नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद जी आज देश का छात्र पूछ रहा है—क्या उसकी सफलता उसकी मेहनत तय करेगी या पेपर लीक करने वाले गिरोह?
हमें बचपन से सिखाया गया कि "मेहनत का फल मीठा होता है।" लेकिन आज छात्र पूछ रहा है—पहले यह तो तय कर दीजिए कि मेहनत का फल मिलेगा भी या नहीं।
आज का छात्र किताबों से कम और मोबाइल के नोटिफिकेशन से ज़्यादा डरता है। उसे हर पल यह चिंता सताती है कि कहीं फिर से "पेपर लीक", "परीक्षा रद्द" या "दोबारा परीक्षा" की खबर न आ जाए।
सरकार कहती है कि सब कुछ नियंत्रण में है। लेकिन यदि ऐसा है, तो बार-बार परीक्षा व्यवस्था क्यों विफल हो रही है?
परीक्षा देने वाले छात्रों की पहचान आधार, बायोमेट्रिक सत्यापन और कई स्तरों की जांच से सुनिश्चित की जाती है। फिर भी प्रश्नपत्र सुरक्षित नहीं रह पाते। यदि लाखों छात्रों की पहचान सुरक्षित रखी जा सकती है, तो प्रश्नपत्रों की सुरक्षा क्यों नहीं की जा सकती?
पिछले कुछ वर्षों में नीट, यूजीसी-नेट, सीयूईटी, जेईई, उत्तर प्र�
Tikamgarh, Tikamgarh | Jul 29, 2026