प्रखंड सहित जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों पर बहाल शिक्षकों के विरुद्ध वर्ष 2017 में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद सात साल बाद भी नियुक्ति रद्द नहीं हो सकी है। उच्च न्यायालय व निदेशक प्राथमिक शिक्षा के निर्देशों के बाद भी मामला प्रक्रियाधीन है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल।