ब्राह्मण के पास जब धन आता है तो वह अलख पांडेय बन जाता है और जब शक्ति आती है तो वह मेजर सोमनाथ शर्मा बनकर अपना सर्वस्व इस राष्ट्र को लूटा देता है.
अलख पांडेय सुदूर गाँव के लड़कियों को नर्सिंग करवाकर उसका सपना पूरा करते हैं. सैकड़ों टेलरिंग मशीन बांटकर वह महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ते हैं. असम से लेकर बिहार तक बाढ़ में मदद लेकर सुदूर गाँव की खाक छानते हैं जबकि वह AC कमरे में बैठकर आराम से खाते-पीते अन्य अरबपति की तरह जी सकते थें लेकिन जैसा नाम वैसा काम... अलख नाम है तो अलख कौन जगाएगा!
दधीचि से चली आ रही इस जनसेवा की परम्परा को आगे बढ़ाने के लिये अलख सर को ह्रदय से आभार.
ब्राह्मण तो देश के लिये आहुति और सेवा देने में प्रथम पायदान पर खड़ा रहता है. वह कभी राजा दाहिर तो कभी चंद्रशेखर आज़ाद बन जाता है. कभी वह रबिंदर कौशिक बनकर दुश्मनों के घर में घुस कर देश के लिये जान कुर्बान करता है, कभी वह मेजर मोहित शर्मा बनकर इंडियन मुजाहिद्दीन की कमर तोड़कर देश के लिये प्राण न्योछावर कर वतन से दूर चला जाता है और रह जाती है बस उसकी यादें.
अलख पांडेय आप इस कलयुग में भी गुरु हैं. जिनको पता न हो उनको बताते चले कि अलख पांडेय ने एक 1500 रूपये के white बोर्ड पर ऑनलाइन यूट्यूब पर पढ़ाना शुरू किया था और आज उनकी कंपनी PW अरबों रूपये से ऊपर की कंपनी बन चूकि है इसका ताज़ा सम्पति 7,716 करोड़ का है यानी 77 अरब रूपये से ऊपर की कम्पनी लेकिन अलख पांडेय आज भी जमीन से जुड़े हैं, सौम्य हैं और निरंतर राष्ट्र सेवा और चिंतन में लगे हुए हैं.
सलाम आपको अलख 🙏
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