बालाघाट की ये तस्वीर बहुत कुछ कहती है!
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है।
शुभकामनाओं के साथ बालाघाट के बैगा भाइयों की एक आवाज़ भी सरकार तक पहुँचे—
योजनाओं की घोषणा और कागज़ों पर करोड़ों की राशि अपनी जगह, लेकिन बैगा परिवारों की जिंदगी में उसका असर कितना पहुँचा?
जहाँ आज भी कई परिवार पक्के घर, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क और मूलभूत सुविधाओं की उम्मीद में हैं, वहाँ सवाल सिर्फ योजनाओं का नहीं है—
सवाल है कि इन योजनाओं का लाभ आखिरी बैगा परिवार तक कब और कितना पहुँचेगा?
प्रधानमंत्री जी, जन्मदिन पर एक सवाल—
क्या बालाघाट के बैगा समाज की जमीनी हकीकत भी आपकी प्राथमिकताओं में उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी सरकारी फाइलों में उनकी योजनाएँ?
एक तरफ जन्मदिन का जश्न, दूसरी तरफ बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत… सवाल कौन पूछेगा?”
या और ज्यादा तीखी:
मोमबत्तियां जल रही हैं, लेकिन बालाघाट के बैगा परिवारों के घरों में चूल्हे और चिताएं दोनों सवाल प