अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं में तिजारा रोड पर स्थित पांडव काली ने ऐतिहासिक शिव मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है किंतु इन दोनों यहां बहाने वाले प्राकृतिक झरना अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत है यहां पर आने वाले श्रद्धालु इस प्राकृतिक झरने में फटे पुराने कपड़े पानी की खाली बोतल व कूड़ा में गंदगी डालकर इस झरने के अस्तित्व को मिटाने पर तुले हुए हैं वहीं दूसरी ओर अरावली श्रृंखलाओं में इस प्राकृतिक झरने को बढ़ाने वाली संस्था स्वच्छ झील गंगा अभियान के कार्यकर्ता पिछले कई वर्षों से जल क्षेत्र में अपना भूतपूर्व योगदान दे रहे हैं खाने को तो यहां पर शिव मंदिर विकास समिति जो कि पिछले कई दशकों से एक रजिस्टर्ड संस्था है उसका भी इस झरने के अस्तित्व को लेकर कोई ध्यान नहीं है याद रहे की इस पांडव कालीन ऐतिहासिक शिव मंदिर का हमारे इतिहास से अनूठा संबंध है अपने अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने विराटनगर जाते हुए इस स्थान पर अपना कुछ समय व्यतीत किया था और यहां शिवलिंग की स्थापना की कालांतर में स्थान जितनी मानता है दूर-दूर से देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पवित्र शिवलिंग पर जलाभिषेक कर धर्म लाभ उठाते हैं इसी बीच यहां पर बहने वाले प्राकृतिक झरने में पानी की काल काल की आवाज इस धार्मिक स्थल की शोभा और बढ़ा देती है इसी स्थान पर मध्य में शनि देव मंदिर का भी निर्माण किया गया है जहां पर श्रद्धालु न्याय के देवता शनि देव की पूजा अर्चना करते हैं शिव मंदिर विकास समिति को चाहिए कि इस झरने के अस्तित्व को बचाने के लिए व्यापक स्तर पर कम करें जिससे कि इस स्थान का अस्तित्व बचा रहे स्वच्छ झिरगंगा अभियान के संयोजक प्रेम योगी व विश्राम ने बताया कि उनकी संस्था झरने में पानी के रिचार्ज के लिए निरंतर काम करती रहेगी