मिटने वाली दुनिया का ऐतबार करता है, क्या समझ के तू आखिर इससे प्यार करता है।
आनंद लेना है तो स्वर पर नही शब्द पर ध्यान दीजिएगा।
मैं तो विद्रोह का उपासक हु इतने ही सुर में आ सकता हु।
मिटने वाली दुनिया का ऐतबार करता है, क्या समझ के तू आखिर इससे प्यार करता है।
आनंद लेना है तो स्वर पर नही शब्द पर ध्यान दीजिएगा।
मैं तो विद्रोह का उपासक हु इतने ही सुर में आ सकता हु। - Chhattisgarh News