जालौन | महेवा ब्लॉक के अवेदेपुर में आवारा गौवंश का संकट, बंद पड़ी गौशाला फिर बनी चर्चा का विषय
महेवा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत अवेदेपुर में आवारा गौवंश की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
दहेलखण्ड गांव में आवारा गौवंश का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अवेदेपुर के ग्रामीणों ने सैकड़ों की संख्या में घूम रहे आवारा पशुओं को गांव की बंद पड़ी गौशाला में बंद कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार विभागों को भी दी थी, लेकिन दो दिन तक कोई व्यवस्था नहीं की गई।
ग्रामीणों के अनुसार गौशाला में बंद पशुओं के लिए हरे चारे, भूसे और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी।
दो दिनों तक गौवंश भूख से तड़पता रहा।
पशुओं की दयनीय हालत देखकर ग्रामीणों का मन पसीज गया और उन्होंने मजबूरी में सभी गौवंश को गौशाला से बाहर छोड़ दिया।
अब यही आवारा गौवंश दोबारा खेतों में पहुंचकर किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।
किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवेदेपुर में पहले गौशाला संचालित होती थी, लेकिन पशुओं की संख्या कम होने पर उन्हें दूसरी ग्राम पंचायत की गौशाला में भेज दिया गया और यहां की गौशाला बंद कर दी गई।
अब जब गांव में फिर बड़ी संख्या में आवारा पशु हैं, तो इस गौशाला को दोबारा शुरू किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि बंद पड़ी गौशाला को तत्काल संचालित किया जाए और आवारा गौवंश को वहां सुरक्षित रखा जाए, ताकि किसानों की फसलें बच सकें और बेजुबान पशुओं को भी भोजन व संरक्षण मिल सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार गौशालाओं के संचालन, पशुओं के चारे, पानी और रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन कई स्थानों पर इन व्यवस्थाओं का लाभ जमीन पर दिखाई नहीं देता।
उनका कहना है कि यदि सरकारी धन का सही उपयोग हो तो न किसानों को परेशानी होगी और न ही गौवंश को भूखा भटकना पड़ेगा।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। यदि प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए...
क्या यह स्थिति चिंताजनक नहीं है कि एक ओर किसान अपनी मेहनत की फसल बचाने के लिए रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बेजुबान गौवंश भूख और प्यास से भटकने को मजबूर है? आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
सरकार गौशालाओं के संचालन, चारा, पानी, चिकित्सा और रखरखाव के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है।
यदि इसके बावजूद कहीं गौशालाएं बंद पड़ी हैं, पशु सड़कों और खेतों में घूम रहे हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि व्यवस्था में कमी कहां है।
यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई भी होनी चाहिए।
गौवंश हमारी संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही किसान देश का अन्नदाता है।
इसलिए ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिसमें न गौवंश भूखा रहे और न किसानों की फसल बर्बाद हो।
बंद पड़ी गौशालाओं को दोबारा संचालित किया जाए, चारे-पानी की समुचित व्यवस्था हो और आवारा पशुओं के स्थायी संरक्षण की प्रभावी योजना लागू की जाए।
अब आपकी बारी...
क्या आपके क्षेत्र में भी आवारा गौवंश की यही समस्या है?
क्या बंद पड़ी गौशालाओं को फिर से शुरू किया जाना चाहिए?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए।
आपकी आवाज ही बदलाव की शुरुआत बन सकती है।
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Kalpi, Jalaun | Jul 29, 2026