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मसूरी भूस्खलन ने छीना खेतवाला का रास्ता, महिलाओं ने झाड़ियां काटकर बनाया पैदल मार्ग,षासन प्रषासन नही दे रहा ध्यान, ग्रामीणो में आक्रोश लगातार बारिश ने मसूरी के निकट खेतवाला गांव के हालात गंभीर कर दिए हैं। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बन रही संपर्क सड़क से निकला मलबा और भूस्खलन गांव के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। खेतवाला गांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग कई स्थानों पर ध्वस्त हो गया है, जबकि सड़क पर बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा आने से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद है। पहाड़ी पर अटके बोल्डरों के कारण हर समय बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है। मार्ग बंद होने के बाद ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने खुद झाड़ियां और घास काटकर जंगल के बीच से पैदल रास्ता तैयार किया जा रहा है, जिससे स्कूली बच्चे, मजदूर, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण आवाजाही कर सकें। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी गर्भवती महिला या गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाना पड़े तो स्थिति बेहद चिंताजनक हो सकती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के दौरान निकला मलबा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित नहीं किया गया। पहली ही तेज बारिश में यही मलबा बहकर कंपनी गार्डन और आसपास के गांवों को जोड़ने वाले मार्ग पर फैल गया। मलबा रिस्पना नदी तक पहुंच रहा है, जिससे पर्यावरण और वन संपदा को भी नुकसान हो रहा है। स्थानीय ग्रामीण विनोद रावत, विपिन रावत, सुनील जैरवाण का यह भी आरोप है कि भूस्खलन रोकने के लिए खेत वाला गांव को जाने वाली सडक किनारे बनाई गई सुरक्षा दीवार घटिया निर्माण के कारण कुछ ही महीनों में ढह गई। शिकायतों के बाद विभाग ने जेसीबी तो भेजी, लेकिन राहत कार्य धीमी गति से चल रहा है। गांव की समस्याएं केवल सड़क तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार 16 सितंबर 2025 की आपदा में क्षतिग्रस्त हुई पेयजल लाइन आज तक पूरी तरह ठीक नहीं हो सकी है। बरसात में सड़क और पेयजल दोनों संकट गहरा गए हैं। ग्राम प्रधान विक्रम रावत ने बताया कि उन्होंने सड़क और भूस्खलन की समस्या को लेकर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को ज्ञापन सौंपा था। मंत्री ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश भी दिए, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि लगातार गिरते बोल्डरों से गांव में भय का माहौल है और कुछ परिवार सुरक्षा के अभाव में पलायन भी कर चुके हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से संपर्क मार्ग को तत्काल सुरक्षित बनाने, निर्माण मलबे का वैज्ञानिक निस्तारण करने, क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन दुरुस्त करने तथा भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा कार्य कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बरसात के दौरान कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

Mussoorie, Dehradun | Jul 12, 2026

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