7 साल का एक मासूम बच्चा अपनी मां के साथ बस स्टैंड पर खड़ा था। अचानक उसकी मां बेहोश होकर गिर गई। आसपास के लोगों की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा सके।
इसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। मासूम बच्चा अपनी मां का शव लेने के लिए अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों के सामने हाथ जोड़ता रहा, लेकिन इलाज का बिल जमा किए बिना शव देने से इनकार कर दिया गया।
जब कुछ सामाजिक संगठनों ने आगे आकर अस्पताल का बकाया चुकाया, तब जाकर बच्चे को उसकी मां का शव मिला। लेकिन उसकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। रिश्तेदारों ने भी अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया।
एक 7 साल का बच्चा अपनी मां के अंतिम संस्कार के लिए मदद का इंतजार करता रहा। आखिरकार जिला प्रशासन आगे आया और सरकारी खर्च पर उसकी मां का अंतिम संस्कार कराया गया।
यह घटना सिर्फ एक बच्चे की बेबसी की कहानी नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल है—क्या इंसानियत अब भी जिंदा है?
जिस उम्र में बच्चों को मां की गोद की जरूरत होती है, उस उम्र में यह मासूम अपनी मां को अंतिम विदाई देने के लिए संघर्ष करता रहा। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील इंसान की आंखें नम कर सकता है।
Hardoi, Hardoi | Jun 8, 2026