वाण गांव पहुंचते ही, मां नंदा ने दिखाया चमत्कार, वाण गांव पहुंचते ही मानंदा की डोली ने अपनी स्पीड लगभग 10 गुना बढ़ा दी और डोली को नियंत्रित करने में श्रद्धालुओं की पसीने छूटे मा नंदा के वाण गांव पहुंचने की खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
वाण गाँव की सीमा में कदम रखते ही मानो प्रकृति ने साँस रोक ली। माँ नंदा की डोली अचानक तेज़ हो गई। जो श्रद्धालु उसे थामे हुए थे, उनके माथे पर पसीने की बूँदें चमक उठीं। डोली में बैठी माँ की खुशी साफ महसूस हो रही थी – जैसे बेटी अपने मायके पहुँचकर उछल पड़ी हो।
यह कोई साधारण यात्रा नहीं। माँ नंदा की डोली अपना मार्ग स्वयं चुनती है। कभी इतनी भारी हो जाती है कि सैकड़ों भक्त मिलकर भी उसे उठा न पाएँ, तो कभी इतनी हलकी कि हवा में तैरती-सी लगने लगे। नंद के पड़ाव के निकट पहुँचते ही चमत्कार चरम पर होता है – डोली की गति लगभग दस गुना बढ़ जाती है और उसका वजन लगभग दस गुना कम हो जाता है। मानो माँ स्वयं दौड़कर अपने घर पहुँचना चाहती हों।
यह वजन का घटना-बढ़ना, गति का अचानक बदलना – सब माँ की लीला है। कोई मशीन नहीं, कोई हिसाब नहीं, सिर्फ माँ की इच्छा। श्रद्धालु केवल साधन हैं; वास्तविक चालक तो स्वयं माँ नंदा हैं।
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