बारिश भी नहीं रोक सकी 'चिता आंदोलन' की आवाज!
छतरपुर/पन्ना: केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी सहित विभिन्न विकास परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों का 'चिता आंदोलन' लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं, पुरुष और ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे।
आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रभावित परिवारों को न्याय, उचित मुआवजा, पुनर्वास और कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जब तक वास्तविक प्रभावितों को न्याय नहीं मिलता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
आंदोलन में शामिल कई आदिवासी महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन और गांव जबरन छीने गए, सरकारी दफ्तरों में काम के बदले रिश्वत मांगी जाती है और उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर दबाव बनाया जाता है।
बारिश के बीच आंदोलनकारियों ने दोहराया कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। उनकी मांग है कि सभी प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा, उचित पुनर्वास और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, इस मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
👉 क्या आपको लगता है कि प्रभावित परिवारों की मांगों पर सरकार को तुरंत निर्णय लेना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।
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