#सफलता_की_कहानी
🔸जीवामृत से पराली प्रबंधन की राह हुई आसान, कम लागत में मिट्टी की सेहत सुधारने की पहल*
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🔸मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के शिविर में कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह ने किसानों के नवाचार की सराहना की*
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उज्जैन, 22 अक्टूबर 2026/ कृषि विभाग उज्जैन के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से किसान कम लागत में जीवामृत तैयार कर पराली प्रबंधन की दिशा में नवाचार कर रहे हैं। प्राकृतिक जंगल की मिट्टी, गुड़ और पानी से तैयार किया जाने वाला जीवामृत किसानों के लिए पराली प्रबंधन का एक उपयोगी विकल्प बन रहा है। इसके उपयोग से खेतों में जैविक गतिविधियों को बढ़ावा देने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने तथा फसल उत्पादन में सहायता मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के अंतर्गत ग्राम करनावद में आयोजित जिलास्तरीय शिविर में कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह ने किसानों द्वारा किए जा रहे इस नवाचार की सराहना की। उन्होंने कहा कि अन्य किसान भी इस पहल से प्रेरित होकर जीवामृत का उपयोग करें तथा पराली को खेतों में ही गलाकर उसका बेहतर प्रबंधन करने की दिशा में प्रयास करें।
🔸कम लागत में घर पर ही तैयार हो रहा जीवामृत*
कृषि विभाग के उपसंचालक ने बताया कि जीवामृत तैयार करने की प्रक्रिया सरल और कम खर्चीली है। किसान इसे आवश्यक सामग्री की उपलब्धता के अनुसार अपने घर पर ही बना सकते हैं। एक बीघा भूमि के लिए जीवामृत तैयार करने में लगभग 2 किलोग्राम प्राकृतिक जंगल की मिट्टी, 1 किलोग्राम गुड़ और 20 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इसे तैयार होने में लगभग 15 से 20 दिन लगते हैं।
🔸पराली प्रबंधन में मिल रही मदद*
जीवामृत के उपयोग से मिट्टी में केंचुओं और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इससे खेत में मौजूद पराली के अपघटन में सहायता मिल सकती है। पराली को खेत में ही गलाने से उसके अवशेषों का उपयोग मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। इस प्रकार किसान पराली जलाने की आवश्यकता कम करने और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
🔸मिट्टी की उर्वरता और जलधारण क्षमता में सुधार*
जीवामृत के उपयोग से मिट्टी की जैविक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता है। इससे मिट्टी की संरचना, उर्वरता और जलधारण क्षमता में सुधार करने में मदद मिल सकती है। बेहतर जलधारण क्षमता होने से सिंचाई की आवश्यकता कम करने में सहायता मिल सकती है। साथ ही, मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।
🔸किसानों के लिए कम खर्च वाला उपयोगी विकल्प*
जीवामृत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम लागत और सरल निर्माण प्रक्रिया है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से इसे तैयार किया जा सकता है। इससे किसानों को पराली प्रबंधन के लिए एक वैकल्पिक उपाय मिलता है तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहन मिलता है।
🔸कृषि विभाग के मार्गदर्शन में किसानों द्वारा किए जा रहे ऐसे प्रयास टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। ग्राम करनावद में कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह द्वारा की गई सराहना से किसानों को इस नवाचार को आगे बढ़ाने तथा अन्य किसानों को भी इससे जोड़ने के लिए प्रोत्साहन मिला है।
Collector Office Ujjain
CM Madhya Pradesh Jansampark Madhya Pradesh
18 views | Umaria, Madhya Pradesh | Oct 22, 2026