औरंगाबाद-बालूगंज मार्ग पर मौत का पुल, बिना रेलिंग के अधूरा पड़ा कटैया पुल दे रहा हादसे को दावत।
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औरंगाबाद जिला मुख्यालय से बालूगंज को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर कटैया गांव के समीप अदरी नदी पर बना पुल इन दिनों हादसे का सबब बना हुआ है। सैकड़ों गांवों को जोड़ने वाली इस एकमात्र लाइफलाइन सड़क पर बने पुल में दोनों तरफ रेलिंग ही नहीं है।
इसरौर पंचायत के मुखिया पंकज कुमार ने बताया कि फिलहाल बारिश कम होने से नदी में पानी कम है, लेकिन थोड़ी सी भी बारिश होते ही पुल पर से पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है। पुल की ऊंचाई सड़क से भी कम है, जिससे बरसात में पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है। ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि पुल कहाँ से शुरू है और कहाँ खत्म।
*रात में और बढ़ जाता है खतरा*
कटैया और इसरौर के ग्रामीणों के अनुसार पुल के पास तीखा मोड़ है और रात में घना अंधेरा रहता है। स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। बाहरी वाहन चालक अक्सर मोड़ को समझ नहीं पाते और सीधे नदी में गिर जाते हैं। अभी तक कई चार पहिया और बाइक नदी में गिर चुकी हैं। एक व्यक्ति की तो पुल से गिरने के कारण मौत भी हो चुकी है, फिर भी प्रशासन मौन है।
*सैकड़ों गांवों की एकमात्र सड़क*
ये सड़क बालूगंज, कटैया, जीवा बीघा, चट्टी बाजार, सूही, मलहारा,बरियावा, बेढना सहित दर्जनों पंचायतों के लोगों के लिए औरंगाबाद जिला मुख्यालय आने-जाने का एकमात्र रास्ता है। प्रतिदिन हजारों लोग, स्कूल बसें, एंबुलेंस इसी पुल से गुजरती हैं। रेलिंग न होने से अभिभावक अपने बच्चों को लेकर हमेशा डरे रहते हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अविलंब पुल पर मजबूत रेलिंग, रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाया जाए, ताकि किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन को बाध्य होंगे।
*क्या कहते हैं लोग?*
"बारिश में इस पुल पर पैर कांपते हैं। दो बार ट्रैक्टर पलटते-पलटते बचा है। प्रशासन किसी बड़ी मौत का इंतजार कर रहा है क्या?"