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Sirsa, Sirsa | Jan 14, 2022

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'कुछ दिन की एक्सीडेंटल जिलाध्यक्ष'... गोकुल सेतिया के चार पोस्ट से सिरसा कांग्रेस में भूचाल
- जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल के विधायकों पर बयानों के बाद सोशल मीडिया पर खुला मोर्चा, सेतिया ने हुड्डा, सैलजा और विधायकों पर टिप्पणी का लगाया आरोप

सिरसा।
सिरसा कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब बंद कमरों से निकलकर सोशल मीडिया पर खुली जंग में बदल गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल के लगातार विवादित बयानों के बाद सिरसा विधायक गोकुल सेतिया ने एक के बाद एक चार सोशल मीडिया पोस्ट कर जिलाध्यक्ष पर तीखा हमला बोला। सेतिया ने उन्हें "कुछ दिन की एक्सीडेंटल जिलाध्यक्ष" बताते हुए आरोप लगाया कि वह पहले नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, फिर सांसद कुमारी सैलजा और अब पार्टी के विधायकों के खिलाफ अनाप-शनाप बयानबाजी कर रही हैं। सेतिया की पोस्ट ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है। पहली बार किसी मौजूदा विधायक ने अपनी ही जिलाध्यक्ष पर इतने तीखे शब्दों में हमला बोला है।

गोकुल सेतिया के चार पोस्ट बने सियासी हथियार

पहली पोस्ट :
"जो जेठ को राजनीतिक चपत लगाने के चक्कर में हैं, अपने घर-परिवार की सगी नहीं, वो किसी और की क्या सगी होगी। माननीय जिला अध्यक्ष जी।"

दूसरी पोस्ट
"पहले हुड्डा जी पर टिप्पणी, फिर सैलजा जी पर और अब विधायकों पर। तुम हो के थोड़े दिन की एक्सीडेंटल जिला अध्यक्ष जी, बेरा पाट जावेगा जल्द।'

तीसरी पोस्ट
"शीशपाल जी जैसे दूसरी बार के विधायक के लिए कालांवाली में जाकर क्या अनाप-शनाप बोलकर आई ये सिरसा की जिलाध्यक्ष।'

चौथी पोस्ट
"अब ये जिलाध्यक्ष हमें राजनीति का पाठ पढ़ाएगी। अगला चुनाव लड़कर देखना, औकात सामने आ जाएगी। खुद कहती थी कि कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष नहीं बनाया तो भाजपा में चली जाऊंगी।'
 इन चारों पोस्ट के जरिए सेतिया ने साफ संकेत दे दिया कि अब विवाद केवल मतभेद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

क्या था जिलाध्यक्ष का बयान, जिससे भड़का विवाद
 विवाद की जड़ जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल के वे बयान हैं, जिनमें उन्होंने पहले विधायक गोकुल सेतिया की पोस्ट को "बचपना' बताया और फिर कालांवाली में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान कहा— "मुझे नेताओं के आने या न आने से कोई फर्क नहीं पड़ता। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की वजह से जिंदा है, नेताओं की वजह से नहीं।' राजनीतिक गलियारों में इस बयान को सीधे दोनों कांग्रेस विधायकों पर निशाना माना गया।

विधायक शीशपाल कहरवाला भी हुए हमलावर
 कालांवाली विधायक शीशपाल कहरवाला ने भी पलटवार करते हुए कहा कि जिलाध्यक्ष संगठन नहीं, अपनी "दुकान' चलाना चाहती हैं और ऐसी दुकानें ज्यादा दिन नहीं चलतीं। उन्होंने दावा किया कि बैठक में पहुंचे कई कार्यकर्ताओं को यह तक नहीं पता था कि बैठक किस मकसद से बुलाई गई थी।

जिलाध्यक्ष पर उठ रहे सवाल
 प्रदेश स्तर पर जहां हुड्डा और सैलजा के बीच तालमेल बढ़ने की चर्चा है, वहीं सिरसा में जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल की बयानबाजी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। संगठन को एकजुट करने की जिम्मेदारी निभाने के बजाय अपने ही सांसद और विधायकों से टकराव की स्थिति बनने से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति खुलकर सामने आ गई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिलाध्यक्ष संगठन को मजबूत कर रही हैं या फिर अपने ही नेताओं से टकराकर कांग्रेस में एक नया शक्ति केंद्र खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं? फिलहाल गोकुल सेतिया की चार सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विवाद को और हवा दे दी है और सिरसा कांग्रेस के दो गुट जहां एक होते नजर आ रहे हैं वहीं जिलाध्यक्ष की गुटबाजी सार्वजनिक मंच पर आ चुकी है।

संगठन जोड़ने की जगह नया खेमा? सिरसा कांग्रेस में जिलाध्यक्ष की बयानबाजी से गहराया सियासी संग्राम
- हुड्डा-सैलजा की दूरियां घटीं तो सिरसा में बढ़ीं नई दरारें, जिलाध्यक्ष के बयानों से विधायक आमने-सामने; सोशल मीडिया पर खुलकर हुआ पलटवार

