हजारीबाग में संस्कृत भारती द्वारा देवभाषा संस्कृत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निशुल्क कक्षाएं चलाई जा रही हैं। इन कक्षाओं में विद्यालय व महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को संस्कृत बोलना सिखाया जा रहा है, ताकि यह भाषा पुस्तकों तक सीमित न रहे। शिक्षकों का कहना है कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी और भारत की सांस्कृतिक पहचान है। छुट्टियों के दौरान करीब 50 से अधिक बच्चे उत्साह के साथ संस्कृत सीख रहे हैं। बच्चों का मानना है कि अपनी भाषा और संस्कृति को समझना और बचाना बेहद जरूरी है।