सद्गुरु के उपकारों का अंत नही है : संत श्री कृष्णानंद जी महाराज
शहर के सेक्टर 5, शांति नगर स्थित राडा जी मंदिर पार्क में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस की सभा में व्यासपीठ पर विराजमान श्री वृंदावन धाम आश्रम, तीतरडी पीठाधीश्वर सुप्रसिद्ध भागवताचार्य संत श्री कृष्णानंद जी महाराज ने प्रभु आह्वान व प्रार्थनाओं के साथ कथा प्रारंभ की । जिसमें श्री श्यामसुंदर, राधे रानी व श्री वृंदावन धाम की स्तुति कर गुणगान किया गया। उन्होंने भक्तों को प्रभु स्मरण करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रभु हमे भक्ति की राह पर चलने के लिए अद्भुत शक्ति प्रदान करते है।
महाराज जी ने सप्तम दिवस सद्गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि वह अनंत और असीम है, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। वे न केवल जीवन की राह दिखाते हैं, बल्कि आत्मज्ञान और परमात्मा से साक्षात्कार का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। सद्गुरु का उपकार परमेश्वर से भी बड़ा माना गया है, क्योंकि वे ही भवसागर पार कराते हैं।अर्थात, सद्गुरु की महिमा अनंत है, उनके उपकार असीम हैं, और उन्होंने मेरी दिव्य दृष्टि खोलकर मुझे उस अनंत परमात्मा के दर्शन कराए हैं।
कथा प्रसंग में विभिन्न सूर्यवंशी राजाओं की कथा, कंस वध, उद्धव चरित्र का वर्णन किया गया। कृष्ण- सुदामा चरित्र को सुंदर झांकी व भजनों सहित श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया गया। महाराज जी ने श्री कृष्ण- सुदामा की अटूट मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि सुदामा भले ही गरिब था परंतु उसकी आध्यात्मिक समृद्धि अतुलनीय थी। उसने अपना जीवन भगवान् की इच्छा पर समर्पित कर दिया था। श्री कृष्ण सुदामा प्रसंग को सुनकर मौजूद भक्त भावुक हो उठे। इस अवसर पर मुख्य यजमान नेमसिंह जी लोदी, केसर जी लोदी,गणेश, दीपक जी, विमला जी कुमावत, बिंदु जी सांखला आदि ने महाराज जी को माला व साफा पहना कर व्यासपीठ पूजन कर आशीर्वाद लिया गया। तत्पश्चात बड़ी भारी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को व्यासपीठ से महाराज जी द्वारा प्रसाद वितरित किया गया। अंत में महाआरती हुई।
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Girwa, Udaipur | Jun 8, 2026