सिरसा।
सिरसा कांग्रेस में संगठन को मजबूत करने की बजाय अब नेतृत्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश स्तर पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद कुमारी सैलजा के बीच बढ़ती नजदीकियों के बीच सिरसा में जिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष बेनिवाल की बयानबाजी ने पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी के दोनों विधायक ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोले हुए हैं। 
 विवाद की शुरुआत तब हुई जब जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल ने पहले रानियां में कहा कि मुझे सैलजा ने नहीं बल्कि खडगे और राहुल गांधी ने जिलाध्यक्ष बनाया है। इसके लिए वह प्रूफ देने को भी तैयार है। फिर संतोष बैनीवाल ने विधायक गोकुल सेतिया की सोशल मीडिया पोस्ट को "बचपना" बताते हुए हल्के में लिया और बाद में कालांवाली में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान यह कह दिया कि "नेताओं की जरूरत नहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बदौलत जिंदा है।" इस बयान को सीधे तौर पर कांग्रेस विधायकों पर निशाना माना गया।
 बेनिवाल के इन बयानों के बाद सिरसा विधायक गोकुल सेतिया ने लगातार चार सोशल मीडिया पोस्ट कर जिलाध्यक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष पहले नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, फिर सांसद कुमारी सैलजा और अब पार्टी के विधायकों पर सार्वजनिक टिप्पणी कर रही हैं। सेतिया ने यहां तक लिख दिया कि "कुछ दिन की एक्सीडेंटल जिलाध्यक्ष हैं, जल्द पता चल जाएगा।" एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि जो अपने ही परिवार और राजनीतिक रिश्तों का सम्मान नहीं कर सकती, वह दूसरों की क्या होगी।

जिलाध्यक्ष के निशाने पर अपने ही विधायक, क्या तीसरा शक्ति केंद्र बनाने की कोशिश?
 राजनीतिक जानकारों का कहना है कि किसी भी जिलाध्यक्ष की प्राथमिक जिम्मेदारी संगठन को जोड़ना और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय बनाना होती है, लेकिन सिरसा में स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। सार्वजनिक मंचों से अपने ही विधायकों पर टिप्पणी करना और फिर उसके जवाब में सोशल मीडिया पर खुली बयानबाजी होना संगठन की कमजोरी को उजागर कर रहा है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि प्रदेश में हुड्डा और सैलजा खेमे के बीच रिश्ते सामान्य होने के बाद सिरसा में जिलाध्यक्ष अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। पिछले कुछ समय से वह सांसद कुमारी सैलजा के कार्यक्रमों में भी कम नजर आई हैं, जबकि विधायकों के साथ उनकी दूरी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

