सेवल मंदिर के गीता कॉन्टेस्ट में नई पीढ़ी (जेन ज़ी और जेन अल्फा) का जबरदस्त क्रेज, 1500 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
सीकरी/गोविंदगढ़/गोपालगढ़, 23 अगस्त। सेवल मंदिर के तत्वावधान में श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान को नई पीढ़ी के जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित गीता कॉन्टेस्ट में विद्यार्थियों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सीकरी, गोपालगढ़ और गोविंदगढ़ क्षेत्र के 30 से अधिक सरकारी एवं निजी विद्यालयों के 1,500 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। सेवल मंदिर के आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रतियोगिता से जुड़े।
प्रतियोगिता की खास बात यह रही कि प्रतिभागियों में करीब 60 प्रतिशत छात्राएं रहीं। सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। स्कूल संचालकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का आयोजन को सकारात्मक सहयोग मिला।
आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल गीता का ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनमें संस्कार, नैतिक मूल्य, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना है। प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं जैसा अनुभव भी कराया गया।
सेवल मंदिर के जमुना जीवन कृष्णदास जी ने बताया कि नई पीढ़ी में श्रीमद्भगवद्गीता को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है। इसी उत्साह को सही दिशा देने के लिए मंदिर की टीम ने विभिन्न स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को गीता की शिक्षाओं से परिचित कराया तथा अध्ययन सामग्री और नमूना प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए।
उन्होंने बताया कि गीता के इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष में दो बार गीता कॉन्टेस्ट आयोजित किया जाएगा। एक प्रतियोगिता कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए होगी, जबकि दूसरी प्रतियोगिता कॉलेज विद्यार्थियों के साथ परिवारों, व्यवसायियों, गृहिणियों और अन्य इच्छुक लोगों के लिए खुली रहेगी।
पहली बार बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने दी ओएमआर परीक्षा
इस बार बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पहली बार ओएमआर उत्तर-पत्र के माध्यम से परीक्षा दी। इससे बच्चों को ओएमआर भरने, समय प्रबंधन, एकाग्रता और परीक्षा अनुशासन का व्यावहारिक अनुभव मिला, जो भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगी रहेगा।
प्रतियोगिता में विभिन्न धर्मों और समुदायों के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, गीता के सार्वभौमिक जीवन-मूल्यों के माध्यम से यह पहल एकता, सद्भावना और भाईचारे का संदेश दे रही है।
छह परीक्षा केंद्रों पर दिखा उत्साह
प्रतियोगिता का परीक्षा चरण 23 अगस्त को सीकरी, गोविंदगढ़ और गोपालगढ़ में बनाए गए छह परीक्षा केंद्रों पर आयोजित हुआ। विद्यार्थी परीक्षा शुरू होने से करीब आधा घंटा पहले ही केंद्रों पर पहुंच गए। परीक्षा से पहले बच्चे गीता के श्लोकों और प्रश्नों पर चर्चा करते नजर आए।
परीक्षा समाप्त होने के बाद विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से हरिनाम संकीर्तन किया। इसके बाद बच्चों ने गीता को केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखने और नियमित रूप से उसका अध्ययन करने का संकल्प लिया।
जमुना जीवन कृष्णदास जी ने विद्यार्थियों को प्रतिदिन कम से कम दो श्लोक पढ़ने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि रोजाना केवल 10 मिनट गीता अध्ययन के लिए देने से धीरे-धीरे नियमित अध्ययन की आदत विकसित की जा सकती है।
परिवारों में भी बढ़ी गीता अध्ययन की रुचि
गीता कॉन्टेस्ट का असर विद्यार्थियों के साथ उनके परिवारों में भी देखने को मिल रहा है। प्रतियोगिता की तैयारी में कई माता-पिता भी बच्चों के साथ गीता पढ़ रहे हैं और उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं।
जलालपुर की वीरवती शर्मा ने बताया कि उनके दोनों बच्चे प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। बच्चों की तैयारी के दौरान उन्हें स्वयं भी गीता पढ़ने और समझने का अवसर मिला। उनका कहना है कि ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार और अच्छे जीवन-मूल्यों से जोड़ने का बेहतर माध्यम हैं।
30 अगस्त को परिणाम, 4 सितंबर को पुरस्कार वितरण
प्रतियोगिता का परिणाम 30 अगस्त को घोषित किया जाएगा। इसके बाद 4 सितंबर को जन्माष्टमी के अवसर पर सेवल मंदिर में पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होगा। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 10 विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय के शीर्ष तीन विद्यार्थियों को ट्रॉफी दी जाएगी। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
आयोजकों का मानना है कि प्रतियोगिता विद्यार्थियों में आगे बढ़ने की भावना पैदा करती है, जबकि गीता उन्हें सही जीवन-दृष्टि और दिशा देने का काम करती है। शिक्षा और अध्यात्म का यह संगम ही गीता कॉन्टेस्ट की सबसे बड़ी विशेषता है।
Weir, Bharatpur | Aug 23, 2026