आज के दौर की अमृता देवी, नागौर के जारोड़ा की मैना देवी!
जब खेजड़ियाँ संकट में थीं, तब बिश्नोई समाज की बेटी, नागौर के जारोड़ा की मैना देवी अकेली होकर भी अन्याय के सामने चट्टान बनकर खड़ी हो गईं। घायल होना मंज़ूर था, लेकिन अपनी धरती, अपने खेत और अपने पेड़ों को कटते देखना मंज़ूर नहीं था।
यह लड़ाई किसी एक समाज की नहीं, हर किसान, हर गाँव और हर उस इंसान की है जो जल, जंगल और ज़मीन को अपनी विरासत मानता है।
अमृता देवी का बलिदान इतिहास बना था, और आज मैना देवी का साहस याद दिलाता है कि जब धरती पर संकट आता है, तब उसकी रक्षा करने वालों की कोई जात नहीं होती—सिर्फ़ हिम्मत होती है।
खेजड़ी बचेगी तो खेत बचेंगे,
खेत बचेंगे तो किसान बचेगा,
और किसान बचेगा तो देश बचेगा।
Barmer, Barmer | Jul 14, 2026