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मुरादाबाद - कांठ थाना क्षेत्र के मल्लिवाला गांव में पति पत्नी की हत्या #aparnatvnews #ATN #brkingnews #मुरादाबाद

Banda, Banda | Dec 29, 2023

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बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम : 9वीं मोहर्रम पर अलाव की रस्म और रातभर गूंजता रहा पारंपरिक ढालों का मिलाप
बाँदा शहर में मोहर्रम की 9वीं तारीख़ पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का भव्य आयोजन हुआ। बाबू बख्श, रामा सहित शहर के सभी इमामबाड़ों में अकीदतमंदों ने शहीदाने कर्बला की याद में पूरी श्रद्धा और अकीदत के साथ अलाव की रस्म अदा कर इमाम हुसैन (अ.स.) को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
9वीं मोहर्रम की रात बाँदा की ऐतिहासिक ढालों के मिलाप की परंपरा अपने पूरे शबाब पर दिखाई दी। शहर के लगभग सभी इमामबाड़ों में आसपास के मोहल्लों और क्षेत्रों से निकली पारंपरिक ढालों का मिलाप कराया गया। यह सिलसिला पूरी रात चलता रहा, जहाँ अज़ादार और श्रद्धालु एक इमामबाड़े से दूसरे इमामबाड़े तक पहुँचकर इस अनूठी रस्म में शामिल होते रहे।
रामा के इमामबाड़े में विभिन्न मोहल्लों और इमामबाड़ों से पहुँची ढालों का भव्य मिलाप विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस ऐतिहासिक दृश्य को देखने के लिए हजारों लोग देर रात तक मौजूद रहे। वहीं बाबू बख्श के इमामबाड़े में भी पारंपरिक अलाव की रस्म अदा की गई। नौहाख्वानी, मातम और "या हुसैन (अ.स.)" की सदाओं से पूरा वातावरण गम, अकीदत और इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में सराबोर हो उठा।
बाँदा का मोहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और साझा सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। यहाँ सभी समुदायों के लोग मिलकर इन ऐतिहासिक परंपराओं का सम्मान करते हैं और उन्हें आगे बढ़ाते हैं।
इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी सत्य, इंसाफ, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े होने का संदेश देती है। यही संदेश बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपराओं के माध्यम से आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है।
या हुसैन (अ.स.)
बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है।
UP 90 Creator
#Banda #Muharram #YaHussain #BandaMuharram #Alav #Dhal

बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम : 9वीं मोहर्रम पर अलाव की रस्म और रातभर गूंजता रहा पारंपरिक ढालों का मिलाप बाँदा शहर में मोहर्रम की 9वीं तारीख़ पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का भव्य आयोजन हुआ। बाबू बख्श, रामा सहित शहर के सभी इमामबाड़ों में अकीदतमंदों ने शहीदाने कर्बला की याद में पूरी श्रद्धा और अकीदत के साथ अलाव की रस्म अदा कर इमाम हुसैन (अ.स.) को खिराज-ए-अकीदत पेश की। 9वीं मोहर्रम की रात बाँदा की ऐतिहासिक ढालों के मिलाप की परंपरा अपने पूरे शबाब पर दिखाई दी। शहर के लगभग सभी इमामबाड़ों में आसपास के मोहल्लों और क्षेत्रों से निकली पारंपरिक ढालों का मिलाप कराया गया। यह सिलसिला पूरी रात चलता रहा, जहाँ अज़ादार और श्रद्धालु एक इमामबाड़े से दूसरे इमामबाड़े तक पहुँचकर इस अनूठी रस्म में शामिल होते रहे। रामा के इमामबाड़े में विभिन्न मोहल्लों और इमामबाड़ों से पहुँची ढालों का भव्य मिलाप विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस ऐतिहासिक दृश्य को देखने के लिए हजारों लोग देर रात तक मौजूद रहे। वहीं बाबू बख्श के इमामबाड़े में भी पारंपरिक अलाव की रस्म अदा की गई। नौहाख्वानी, मातम और "या हुसैन (अ.स.)" की सदाओं से पूरा वातावरण गम, अकीदत और इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में सराबोर हो उठा। बाँदा का मोहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और साझा सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। यहाँ सभी समुदायों के लोग मिलकर इन ऐतिहासिक परंपराओं का सम्मान करते हैं और उन्हें आगे बढ़ाते हैं। इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी सत्य, इंसाफ, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े होने का संदेश देती है। यही संदेश बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपराओं के माध्यम से आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है। या हुसैन (अ.स.) बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। UP 90 Creator #Banda #Muharram #YaHussain #BandaMuharram #Alav #Dhal

