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*दक्षिण-पूर्व एशिया से आया मौसमी मेहमान:व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट* *रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य को बनाया अपने पसंदीदा प्रजनन का ठिकाना* किन्नौर: हर साल जब किन्नौर के ऊँचे पहाड़ों से बर्फ़ पिघलने लगती है, हिमालय का एक बेहद शर्मीला गीत-पक्षी चुपके से रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य की ऊँचाई वाली झाड़ियों में लौट आता है। कश्मल (बरबेरी), जूनिपर और बुरांश की घनी झाड़ियों की ओट में व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट (Luscinia phaenicuroides) अपना प्रजनन काल शुरू करता है। मई से सितम्बर तक का यह समय इस पक्षी को उसके प्रजनन काल में देखने का सबसे अच्छा मौका देता है। इन महीनों में अभयारण्य आने वाले पक्षी-प्रेमियों, प्रकृति-प्रेमियों और वन्यजीव फ़ोटोग्राफ़रों के पास इस दुर्लभ हिमालयी पक्षी को उसके अपने प्राकृतिक ठिकाने में देखने का बढ़िया अवसर रहता है। हिमालय के कई पक्षियों की तरह यह आसानी से नज़र नहीं आता — दिखने से पहले ज़्यादातर सुनाई देता है। इसकी साफ़, घंटी-सी सीटी और उसके पीछे आती तीखी "टुक-टुक" पुकार ही बता देती है कि पक्षी आस-पास है, जबकि वह ख़ुद घनी झाड़ियों में छिपा रहता है। नर देखने में बेहद ख़ूबसूरत होता है — ऊपर से स्लेटी-नीला, नीचे सफ़ेद और पूँछ चटख़ लाल-भूरी। इसके उलट मादा भूरे रंग की होती है, जो आस-पास के परिवेश में ऐसे घुल जाती है कि नज़र आना मुश्किल हो जाता है। डॉ. मल्यश्री भट्टाचार्य, ईबर्ड समीक्षक, बताती हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट ऊँचाई के हिसाब से मौसमी प्रवास करने वाला पक्षी है, जो मई से जून के बीच अपने प्रजनन-स्थल पर पहुँच जाता है। यह पेड़ों की ऊपरी सीमा (treeline) के पास की घनी झाड़ियाँ पसंद करता है और वहीं ज़मीन के क़रीब अच्छी तरह छिपा हुआ कटोरीनुमा घोंसला बनाकर आमतौर पर दो से तीन नीले या नीले-हरे अंडे देता है। उनका कहना है कि कम दख़ल वाली, सेहतमंद झाड़ियाँ इसके सफल प्रजनन के लिए बेहद ज़रूरी हैं, और यही बात रकछम–छितकुल अभयारण्य को पश्चिमी हिमालय में इस प्रजाति के लिए एक अहम प्रजनन-भूमि बना देती है। अपने क्षेत्रीय अनुभव साझा करते हुए श्री संतोष कुमार ठाकुर, क्षेत्रीय समन्वयक, बर्ड काउंट इंडिया एवं खंड वन अधिकारी, हिमाचल प्रदेश, कहते हैं कि यह पक्षी हर साल प्रजनन के लिए रकछम–छितकुल अभयारण्य की ऊँचाई वाली जगहों पर लौटता है और मई से सितम्बर तक यहीं रहता है। इन महीनों में यह अभयारण्य पूरे हिमाचल में इस पक्षी को उसके प्राकृतिक प्रजनन-स्थल में देखने के सबसे अच्छे ठिकानों में से एक बन जाता है। पिछले दो प्रजनन कालों के अपने अवलोकनों के आधार पर उन्होंने अभयारण्य में सात से आठ जगहों पर प्रजनन दर्ज किया है, और उनका मानना है कि व्यवस्थित सर्वेक्षण होने पर ऐसी और भी कई जगहें सामने आएँगी। वे यह भी बताते हैं कि प्रजनन काल में ये पक्षी ज़्यादातर कीड़ों के लार्वा खाते देखे गए हैं, जो इस दौरान इनके भोजन का बड़ा हिस्सा लगता है। वन्यप्राणी विशेषज्ञ हिमांशु चौधरी स्थानीय वनस्पति के महत्व पर ज़ोर देते हुए बताते हैं कि काँटेदार कश्मल और घनी जूनिपर की झाड़ियाँ घोंसले के लिए बेहतरीन आड़ देती हैं और प्रजनन के दिनों में इन पक्षियों को शिकारियों से बचाती हैं। ये सेहतमंद झाड़ियाँ इस प्रजाति के सफल प्रजनन में बड़ी भूमिका निभाती हैं। सर्दियाँ नज़दीक आते ही रेडस्टार्ट नीचे उतरकर गरम, कम ऊँचाई वाली नदी-घाटियों और पहाड़ी ढलानों की ओर चला जाता है। इन बातों का समर्थन करते हुए वन्यप्राणी विशेषज्ञ अंकुश ठाकुर कहते हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट को देखने से पहले प्रायः सुना ही जाता है। रकछम–छितकुल अभयारण्य में प्रजनन काल के दौरान इसे दर्ज करने के साथ-साथ उन्होंने इसे रुपिन दर्रे और चांशल दर्रे के पास भी देखा है। उनका कहना है कि यह प्रजाति उत्तर-पश्चिम में लाहौल से आगे पांगी घाटी तक भी प्रजनन करती है — यानी पश्चिमी हिमालय में पेड़ों की ऊपरी सीमा के आस-पास के उपयुक्त इलाके इसकी प्रजनन-आबादी को सहारा देते हैं, और इन पर लगातार वैज्ञानिक अध्ययन तथा संरक्षण की ज़रूरत है। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए वन्यप्राणी विशेषज्ञ गैरी भट्टी कहते हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट उन पक्षियों में से है जो धैर्य रखने वालों को इनाम देते हैं। इसका छिपा-छिपा रहने वाला स्वभाव याद दिलाता है कि हिमालय में आज भी कितने ही प्राकृतिक ख़ज़ाने ऐसे हैं जिन्हें समझा और सहेजा जाना बाक़ी है। संरक्षण के इन प्रयासों की सराहना करते हुए श्रीमती प्रीति भंडारी, आईएफएस, अरण्यपाल शिमला वाइल्डलाइफ ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण सबकी साझी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के वनअधिकारियों, वन्यप्राणी विशेषज्ञ और स्वयंसेवकों के समर्पण को सराहा, जिनकी लगातार मेहनत हिमाचल की समृद्ध जैव-विविधता को बचाने में मदद कर रही है। डॉ. अमित कुमार शर्मा, आईएएस उपायुक्त, किन्नौर ने कहा कि किन्नौर की समृद्ध प्राकृतिक विरासत ज़िले की सबसे बड़ी ताक़तों में से एक है। उन्होंने कहा कि यहाँ के जंगलों और ऊँचाई वाले इलाकों की रक्षा बहुत ज़रूरी है, ताकि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट जैसी ख़ास प्रजातियाँ आने वाली पीढ़ियों तक फलती-फूलती रहें। रकछम–छितकुल अभयारण्य की अपनी हालिया यात्रा के दौरान श्रीमती नीरजा वी.,आईपीएस, वरिष्ठ पुलिस महानिदेशक, चंडीगढ़ को इस पक्षी को उसके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिला। उन्होंने इसे एक यादगार अनुभव बताया और कहा कि ऐसे साफ़-सुथरे, अछूते नज़ारे हमें हिमालय की अनमोल जैव-विविधता को सहेजने की हमारी साझी ज़िम्मेदारी की याद दिलाते हैं। श्री अशोक नेगी, आईएफएस उप अरण्यपाल सराहन ने कहा कि रकछम–छितकुल अभयारण्य असाधारण जैव-विविधता का घर है, और व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट जैसी प्रजातियों को समझने और बचाने के लिए लगातार निगरानी और आवास-संरक्षण बेहद ज़रूरी है। श्री डी. ढडवाल, प्रभागीय वन अधिकारी ने कहा कि हर नया रिकॉर्ड हिमालयी वन्यजीवन के बारे में हमारी समझ को और पुख़्ता करता है, और वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण आगे के संरक्षण कार्यों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। प्रजाति की समझ में योगदान देते हुए डॉ. अभिनव चौधरी बताते हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट पूरे पश्चिमी हिमालय के उपयुक्त इलाकों में प्रजनन करता है। प्रजनन काल ख़त्म होते ही ये पक्षी अपने शीतकालीन ठिकानों की ओर लौट जाते हैं और इस तरह अपना सालाना मौसमी सफ़र पूरा करते हैं। उनका कहना है कि प्रजनन-आबादी पर लगातार नज़र रखने से शोधकर्ताओं को इस प्रजाति के जीवन और प्रवास के तौर-तरीक़ों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। भले ही व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट अभी विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रजाति नहीं मानी जाती, फिर भी सेहतमंद ऊँचाई वाली झाड़ियों पर इसकी निर्भरता इसे हिमालय की पारिस्थितिक सेहत का एक अहम संकेतक बना देती है। रकछम–छितकुल अभयारण्य से मिल रहे प्रजनन के बढ़ते रिकॉर्ड इन नाज़ुक पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण-महत्व को उजागर करते हैं, और यह भी याद दिलाते हैं कि हिमाचल के इस दिलचस्प पक्षी को बचाए रखने के लिए लगातार शोध, आवास-संरक्षण और लोगों की भागीदारी कितनी ज़रूरी है। फ़ील्ड नोट्स वैज्ञानिक नाम: Luscinia phaenicuroides कुल (Family): Muscicapidae प्रजनन ऊँचाई: 2,800–4,000 मीटर प्रजनन काल: मई–सितम्बर घोंसला: कटोरीनुमा, घनी झाड़ियों के नीचे ज़मीन पर या उसके पास बना हुआ अंडे: 2–3, नीले से नीले-हरे रंग के पसंदीदा आवास: कश्मल, जूनिपर और बुरांश वाली treeline झाड़ियाँ प्रवास: ऊँचाई के हिसाब से मौसमी प्रवासी हिमाचल में देखने की सबसे अच्छी जगह: रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य, किन्नौर

