""हम तो डूबे सनम, तुम्हें भी अपने साथ ले डुबेंगे" — ये बात आज कश्मीर के गाला सेब का कच्चा तुडान करने वाले कुछ बागवानों पर बिल्कुल सही बैठ रही है।
तीन साल पहले भी गाला सेब कच्चा तोड़कर देश कि मंडियों में पूरे गाला के रेट गिरा दिए थे। उस समय कश्मीर का कच्चा गाला कोडिंग के भाव बिका था। पिछले तीन साल पहले से भी कोई सबक नहीं लिया और इस साल फिर कश्मीर से जुलाई में कच्चा गाला तोड़कर दिल्ली ,जयपुर और पंजाब मंडी में भेज दिया, जिससे जुलाई माह में हिमाचल के तैयार गाला के दाम फिर नीचे आ गए।
अभी भी हिमाचल का गाला पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। और हिमाचल से 20 से 25 दिन देरी से तैयार होने वाला कशमीरी का गाला इस साल भी लगभग जुलाई में ही मंडी में उतार दिया । लेकिन कश्मीर के गाला का "किंग खान" बनने की चाह रखने वाले एक बागवान ने सोशल मीडिया पर दिल्ली में 2500 रुपये हाफ बॉक्स कश्मीरी गाला बेचने की शेखी क्या बघारी,उसके बाद कश्मीर के कई बागवान भी कच्चा गाला तोड़ने कि होड़ में आ गए और जुलाई में ही कच्चा गाला तोड़कर देश मंडियों में भेजना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि आज जुलाई पूरे गाला बाजार का बेड़ा गर्क हो गया।
कश्मीर के बागवानों को यह बात क्यों समझ नहीं आती कि जब फ्लावरिंग ही हिमाचल से लगभग 20 से 25 दिन लेट होती है, तो हर हाल में जल्दी मंडी पहुंचने की होड़ क्यों? अगर फल पूरी तरह तैयार नहीं है तो उसे तोड़ने का नुकसान आखिर पूरे सेब उद्योग को ही उठाना पड़ता है।
आज हालात ये हैं कि एक तरफ कश्मीर से कच्चा गाला देश की मंडियों में पहुंच रहा है और दूसरी तरफ हिमाचल के तैयार गाला पर भी उसी कच्चे फल की मार पड़ रही है। आज हिमाचल और कश्मीर के बागवान गाला सेब को लेकर आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। अगर एक-दूसरे से आगे निकलने की इस होड़ में कच्चा फल ही बाजार में भेजते रहे, तो वो दिन दूर नहीं जब दोनों मिलकर अपने ही सेब उद्योग का बेड़ा गर्क कर देंगे।