BBMB एरियर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला हिमाचल के हक में, प्रदेश को मिलेगा हजारों करोड़ का लाभ: सुभाष वरमानी
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने सुक्खू सरकार की सराहना की, कहा– किशाऊ बांध के बाद हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई में मिली एक और बड़ी जीत
DNEWSNETWORK
सोलन, 6 नवंबर। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के एरियर मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हिमाचल प्रदेश के पक्ष में आने पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष वरमानी ने खुशी जाहिर करते हुए इसे प्रदेश के हितों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की दृढ़ इच्छाशक्ति, मजबूत नेतृत्व और प्रदेश के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता के चलते हिमाचल को उसका जायज हक दिलाने में सफलता मिली है। यह जीत किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश की जनता की जीत है।
सुभाष वरमानी ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल में हिमाचल के अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में सफलता हासिल की है। वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू और 15,624 करोड़ रुपये की किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के बाद BBMB एरियर मामले में मिली सफलता प्रदेश के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना के मामले में भी मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल के हितों से समझौता नहीं किया। पिछली भाजपा सरकार जहां प्रदेश पर करीब 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने पर सहमत हो गई थी, वहीं मुख्यमंत्री ने उस समझौते को स्वीकार करने के बजाय हिमाचल के लिए जीरो इन्वेस्टमेंट की शर्त सुनिश्चित की। इसके तहत प्रदेश को प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली का अधिकार मिला है, जिससे सालाना करीब 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये के राजस्व का लाभ मिलने की उम्मीद है।
BBMB के फैसले से मजबूत होगी प्रदेश की अर्थव्यवस्था
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि BBMB के 15 साल पुराने एरियर विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हिमाचल को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री द्वारा चंबा के मैहला में दिए गए बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस फैसले के तहत प्रदेश को 55 करोड़ यूनिट बिजली वापस मिलने का रास्ता साफ हुआ है, जिसे आगामी 20 वर्षों में लौटाया जाना है।
उन्होंने बताया कि यदि इस बिजली को न्यूनतम छह रुपये प्रति यूनिट की दर से बेचा जाता है तो प्रदेश को प्रतिवर्ष करीब 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। वहीं, 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद समझौता होने की स्थिति में यह राशि लगभग 1,000 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच सकती है। इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी और सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को गति मिलेगी।
भाजपा सरकार पर हिमाचल के हितों की अनदेखी का आरोप
सुभाष वर्मा ने पूर्व भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र और प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद भाजपा हिमाचल के अधिकारों की पैरवी करने में नाकाम रही। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किए, जबकि वर्तमान सरकार लगातार हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद हिमाचल के हितों को प्राथमिकता दी है। रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के बावजूद सरकार प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की नीतियों और विकास कार्यों के दम पर हिमाचल वर्ष 2032 तक देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल होगा।
वाटर सेस और चंडीगढ़ में हिस्सेदारी की लड़ाई भी जारी
सुभाष ने कहा कि किशाऊ बांध और BBMB के मामलों में मिली सफलता के बाद भी हिमाचल के कई महत्वपूर्ण अधिकारों की लड़ाई बाकी है। वाटर सेस और चंडीगढ़ में प्रदेश की जायज हिस्सेदारी जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला कांग्रेस संगठन प्रदेश सरकार के जनहितैषी फैसलों और हिमाचल के अधिकारों की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों के साथ मजबूती से खड़ा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश को मिलने वाले इन अधिकारों और संसाधनों का लाभ अंततः आम जनता तक पहुंचेगा तथा हिमाचल के विकास और आर्थिक मजबूती को नई दिशा मिलेगी।
Solan, Solan | Nov 6, 2026