Banda, Banda | Jun 28, 2026

बांदा को बचाना है तो जल, जंगल और पहाड़ बचाने होंगे 🌳
जनपद बांदा में लगातार हो रहे अवैध पेड़ कटान और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन ने पर्यावरण के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। बढ़ती गर्मी, गिरता भूजल स्तर और प्रदूषण इसके स्पष्ट संकेत हैं।
हम सभी की जिम्मेदारी है कि पेड़ों की रक्षा करें, अधिक से अधिक पौधारोपण करें और अवैध कटान का विरोध करें। आज उठाया गया एक छोटा कदम आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव बन सकता है।
🌱 पेड़ बचेंगे तो प्रकृति बचेगी।
🌱 जंगल बचेंगे तो बारिश बचेगी।
🌱 पहाड़ बचेंगे तो नदियाँ बचेंगी।
🌱 पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो हमारा जीवन भी सुरक्षित रहेगा।
आइए, मिलकर अपने बांदा को फिर से हरा-भरा, स्वच्छ और जीवनदायी बनाने का संकल्प लें।
UP 90 Creator 
राष्ट्रीय अध्यक्ष, बुंदेलखंड इंसाफ सेना
#Banda #SaveEnvironment #SaveTrees #Bundelkhand

बांदा को बचाना है तो जल, जंगल और पहाड़ बचाने होंगे 🌳 जनपद बांदा में लगातार हो रहे अवैध पेड़ कटान और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन ने पर्यावरण के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। बढ़ती गर्मी, गिरता भूजल स्तर और प्रदूषण इसके स्पष्ट संकेत हैं। हम सभी की जिम्मेदारी है कि पेड़ों की रक्षा करें, अधिक से अधिक पौधारोपण करें और अवैध कटान का विरोध करें। आज उठाया गया एक छोटा कदम आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव बन सकता है। 🌱 पेड़ बचेंगे तो प्रकृति बचेगी। 🌱 जंगल बचेंगे तो बारिश बचेगी। 🌱 पहाड़ बचेंगे तो नदियाँ बचेंगी। 🌱 पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो हमारा जीवन भी सुरक्षित रहेगा। आइए, मिलकर अपने बांदा को फिर से हरा-भरा, स्वच्छ और जीवनदायी बनाने का संकल्प लें। UP 90 Creator राष्ट्रीय अध्यक्ष, बुंदेलखंड इंसाफ सेना #Banda #SaveEnvironment #SaveTrees #Bundelkhand

Banda, Banda | Jun 28, 2026

#bandapolice  थाना तिन्दवारी क्षेत्रान्तर्गत एक अज्ञात व्यक्ति की शिनाख्त सुनिश्चित की गयी है पुलिस द्वारा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया गया है । अऩ्य आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है । इस सम्बन्ध में विडियों बाइट क्षेत्राधिकारी सदर श्री सौरभ सिंह । https://t.co/m35IpBtWBJ

#bandapolice थाना तिन्दवारी क्षेत्रान्तर्गत एक अज्ञात व्यक्ति की शिनाख्त सुनिश्चित की गयी है पुलिस द्वारा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया गया है । अऩ्य आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है । इस सम्बन्ध में विडियों बाइट क्षेत्राधिकारी सदर श्री सौरभ सिंह । https://t.co/m35IpBtWBJ

Banda, Uttar Pradesh | Jun 27, 2026

सपा बैठक में सांसद कृष्णा पटेल और विधायक विशम्भर सिंह यादव के बीच नोकझोंक, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
बांदा। समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब सांसद कृष्णा पटेल और बबेरू विधायक विशम्भर सिंह यादव के बीच किसी मुद्दे को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक बहस चलती रही, जिससे बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच भी हलचल मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मामला बढ़ने से पहले सपा जिलाध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों नेताओं को शांत कराया। इसके बाद बैठक की कार्यवाही सामान्य रूप से आगे बढ़ी।
बैठक के दौरान हुई इस नोकझोंक का वीडियो किसी ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच विवाद किस मुद्दे को लेकर हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से भी इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
#Banda #SamajwadiParty #KrishnaPatel #VishambharSinghYadav #ViralVideo

सपा बैठक में सांसद कृष्णा पटेल और विधायक विशम्भर सिंह यादव के बीच नोकझोंक, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल बांदा। समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब सांसद कृष्णा पटेल और बबेरू विधायक विशम्भर सिंह यादव के बीच किसी मुद्दे को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक बहस चलती रही, जिससे बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच भी हलचल मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मामला बढ़ने से पहले सपा जिलाध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों नेताओं को शांत कराया। इसके बाद बैठक की कार्यवाही सामान्य रूप से आगे बढ़ी। बैठक के दौरान हुई इस नोकझोंक का वीडियो किसी ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच विवाद किस मुद्दे को लेकर हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से भी इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। #Banda #SamajwadiParty #KrishnaPatel #VishambharSinghYadav #ViralVideo

