छत्तीसगढ़ में सूरजपुर जिले के रामानुजनगर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मजदूरों की किल्लत के बीच मासूम स्कूली बच्चों से खेतों में धान का रोपा लगवाया जा रहा था। 'चाइल्डलाइन 1098' पर मिली गुप्त सूचना के बाद संयुक्त प्रशासनिक टीम ने अचानक खेत में दबिश दी और कक्षा 5वीं से 7वीं में पढ़ने वाले 4 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। ₹450 रोजाना की दिहाड़ी देकर बच्चों को स्कूल से दूर रखा गया था। अब इस मामले में श्रम विभाग ने आरोपी खेत मालिक (नियोक्ता) के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम के तहत पकड़े जाने पर खेत मालिक या नियोक्ता को 6 महीने से 2 साल तक की जेल और ₹50,000 तक का भारी जुर्माना हो सकता है। खेती का सीजन हो या कोई भी काम, मासूमों का भविष्य खेतों में न झोंकें, उन्हें स्कूल भेजें। अगर आपको भी कहीं बाल श्रम होता दिखे, तो तुरंत टोल-फ्री नंबर 1098 पर रिपोर्ट करें।
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Ambikapur, Surguja | Jul 23, 2026