#डबल इंजन का झूठा वादा सड़क के लिए तरस रहे #सिलोड़ा ग्रामीण-#राकेश राणा
#चांद पर पहुंच गया देश, लेकिन टिहरी के इस गांव तक आज तक सड़क नहीं पहुंची!
#पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य #प्रदेश कांग्रेस के #महासचिव #राकेश राणा ने कहा कि ग्राम पंचायत सिलोडा, उपली रमोली, विधानसभा प्रतापनगर, जनपद टिहरी गढ़वाल के अंतिम गांव में आज भी सड़क नहीं होने की वजह से लोगों को डंडी कंडि का सहारा लेकर सड़क मार्ग तक लाना पड़ता है आजादी के दशकों बाद और उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी यहां के ग्रामीण सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे हैं।
लगातार बारिश और खराब मौसम के बीच जब किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ती है, बुजुर्ग बीमार पड़ते हैं, जंगल में घास काटते समय कोई महिला दुर्घटनाग्रस्त होती है या किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होती है, तो उसे डंडी-कंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
जिस दुर्गम और फिसलन भरे रास्ते पर सामान्य व्यक्ति का चलना तक मुश्किल है, उसी रास्ते पर लाचार मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जिंदगी दांव पर लगाकर उन्हें अस्पताल पहुंचाने की मजबूरी है। समय पर उपचार न मिलने के कारण कई बार रास्ते में ही अनहोनी होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
सवाल सरकार से है—आखिर इन ग्रामीणों का गुनाह क्या है?
क्या सड़क सिर्फ शहरों और सड़कों से जुड़े गांवों का अधिकार है?
क्या पहाड़ के अंतिम छोर पर रहने वाला ग्रामीण इस मूलभूत सुविधा का हकदार नहीं है?
क्या चुनाव के समय किए गए वादे और घोषणाएं सिर्फ वोट लेने तक सीमित हैं?
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश राणा ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन सिलोडा जैसे सीमांत गांवों की तस्वीर नहीं बदली।
उन्होंने कहा कि यह गांव टिहरी और उत्तरकाशी जनपद की सीमा से लगा हुआ अंतिम क्षेत्र है। भाजपा की तथाकथित ‘डबल इंजन’ सरकार ने गांव तक सड़क पहुंचाने की कई बार घोषणाएं कीं, लेकिन घोषणाओं के बावजूद आज भी ग्रामीण उसी बदहाल रास्ते पर चलने को मजबूर हैं।
यह विकास के दावों की नहीं, सरकार की जमीनी नाकामी की तस्वीर है।
राकेश राणा ने कहा कि सरकार को घोषणाओं और जुमलों से बाहर निकलकर सिलोडा गांव तक सड़क निर्माण का कार्य तत्काल शुरू करना चाहिए। पहाड़ के ग्रामीणों को सड़क, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। उन्हें हर बार चुनाव के समय आश्वासन और चुनाव के बाद उपेक्षा स्वीकार नहीं है।
अब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, इंसानी जिंदगी का है।
सरकार बताए—सिलोडा के ग्रामीणों को सड़क कब मिलेगी?
और आखिर कितनी जिंदगियां डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाई जाएंगी?