Banda, Banda | Jun 27, 2026

बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम: 10वीं मोहर्रम (यौमे आशूरा) पर अकीदत, ग़म और भाईचारे का संगम
बाँदा शहर का मोहर्रम पूरे बुंदेलखंड में अपनी अनूठी परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। दसवीं मोहर्रम, जिसे यौमे आशूरा कहा जाता है, इस्लामिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तारीखों में से एक है। इसी दिन कर्बला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी शहादत पेश की थी।
बाँदा में 10वीं मोहर्रम की सुबह से ही विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिसें और मातम का सिलसिला शुरू हो जाता है। अज़ादार काले वस्त्र पहनकर इमाम हुसैन (अ.स.) को ख़िराज-ए-अकीदत पेश करते हैं। शहर के अलग-अलग मोहल्लों से ताज़िए, अलम, ज़ुलजनाह और पारंपरिक ढालों के साथ जुलूस निकलते हैं।
9वीं मोहर्रम की रात भर विभिन्न इमामबाड़ों की ढालों का मिलाप होता है, जिसके बाद 10वीं तारीख़ को सभी ताज़िए और जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुँचते हैं। यहाँ धार्मिक रस्मों के साथ ताज़ियों को सुपुर्द-ए-ख़ाक (दफन) किया जाता है। पूरे मार्ग में जगह-जगह शर्बत, ठंडा पानी और लंगर की व्यवस्था की जाती है, जो इंसानियत और सेवा की मिसाल पेश करती है।
बाँदा का मोहर्रम केवल मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं। यही गंगा-जमुनी तहज़ीब इस ऐतिहासिक आयोजन की सबसे बड़ी पहचान है। प्रशासन और पुलिस भी सुरक्षा एवं व्यवस्था के लिए विशेष इंतज़ाम करते हैं, जिससे लाखों श्रद्धालु शांतिपूर्वक इस धार्मिक परंपरा में शामिल हो सकें।
यौमे आशूरा हमें यह संदेश देता है कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए और सत्य, न्याय, इंसानियत तथा भाईचारे के लिए हर परिस्थिति में डटे रहना चाहिए। यही कर्बला की सबसे बड़ी सीख है और यही बाँदा के ऐतिहासिक मोहर्रम की आत्मा भी है।
UP 90 Creator 
#Moharram2026 #BandaMuharram #YaumEAshura

बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम: 10वीं मोहर्रम (यौमे आशूरा) पर अकीदत, ग़म और भाईचारे का संगम बाँदा शहर का मोहर्रम पूरे बुंदेलखंड में अपनी अनूठी परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। दसवीं मोहर्रम, जिसे यौमे आशूरा कहा जाता है, इस्लामिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तारीखों में से एक है। इसी दिन कर्बला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी शहादत पेश की थी। बाँदा में 10वीं मोहर्रम की सुबह से ही विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिसें और मातम का सिलसिला शुरू हो जाता है। अज़ादार काले वस्त्र पहनकर इमाम हुसैन (अ.स.) को ख़िराज-ए-अकीदत पेश करते हैं। शहर के अलग-अलग मोहल्लों से ताज़िए, अलम, ज़ुलजनाह और पारंपरिक ढालों के साथ जुलूस निकलते हैं। 9वीं मोहर्रम की रात भर विभिन्न इमामबाड़ों की ढालों का मिलाप होता है, जिसके बाद 10वीं तारीख़ को सभी ताज़िए और जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुँचते हैं। यहाँ धार्मिक रस्मों के साथ ताज़ियों को सुपुर्द-ए-ख़ाक (दफन) किया जाता है। पूरे मार्ग में जगह-जगह शर्बत, ठंडा पानी और लंगर की व्यवस्था की जाती है, जो इंसानियत और सेवा की मिसाल पेश करती है। बाँदा का मोहर्रम केवल मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं। यही गंगा-जमुनी तहज़ीब इस ऐतिहासिक आयोजन की सबसे बड़ी पहचान है। प्रशासन और पुलिस भी सुरक्षा एवं व्यवस्था के लिए विशेष इंतज़ाम करते हैं, जिससे लाखों श्रद्धालु शांतिपूर्वक इस धार्मिक परंपरा में शामिल हो सकें। यौमे आशूरा हमें यह संदेश देता है कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए और सत्य, न्याय, इंसानियत तथा भाईचारे के लिए हर परिस्थिति में डटे रहना चाहिए। यही कर्बला की सबसे बड़ी सीख है और यही बाँदा के ऐतिहासिक मोहर्रम की आत्मा भी है। UP 90 Creator #Moharram2026 #BandaMuharram #YaumEAshura

Banda, Banda | Jun 27, 2026

मुरादाबाद - कांठ थाना क्षेत्र के मल्लिवाला गांव में पति पत्नी की हत्या #aparnatvnews #ATN #brkingnews #मुरादाबाद - Banda News