Shimla Urban, Shimla | Jul 11, 2026

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चौपाल के पुलबाहल में सेब की 10 हजार पौधों की नर्सरी पर जहरीले स्प्रे का आरोप, लाखों के नुकसान का दावा; पीड़ित परिवार ने मांगी सुरक्षा।

न्यूज टुडे हिमाचल ब्यूरो, चौपाल

शिमला जिले के चौपाल उपमंडल के पुलबाहल क्षेत्र में सेब की नर्सरी को कथित रूप से जहरीले खरपतवार नाशक स्प्रे से नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने चौपाल थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई है और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ न्याय की मांग की है।

चौपाल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान पीड़ित ने बताया कि उनकी सेब की नर्सरी में करीब 10 हजार पौधे तैयार किए गए थे। आरोप है कि किसी ने नर्सरी में खरपतवार नाशक स्प्रे कर दिया, जिससे अधिकांश पौधे झुलस गए। उनका दावा है कि इस घटना से उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि जिस परिवार पर वे संदेह जता रहे हैं, उसका आपराधिक इतिहास रहा है। उनका कहना है कि उक्त परिवार ने पहले भी उनके बड़े भाई के साथ मारपीट की थी, जिसमें उनके भाई की टांगें टूट गई थीं। परिवार ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और पुलिस से उचित संरक्षण उपलब्ध कराने की मांग की है।

पीड़ित ने प्रशासन और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों का पता चल सकेगा।

चौपाल के पुलबाहल में सेब की 10 हजार पौधों की नर्सरी पर जहरीले स्प्रे का आरोप, लाखों के नुकसान का दावा; पीड़ित परिवार ने मांगी सुरक्षा। न्यूज टुडे हिमाचल ब्यूरो, चौपाल शिमला जिले के चौपाल उपमंडल के पुलबाहल क्षेत्र में सेब की नर्सरी को कथित रूप से जहरीले खरपतवार नाशक स्प्रे से नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने चौपाल थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई है और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ न्याय की मांग की है। चौपाल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान पीड़ित ने बताया कि उनकी सेब की नर्सरी में करीब 10 हजार पौधे तैयार किए गए थे। आरोप है कि किसी ने नर्सरी में खरपतवार नाशक स्प्रे कर दिया, जिससे अधिकांश पौधे झुलस गए। उनका दावा है कि इस घटना से उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि जिस परिवार पर वे संदेह जता रहे हैं, उसका आपराधिक इतिहास रहा है। उनका कहना है कि उक्त परिवार ने पहले भी उनके बड़े भाई के साथ मारपीट की थी, जिसमें उनके भाई की टांगें टूट गई थीं। परिवार ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और पुलिस से उचित संरक्षण उपलब्ध कराने की मांग की है। पीड़ित ने प्रशासन और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों का पता चल सकेगा।

Shimla Urban, Shimla | Jul 25, 2026

*सुन्नी के समग्र विकास को गति, 25 करोड़ की पेयजल योजना एक माह में होगी समर्पित - विक्रमादित्य सिंह*

लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सुन्नी क्षेत्र का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है तथा लोगों को सभी मूलभूत एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को सुन्नी तहसील में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
कैबिनेट मंत्री आज सुन्नी में नगर पंचायत सुन्नी के कार्यक्रम में उपस्थित जनता को सम्बोधित कर रहे थे। 
लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित की जा रही सुन्नी पेयजल योजना का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आगामी एक माह के भीतर यह योजना सुन्नी के लोगों को समर्पित कर दी जाएगी। इसी प्रकार, सिराज क्षेत्र के केलबागड़ी में 18 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पेयजल योजना हाल ही में लोगों को समर्पित की गई है, जिससे क्षेत्र के लोगों को पेयजल की समस्या से राहत मिली है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा सुन्नी बस डिपो को 10 नई इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे सुन्नी तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी और आवागमन संबंधी समस्याओं में कमी आएगी।
उन्होंने सुन्नी-लूहरी सड़क मार्ग के विस्तारीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि सड़क निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा, जिससे लोगों को लंबी यात्रा और घंटों के सफर से राहत मिलेगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से एचपी रेड्डी परियोजना के अंतर्गत सुन्नी-लूहरी सड़क मार्ग के उन्नयन एवं विस्तारीकरण के लिए 30 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। इससे इस सड़क मार्ग को अधिक चौड़ा, सुरक्षित तथा गुणवत्तायुक्त बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि गत महीनों थली पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके मरम्मत कार्य के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वर्तमान में पुल की मरम्मत का कार्य प्रगति पर है।
इसके अतिरिक्त, सुन्नी क्षेत्र के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली मल निकासी परियोजना के टेंडर जारी कर दिए गए हैं तथा शीघ्र ही इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

*सुन्नी में होगा बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण*
उन्होंने बताया कि सुन्नी में बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के माध्यम से 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, हनुमान मंदिर के समीप वातानुकूलित (एसी) लाइब्रेरी का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।

*यह रहे उपस्थित* 
इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष शिमला ग्रामीण हरी कृष्ण हिमराल, पंचायत समिति अध्यक्षा कौशल्या, नगर पंचायत सुन्नी की अध्यक्षा सत्या वर्मा, उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) सुन्नी राजेश वर्मा सहित कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

*जनसमस्याएं सुनी, शांतिपूर्ण सामाजिक मार्च में लिया हिस्सा*
इससे पूर्व लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में जन समस्याएं सुनी और अधिकारियों के सहयोग से अधिकतर समस्याओं का समाधान मौके पर ही सुनिश्चित किया। उन्होंने सुन्नी बाजार में शांतिपूर्ण सामाजिक मार्च में भी हिस्सा लिया। 
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*सुन्नी के समग्र विकास को गति, 25 करोड़ की पेयजल योजना एक माह में होगी समर्पित - विक्रमादित्य सिंह* लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सुन्नी क्षेत्र का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है तथा लोगों को सभी मूलभूत एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को सुन्नी तहसील में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कैबिनेट मंत्री आज सुन्नी में नगर पंचायत सुन्नी के कार्यक्रम में उपस्थित जनता को सम्बोधित कर रहे थे। लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित की जा रही सुन्नी पेयजल योजना का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आगामी एक माह के भीतर यह योजना सुन्नी के लोगों को समर्पित कर दी जाएगी। इसी प्रकार, सिराज क्षेत्र के केलबागड़ी में 18 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पेयजल योजना हाल ही में लोगों को समर्पित की गई है, जिससे क्षेत्र के लोगों को पेयजल की समस्या से राहत मिली है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा सुन्नी बस डिपो को 10 नई इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे सुन्नी तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी और आवागमन संबंधी समस्याओं में कमी आएगी। उन्होंने सुन्नी-लूहरी सड़क मार्ग के विस्तारीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि सड़क निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा, जिससे लोगों को लंबी यात्रा और घंटों के सफर से राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से एचपी रेड्डी परियोजना के अंतर्गत सुन्नी-लूहरी सड़क मार्ग के उन्नयन एवं विस्तारीकरण के लिए 30 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। इससे इस सड़क मार्ग को अधिक चौड़ा, सुरक्षित तथा गुणवत्तायुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गत महीनों थली पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके मरम्मत कार्य के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वर्तमान में पुल की मरम्मत का कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, सुन्नी क्षेत्र के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली मल निकासी परियोजना के टेंडर जारी कर दिए गए हैं तथा शीघ्र ही इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। *सुन्नी में होगा बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण* उन्होंने बताया कि सुन्नी में बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के माध्यम से 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, हनुमान मंदिर के समीप वातानुकूलित (एसी) लाइब्रेरी का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। *यह रहे उपस्थित* इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष शिमला ग्रामीण हरी कृष्ण हिमराल, पंचायत समिति अध्यक्षा कौशल्या, नगर पंचायत सुन्नी की अध्यक्षा सत्या वर्मा, उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) सुन्नी राजेश वर्मा सहित कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। *जनसमस्याएं सुनी, शांतिपूर्ण सामाजिक मार्च में लिया हिस्सा* इससे पूर्व लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में जन समस्याएं सुनी और अधिकारियों के सहयोग से अधिकतर समस्याओं का समाधान मौके पर ही सुनिश्चित किया। उन्होंने सुन्नी बाजार में शांतिपूर्ण सामाजिक मार्च में भी हिस्सा लिया। -0-

Shimla Urban, Shimla | Jul 25, 2026