों की मेहनत का सम्मान बताया। संगठन के प्रधान याकूब मागरा ने कहा कि सलूणी सफेद मक्का को GI टैग मिलना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टैग नहीं, बल्कि पूर्वजों द्वारा संरक्षित पारंपरिक बीजों और किसानों की मेहनत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। इससे उत्पाद की प्रामाणिकता सुरक्षित होगी, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। वहीं सलूणी श्वेत मक्का संगठन के प्रधान याक़ूब मागरा, सचिव कृष्ण पंडित आदि जानकारी देते हुऐ। सलूणी ब्लॉक के सभी किसान भाइयों और बहनों से अपील करते हुए कहा कि GI टैग मिलने से अब सलूणी सफेद मक्का की पहचान वैश्विक बाजार तक पहुंचेगी। उन्होंने किसानों से इस सीजन में अधिक से अधिक क्षेत्र में पारंपरिक सफेद मक्का की बिजाई करने का आग्रह किया। साथ ही आश्वस्त किया कि संगठन किसानों को उन्नत एवं पारंपरिक बीज तथा हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के जिन 8 पारंपरिक उत्पादों को GI टैग प्राप्त हुआ है, उनमें सलूणी सफेद मक्का भी शामिल है। ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से उगाई जाने वाली इस मक्का के दाने सफेद, बड़े, मुलायम और स्वादिष्ट होते हैं, जिनका स्थानीय खान-पान और संस्कृति में विशेष महत्व है। GI टैग मिलने से अब इस अनूठे उत्पाद की पहचान और प्रामाणिकता राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षित हो गई है। — सुनील पहाड़ी | पहाड़ी न्यूज़ #SalooniWhiteMaize #GITag #Chamba #HimachalPradesh #Salooni #WhiteMaize #Farmers #PahadiNews #Agriculture #TraditionalCrops

Chamba, Chamba | Jul 4, 2026

🌽 सलूणी के श्वेत मक्का को मिला GI टैग!
श्वेत मक्का संगठन के प्रधान याक़ूब मागरा, सचिव कृष्ण पंडित व अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि यह उपलब्धि सलूणी, चम्बा और पूरे हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए गर्व का विषय है। जानिए GI टैग मिलने से किसानों और श्वेत मक्का को क्या होगा बड़ा फायदा।

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🌽 सलूणी के श्वेत मक्का को मिला GI टैग! श्वेत मक्का संगठन के प्रधान याक़ूब मागरा, सचिव कृष्ण पंडित व अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि यह उपलब्धि सलूणी, चम्बा और पूरे हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए गर्व का विषय है। जानिए GI टैग मिलने से किसानों और श्वेत मक्का को क्या होगा बड़ा फायदा। #pmoindia #viralvideo #SalooniWhiteMaize #GITag #Salooni #Chamba #Himachal #YakubMagra #KrishanPandit #WhiteMaize #Farmers #Agriculture #ChambaToday #BreakingNews #ViralVideo #HimachalNews #ChambaNews #LocalToGlobal

Chamba, Chamba | Jul 4, 2026

सिवनी के सीताफल को मिला GI Tag | किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी | CM डॉ. मोहन यादव ने की मुलाकात

सिवनी के सीताफल को GI Tag मिलने का महत्व
किसानों की प्रतिक्रिया
उद्यान विभाग की जानकारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसानों से मुलाकात
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सिवनी के सीताफल को मिला GI Tag | किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी | CM डॉ. मोहन यादव ने की मुलाकात सिवनी के सीताफल को GI Tag मिलने का महत्व किसानों की प्रतिक्रिया उद्यान विभाग की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसानों से मुलाकात 👉 वीडियो पसंद आए तो Like, Share और Channel Subscribe करना न भूलें। #Seoni #Sitaphal #GITag #DrMohanYadav #Farmers #MadhyaPradesh #HKNews #Agriculture #CustardApple #BreakingNews

Chhapara, Seoni | Jul 1, 2026

GI Tag से चमकी बनारस की लौंगलता! बढ़ी बिक्री, सैकड़ों लोगों को मिला रोजगार

उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) और GI Tag पहल का लाभ अब वाराणसी की पारंपरिक मिठाई लौंगलता से जुड़े कारोबारियों को भी मिलने लगा है।

कारोबारियों का कहना है कि GI Tag मिलने के बाद लौंगलता की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है। इससे बिक्री में लगातार वृद्धि हुई है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

लौंगलता व्यवसाय से जुड़े अमोद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि एक अच्छी गुणवत्ता वाली लौंगलता तैयार करने में 7 से 8 कारीगरों की मेहनत लगती है और वर्तमान में उनकी दुकान पर प्रतिदिन लगभग 100 से 150 किलोग्राम लौंगलता की बिक्री हो रही है।

जानिए कैसे GI Tag और ODOP योजना ने बनारस की इस पारंपरिक मिठाई को नई उड़ान दी।

📍 Location: Varanasi

🎥 Live VNS
"बनारस की बात, बनारस के साथ"

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#Longlata #GITag #Varanasi #LiveVNS

GI Tag से चमकी बनारस की लौंगलता! बढ़ी बिक्री, सैकड़ों लोगों को मिला रोजगार उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) और GI Tag पहल का लाभ अब वाराणसी की पारंपरिक मिठाई लौंगलता से जुड़े कारोबारियों को भी मिलने लगा है। कारोबारियों का कहना है कि GI Tag मिलने के बाद लौंगलता की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है। इससे बिक्री में लगातार वृद्धि हुई है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। लौंगलता व्यवसाय से जुड़े अमोद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि एक अच्छी गुणवत्ता वाली लौंगलता तैयार करने में 7 से 8 कारीगरों की मेहनत लगती है और वर्तमान में उनकी दुकान पर प्रतिदिन लगभग 100 से 150 किलोग्राम लौंगलता की बिक्री हो रही है। जानिए कैसे GI Tag और ODOP योजना ने बनारस की इस पारंपरिक मिठाई को नई उड़ान दी। 📍 Location: Varanasi 🎥 Live VNS "बनारस की बात, बनारस के साथ" वीडियो पसंद आए तो Like करें, Share करें और चैनल को Subscribe करना न भूलें। #Longlata #GITag #Varanasi #LiveVNS

Sadar, Varanasi | Jun 27, 2026

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