नेशनल हाईवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने में प्रशासन पर सवाल, रसूखदारों के दबाव के आरोप
औंग में हाईवे की जमीन कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई बीच में रुकी, शिकायतों के निस्तारण पर भी उठे प्रश्न
स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई
✒️रिपोर्ट नागेंद्र पांडये
फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) जिले की बिंदकी तहसील के औंग गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग की भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया गया है कि कई बार मापी, निशानदेही और नोटिस जारी होने के बावजूद कार्रवाई को प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप के कारण रोक दिया गया। साथ ही आईजीआरएस शिकायत के निस्तारण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फतेहपुर। जनपद की बिंदकी तहसील अंतर्गत ग्राम औंग में राष्ट्रीय राजमार्ग की भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों एवं शिकायतकर्ताओं का दावा है कि हाईवे की भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए कई बार राजस्व विभाग द्वारा मापी की गई, सीमांकन किया गया तथा तीन बार नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन अंतिम चरण में कार्रवाई रोक दी गई।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रभावशाली राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते प्रस्तावित कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाया गया। उनका कहना है कि इससे आम नागरिकों के बीच यह संदेश गया कि प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध नियमों का समान रूप से पालन नहीं किया जाता।
आरोप यह भी लगाया गया है कि बिंदकी तहसील क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दौरान कुछ लोगों के निर्माण तोड़ दिए गए, जबकि कुछ कथित अतिक्रमणों पर कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं ने इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया है।
मामले में आईजीआरएस शिकायत संख्या 40017226020859 का उल्लेख करते हुए यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायत का वास्तविक तथ्यों के अनुरूप निस्तारण नहीं किया गया। शिकायतकर्ता निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा पूरे प्रकरण की स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण है तो बिना किसी भेदभाव के सभी मामलों में एक समान कार्रवाई होनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही से ही आम नागरिकों का विश्वास मजबूत होगा।
महत्वपूर्ण नोट: इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप शिकायतकर्ताओं एवं स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों पर आधारित हैं। समाचार प्रकाशित होने तक संबंधित प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अथवा अन्य संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता, सरकारी भूमि संरक्षण और शिकायत निस्तारण व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाता है। ऐसे मामलों में तथ्यों की निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को सुनने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई होना जनविश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
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मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया
✒️ रिपोर्ट: नागेन्द्र पाण्डेय / नीलकमल
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