हरिद्वार के सिडकुल में अगर किसी कंपनी को अपनी एक्सपायरी दवाइयों का निस्तारण करना है, तो उसके लिए नियम-कानून बने हुए हैं। लेकिन अगर यही दवाइयां नदी में फेंक दी जाएं, तो सवाल सिर्फ एक कंपनी पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर खड़े होते हैं।
जी हां, हरिद्वार में पेंटागन मॉल के पीछे सूखी रोह नदी में भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां फेंके जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि मौके पर एक ट्रक से भी ज्यादा दवाइयां मिलीं है जो इतनी बुरी हालत में थी कि वह दवाइयां धूप और पानी के संपर्क में आने से एक जैली के रूप में जमीन पर इधर-उधर बह रही थी जिसको आसपास चरने वाले मवेशी भी खा सकते थे।
आपको बता दे की जब बरसात का पानी इस सुखी रोह नदी में आता है तो यह पानी आगे जाकर सीधे गंगा जी में मिलता है यानी जो कूड़ा कचरा और एक्सपायरी दवाइयां यहां फेंकी जाती है वह सीधे आगे जाकर गंगा को प्रदूषित करती हैं।
मामले की सूचना ड्रग्स इंस्पेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई, लेकिन आरोप है कि करीब चार घंटे तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद एक स्थानीय पत्रकार के द्वारा जिलाधिकारी को सूचना दी गई और उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई, तब जाकर विभागीय अमला हरकत में आया।
संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बरामद दवाइयों की जांच-पड़ताल की गई।
ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी के अधिकारियो को मौके पर बुलाया गया और दवाइयों का नियमानुसार निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि दवाइयों को यहां से सीधे लक्सर स्थित भारत पेट्रोलियम प्लांट ले जाकर निस्तारित किया जाएगा।
इसके साथ ही ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी से फॉर्म नंबर 10 भी मांगा गया है, ताकि यह जांच की जा सके कि कंपनी ने पहले अपनी एक्सपायरी दवाइयों का निस्तारण किस तरह और कितनी बार कराया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, अगर दस्तावेजों में खामियां मिलती हैं, तो ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी पर जुर्माना लगाने और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जायेगी ।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल खडा होता है कि आखिर शिकायत मिलने के बाद भी अधिकारी चार घंटे तक मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?
जबकि अधिकारियों को फोन करने के बाद ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी के कर्मचारी अपनी फेंकी हुई दवाइयो को देखने पहुंच जाते हैं।
क्या नदी में एक्सपायरी दवाइयां फेंके जाने जैसे गंभीर मामले में कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के हस्तक्षेप का इंतजार करना जरूरी है?
अगर एक स्थानीय पत्रकार को जिलाधिकारी तक बात पहुंचानी पड़े और उसके बाद ही विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचें, तो फिर संबंधित विभागों की जवाबदेही कहां है?
वहीं, भीम आर्मी कांशीराम दल उत्तराखंड के विधानसभा प्रभारी मोनू ने चेतावनी दी है कि अगर भविष्य में भी इस तरह नदी में दवाइयां फेंकी गईं, तो संगठन इन दवाइयों को उठाकर संबंधित विभाग और जिला कार्यालय में डालकर धरना-प्रदर्शन करेगा।
संगठन का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब खुले में दवाइयां फेंके जाने की बात सामने आई है।
अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में सिर्फ दवाइयों को हटाकर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाएगी, या फिर में एक्सपायरी दवाइयां को नदी में फेंकने वाली ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी पर जुर्माना और लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही की जाएगी
हरिद्वार एक धार्मिक और पर्यटन नगरी है। यहां पर्यावरण की सुरक्षा और प्रदूषण पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। ऐसे में नदी में भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां फेंके जाने का मामला गंभीर है जिसकी जांच होनी जरुरी है। फिलहाल नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में क्या सामने आता है और संबंधित कंपनी ईस्ट्रन हेल्थकेयर के खिलाफ कार्रवाई होती है या नहीं।
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