आखिरकार सत्ता को डर लग ही गया...
शायद उसे यह डर सताने लगा कि कहीं यह आंदोलन उसकी दहलीज़ तक न पहुँच जाए।
इसी डर में आज भी संवाद का रास्ता नहीं चुना गया। बात करने के बजाय सोनम वांगचुक को घसीटते हुए अस्पताल ले जाया गया।
शायद अब सत्ता चैन की साँस लेगी कि आंदोलन की आवाज़ कुछ समय के लिए वहाँ से हटा दी गई।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर डर किस बात का था ?
एक शांतिपूर्ण आंदोलन से... या उन सवालों से, जिनका जवाब आज तक नहीं दिया गया ?
और जो लोग हर हाल में तंत्र के साथ खड़े रहते हैं, शायद उन्हें भी आज ज़रा सी शर्म नहीं आएगी। वे भी यही कहेंगे कि सब ठीक हुआ।
लेकिन क्या किसी आवाज़ को वहाँ से हटा देने भर से उसके पीछे खड़े सवाल भी खत्म हो जाते हैं?
आखिर लोकतंत्र में किसी आंदोलन का जवाब संवाद से दिया जाता है, या उसे हटाकर ?
@Anayash_1234
Indore, Indore | Jul 19, 2026