श्री मद्भागवत कथा का तीसरा दिन: कथा व्यास ने ध्रुव प्रसंग सुनाया
गुरु के मार्गदर्शन के बिना परमात्मा की प्राप्ति संभव नहीं – साध्वी भाग्य श्री भारती
अनूपगढ़. दशहरा ग्राउंड में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक साध्वी भाग्य श्री भारती ने भक्त ध्रुव के प्रसंग का वर्णन करते हुए गुरु की महिमा और आध्यात्मिक जीवन में गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा का शुभारंभ श्रवण सिंह नंदा, वंशी सारस्वत, राजेंद्र सिंह, भगवान दास मीठीया, लेखराज मीठीया, शिव कुमार छाबड़ा, सुभाष लेघा, सोहन नागपाल और मथुरादास ने भागवत पूजन कर किया।कथा व्यास साध्वी भाग्य श्री भारती ने ध्रुव प्रसंग का आध्यात्मिक रहस्य समझाते हुए कहा कि भक्त ध्रुव जिस परमात्मा की प्राप्ति के लिए वन की ओर निकले थे, उन्हें देवर्षि नारद जैसे ब्रह्मनिष्ठ गुरु का मार्गदर्शन मिला। गुरु के मार्गदर्शन में ही ध्रुव ने साधना का सही मार्ग जाना और परमात्मा का साक्षात्कार किया। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य भी भक्त ध्रुव की तरह परमात्मा को प्राप्त करना चाहता है तो उसे ऐसे पथप्रदर्शक गुरु की आवश्यकता है, जो उसके अंतःकरण में भगवान का साक्षात्कार करा सके। साध्वी ने कहा कि आज मनुष्य परमात्मा को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है, लेकिन सही साधन और मार्गदर्शन के अभाव में वह आध्यात्मिक मार्ग पर भटक जाता है। हमारे वेद, शास्त्र और धार्मिक ग्रंथों में भी गुरु की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति और परमात्मा के साक्षात्कार के लिए पूर्ण गुरु की शरणागति को आवश्यक बताया गया है। गुरु साधक को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ाते हुए परम सत्य की अनुभूति की ओर ले जाते हैं। उन्होंने संत कबीर, गुरु रामानंद, नरेंद्र और स्वामी रामकृष्ण परमहंस का उदाहरण देते हुए कहा कि गुरु के मार्गदर्शन ने शिष्यों के जीवन को नई दिशा दी। नरेंद्र को स्वामी रामकृष्ण परमहंस का सानिध्य मिला और आगे चलकर वे स्वामी विवेकानंद के रूप में विश्वविख्यात हुए।