#बालाघाट
#बैगा_जनजाति की संस्कृति और परंपराओं का कलेक्टर ने किया सम्मान
पारंपरिक फेटा और बीरन पहनकर किया आत्मीय स्वागत स्वीकार
बैगा समाज के साधुराम धुर्वे एवं छन्नू सिंह मरकाम ने कलेक्टर को भेंट की जनजातीय परंपरा की झलक
लगमा के बैगा हाट में केवल बैगा समुदाय को दुकान आवंटित करने की रखी मांग
जनजातीय संस्कृति और परंपराएं केवल किसी समाज की पहचान ही नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध विरासत और जीवनशैली की अनमोल धरोहर होती हैं। इसी सांस्कृतिक विरासत की एक सुंदर झलक उस समय देखने को मिली, जब बैहर विकासखंड के ग्राम सेमरखेरो एवं लगमा के बैगा जनजाति के साधुराम धुर्वे, छन्नू सिंह मरकाम एवं उनकी टीम ने आज 3 नवंबर को कलेक्टर श्री आदित्य सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बैगा जनजाति की पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषणों से कलेक्टर का आत्मीय स्वागत किया।
बैगा समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर श्री सिंह को पारंपरिक लाल फेटा एवं मवई घास से तैयार बीरन माला भेंट की और उन्हें पहनाकर जनजातीय परंपरा से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि बैगा जनजाति में लाल रंग का फेटा विशेष महत्व रखता है। विवाह के अवसर पर दूल्हे को यह फेटा पहनाया जाता है। इसी तरह मवई घास से तैयार की जाने वाली माला को 'बीरन' कहा जाता है। बैगा समाज में विवाह के समय दुल्हन को बीरन माला पहनाकर सजाया जाता है। विवाह के बाद जब बैगा समाज की बेटी दुल्हन के रूप में अपने नए घर जाती है, तब भी यह माला उसकी पारंपरिक वेशभूषा का अभिन्न हिस्सा होती है।
बैगा समाज की इन अनूठी परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों से तैयार पारंपरिक आभूषणों को देखकर कलेक्टर श्री आदित्य सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सहर्ष लाल फेटा अपने सिर पर धारण किया और बीरन माला भी पहनी। इस अवसर पर उन्होंने बैगा समाज की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक पहनावे और रीति-रिवाजों के संरक्षण के महत्व को भी सराहा।
मुलाकात के दौरान साधुराम धुर्वे एवं छन्नू सिंह मरकाम ने कलेक्टर को बताया कि मुक्की के समीप ग्राम लगमा में बैगा जनजाति के लोगों के लिए विशेष रूप से बैगा हाट का निर्माण किया गया है। उन्होंने मांग रखी कि इस हाट में दुकानें केवल बैगा जनजाति के लोगों को ही आवंटित की जाएं, ताकि वे अपने पारंपरिक आभूषणों, हस्तशिल्प, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और जनजातीय व्यंजनों का प्रदर्शन एवं विक्रय कर सकें।
उन्होंने बताया कि बैगा हाट के माध्यम से समाज के पारंपरिक कारीगरों, शिल्पकारों और अन्य लोगों को अपनी कला एवं उत्पादों के प्रदर्शन के साथ बाजार उपलब्ध होगा। इससे उनकी पारंपरिक कला और संस्कृति को पहचान मिलेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खानपान से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
कलेक्टर श्री आदित्य सिंह ने बैगा समाज के प्रतिनिधियों की इस पहल और मांग को सकारात्मक रूप से लेते हुए आश्वस्त किया कि वे शीघ्र ही ग्राम लगमा स्थित बैगा हाट का भ्रमण करेंगे। साथ ही वहां बैगा जनजाति के लोगों को ही दुकानें आवंटित कराने की दिशा में आवश्यक पहल की जाएगी।
बैगा समाज के प्रतिनिधियों की यह मुलाकात जनजातीय संस्कृति के सम्मान के साथ-साथ स्थानीय समुदाय को अपनी परंपराओं के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है। बैगा हाट को यदि समाज के लोगों के लिए एक व्यवस्थित बाजार के रूप में विकसित किया जाता है, तो यह उनकी पारंपरिक कला, शिल्प, आभूषण और खानपान को व्यापक पहचान दिलाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
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Balaghat, Madhya Pradesh | Nov 3, 2026