*रुक जाओ। 2 मिनट लगेंगे।*
*ये पोस्ट लाईक के लिए नहीं है, तुम्हारे लिए है।*
*रविवार से पहले पढ़ लो, वरना फिर वही होगा - टीवी चलेगा, दिमाग बंद रहेगा।*
*👇 पूरा पढ़ने की हिम्मत है तो ही आगे बढ़ो 👇*
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*"इस रविवार: रिमोट तुम्हारे हाथ में है"*
*स्टेप 1: मंगलवार - रुक कर सोचो*
आज मंगलवार है। टीवी पर बहस चल रही है - "मंदिर चोरी vs मन की बकवास"। एंकर चिल्ला रहा है, पैनल वाले लड़ रहे हैं। तुम रिमोट उठाओ और एक सेकंड रुक जाओ।
पूछो खुद से - *पिछले मंगलवार किस मुद्दे पर लड़ रहे थे?* याद नहीं? बस यही तो खेल है। हर हफ्ते नया शोर, पुराना मुद्दा कब्र में।
*स्टेप 2: बुधवार - हिसाब लगाओ*
कागज़ उठाओ। लिखो पिछले 4 रविवार क्या-क्या "राष्ट्रीय मुद्दा" बना था।
1. हफ्ता 1: *_*___
2. हफ्ता 2: *_*___
3. हफ्ता 3: *_*___
4. हफ्ता 4: *_*___
अब देखो इनमें से कितने मुद्दे हल हुए? कितनों पर आज बात हो रही है? जवाब मिलेगा - *जीरो*। क्योंकि मुद्दे हल करने के लिए नहीं, भुलाने के लिए बनाए जाते हैं।
*स्टेप 3: गुरुवार - अपना बुलेटिन बनाओ*
टीवी बंद करो। 10 मिनट निकालो। लिखो "मेरे मन की बात":
1. मेरे घर का सबसे बड़ा टेंशन क्या है? - राशन, फीस, दवाई?
2. मेरे मोहल्ले की सबसे बड़ी दिक्कत क्या है? - सड़क, पानी, सफाई?
3. क्या टीवी पर इनमें से एक भी बात हुई इस महीने?
ये है जनता के मन की बात। जो कभी माइक तक नहीं पहुँचती।
*स्टेप 4: शुक्रवार - लाईक-कमेंट-शेयर का सच समझो*
जब भी कोई पोस्ट आए "सहमत हो तो लाईक कमेंट शेयर करो", समझ जाओ - *तुम्हारी राय नहीं, तुम्हारा एंगेजमेंट चाहिए।* तुम्हारा गुस्सा कंटेंट है, तुम्हारा डर TRP है।
सवाल पूछो - इस पोस्ट से किसका फायदा? मेरा या पोस्ट करने वाले का?
*स्टेप 5: शनिवार - तय करो*
कल रविवार है। तुम्हारे पास 2 ऑप्शन हैं:
*ऑप्शन A:* सुबह 11 बजे टीवी ऑन करो। सुनो कि तुम्हें क्या सोचना चाहिए। फिर व्हाट्सऐप पर बहस करो। शाम तक BP हाई, काम जीरो।
*ऑप्शन B:* टीवी बंद रखो। वो 30 मिनट अपने बच्चे को पढ़ाओ, माँ-बाप से बात करो, कोई रुका हुआ काम निपटा लो। शाम को खुद से पूछना - आज का दिन बेहतर किसमें बीता?
*स्टेप 6: रविवार - रिमोट चलाओ*
याद रखो - *रिमोट सिर्फ टीवी का बटन नहीं है, तुम्हारी सोच का बटन है।* जब तुम चैनल बदलते हो, असल में तुम तय करते हो कि तुम्हारे दिमाग में क्या जाएगा।
इस रविवार "मन की बकवास" सुनो या ना सुनो, पर एक काम जरूर करना - *5 मिनट अपने मन की बात खुद से कर लेना।* बिना एंकर, बिना स्क्रिप्ट, बिना लाईक-कमेंट-शेयर के।
क्योंकि जिस दिन जनता अपने मन की बात खुद से करने लगेगी, उस दिन माइक वालों की दुकान बंद हो जाएगी।
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*P.S.:* पोस्ट को लाईक करके मत निकल जाना। वो तो "नमस्कार" हो गया। अगर सच में कुछ हिला अंदर, तो रुक कर सोचो। और अगर सोच लिया, तो इस रविवार रिमोट तुम्हारे हाथ में है - टीवी का भी, दिमाग का भी।