"नगर पंचायत बनने के बाद विकास की गंगा तो खूब बही, लेकिन उस गंगा में आपके टैक्स के कितने करोड़ रुपये बह गए और कितने सही जगह पहुंचे, यह सवाल आज भी जवाब मांग रहा है। शायद ही कोई ऐसी योजना होगी जिस पर सवाल न उठे हों या जिसमें अनियमितताओं की चर्चा न हुई हो।
याद रखिए, यह किसी अधिकारी, जनप्रतिनिधि या ठेकेदार की निजी रकम नहीं है। यह आपके खून-पसीने की कमाई से दिए गए टैक्स का पैसा है। सड़क, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट, डस्टबिन या अन्य योजनाओं पर खर्च होने वाला हर एक रुपया जनता की जेब से जाता है।
अगर जनता सवाल नहीं पूछेगी तो जवाबदेही भी खत्म हो जाएगी। इसलिए योजनाओं की जानकारी लें, काम की गुणवत्ता देखें, गलत दिखे तो आवाज उठाएं और अपने अधिकारों को समझें।
आने वाले दिनों में जनता का पैसा जनता के हित में खर्च हो, इसके लिए जागरूक बनिए, दूसरों को भी जागरूक कीजिए और इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाइए।
'जनता सोती है तो घोटाले जागते हैं, जनता जागती है तो व्यवस्