'कुछ दिन की एक्सीडेंटल जिलाध्यक्ष'... गोकुल सेतिया के चार पोस्ट से सिरसा कांग्रेस में भूचाल - जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल के विधायकों पर बयानों के बाद सोशल मीडिया पर खुला मोर्चा, सेतिया ने हुड्डा, सैलजा और विधायकों पर टिप्पणी का लगाया आरोप सिरसा। सिरसा कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब बंद कमरों से निकलकर सोशल मीडिया पर खुली जंग में बदल गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल के लगातार विवादित बयानों के बाद सिरसा विधायक गोकुल सेतिया ने एक के बाद एक चार सोशल मीडिया पोस्ट कर जिलाध्यक्ष पर तीखा हमला बोला। सेतिया ने उन्हें "कुछ दिन की एक्सीडेंटल जिलाध्यक्ष" बताते हुए आरोप लगाया कि वह पहले नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, फिर सांसद कुमारी सैलजा और अब पार्टी के विधायकों के खिलाफ अनाप-शनाप बयानबाजी कर रही हैं। सेतिया की पोस्ट ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है। पहली बार किसी मौजूदा विधायक ने अपनी ही जिलाध्यक्ष पर इतने तीखे शब्दों में हमला बोला है। गोकुल सेतिया के चार पोस्ट बने सियासी हथियार पहली पोस्ट : "जो जेठ को राजनीतिक चपत लगाने के चक्कर में हैं, अपने घर-परिवार की सगी नहीं, वो किसी और की क्या सगी होगी। माननीय जिला अध्यक्ष जी।" दूसरी पोस्ट "पहले हुड्डा जी पर टिप्पणी, फिर सैलजा जी पर और अब विधायकों पर। तुम हो के थोड़े दिन की एक्सीडेंटल जिला अध्यक्ष जी, बेरा पाट जावेगा जल्द।' तीसरी पोस्ट "शीशपाल जी जैसे दूसरी बार के विधायक के लिए कालांवाली में जाकर क्या अनाप-शनाप बोलकर आई ये सिरसा की जिलाध्यक्ष।' चौथी पोस्ट "अब ये जिलाध्यक्ष हमें राजनीति का पाठ पढ़ाएगी। अगला चुनाव लड़कर देखना, औकात सामने आ जाएगी। खुद कहती थी कि कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष नहीं बनाया तो भाजपा में चली जाऊंगी।' इन चारों पोस्ट के जरिए सेतिया ने साफ संकेत दे दिया कि अब विवाद केवल मतभेद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। क्या था जिलाध्यक्ष का बयान, जिससे भड़का विवाद विवाद की जड़ जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल के वे बयान हैं, जिनमें उन्होंने पहले विधायक गोकुल सेतिया की पोस्ट को "बचपना' बताया और फिर कालांवाली में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान कहा— "मुझे नेताओं के आने या न आने से कोई फर्क नहीं पड़ता। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की वजह से जिंदा है, नेताओं की वजह से नहीं।' राजनीतिक गलियारों में इस बयान को सीधे दोनों कांग्रेस विधायकों पर निशाना माना गया। विधायक शीशपाल कहरवाला भी हुए हमलावर कालांवाली विधायक शीशपाल कहरवाला ने भी पलटवार करते हुए कहा कि जिलाध्यक्ष संगठन नहीं, अपनी "दुकान' चलाना चाहती हैं और ऐसी दुकानें ज्यादा दिन नहीं चलतीं। उन्होंने दावा किया कि बैठक में पहुंचे कई कार्यकर्ताओं को यह तक नहीं पता था कि बैठक किस मकसद से बुलाई गई थी। जिलाध्यक्ष पर उठ रहे सवाल प्रदेश स्तर पर जहां हुड्डा और सैलजा के बीच तालमेल बढ़ने की चर्चा है, वहीं सिरसा में जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल की बयानबाजी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। संगठन को एकजुट करने की जिम्मेदारी निभाने के बजाय अपने ही सांसद और विधायकों से टकराव की स्थिति बनने से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति खुलकर सामने आ गई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिलाध्यक्ष संगठन को मजबूत कर रही हैं या फिर अपने ही नेताओं से टकराकर कांग्रेस में एक नया शक्ति केंद्र खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं? फिलहाल गोकुल सेतिया की चार सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विवाद को और हवा दे दी है और सिरसा कांग्रेस के दो गुट जहां एक होते नजर आ रहे हैं वहीं जिलाध्यक्ष की गुटबाजी सार्वजनिक मंच पर आ चुकी है। संगठन जोड़ने की जगह नया खेमा? सिरसा कांग्रेस में जिलाध्यक्ष की बयानबाजी से गहराया सियासी संग्राम - हुड्डा-सैलजा की दूरियां घटीं तो सिरसा में बढ़ीं नई दरारें, जिलाध्यक्ष के बयानों से विधायक आमने-सामने; सोशल मीडिया पर खुलकर हुआ पलटवार सिरसा। सिरसा कांग्रेस में संगठन को मजबूत करने की बजाय अब नेतृत्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश स्तर पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद कुमारी सैलजा के बीच बढ़ती नजदीकियों के बीच सिरसा में जिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष बेनिवाल की बयानबाजी ने पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी के दोनों विधायक ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोले हुए हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल ने पहले रानियां में कहा कि मुझे सैलजा ने नहीं बल्कि खडगे और राहुल गांधी ने जिलाध्यक्ष बनाया है। इसके लिए वह प्रूफ देने को भी तैयार है। फिर संतोष बैनीवाल ने विधायक गोकुल सेतिया की सोशल मीडिया पोस्ट को "बचपना" बताते हुए हल्के में लिया और बाद में कालांवाली में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान यह कह दिया कि "नेताओं की जरूरत नहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बदौलत जिंदा है।" इस बयान को सीधे तौर पर कांग्रेस विधायकों पर निशाना माना गया। बेनिवाल के इन बयानों के बाद सिरसा विधायक गोकुल सेतिया ने लगातार चार सोशल मीडिया पोस्ट कर जिलाध्यक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष पहले नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, फिर सांसद कुमारी सैलजा और अब पार्टी के विधायकों पर सार्वजनिक टिप्पणी कर रही हैं। सेतिया ने यहां तक लिख दिया कि "कुछ दिन की एक्सीडेंटल जिलाध्यक्ष हैं, जल्द पता चल जाएगा।" एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि जो अपने ही परिवार और राजनीतिक रिश्तों का सम्मान नहीं कर सकती, वह दूसरों की क्या होगी। जिलाध्यक्ष के निशाने पर अपने ही विधायक, क्या तीसरा शक्ति केंद्र बनाने की कोशिश? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि किसी भी जिलाध्यक्ष की प्राथमिक जिम्मेदारी संगठन को जोड़ना और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय बनाना होती है, लेकिन सिरसा में स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। सार्वजनिक मंचों से अपने ही विधायकों पर टिप्पणी करना और फिर उसके जवाब में सोशल मीडिया पर खुली बयानबाजी होना संगठन की कमजोरी को उजागर कर रहा है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि प्रदेश में हुड्डा और सैलजा खेमे के बीच रिश्ते सामान्य होने के बाद सिरसा में जिलाध्यक्ष अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। पिछले कुछ समय से वह सांसद कुमारी सैलजा के कार्यक्रमों में भी कम नजर आई हैं, जबकि विधायकों के साथ उनकी दूरी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

Sirsa, Sirsa | Aug 7, 2026

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Sirsa, Sirsa | Aug 7, 2026

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