आज एक तरफ जहां हिंदू मुसलमानों के बीच नफरत का बीज बोया जा रहा है, वहीं चार साल की मासूम राही मौर्या ने अपनी सहेली शिफा का रोजा खुलवाकर न सिर्फ इत्तेहाद भाईचारा की मिसाल पेश की है, बल्कि उन सफेदपोशों के मुहं में जोरदार तमाचा मारा है, जिसकी राजनीति ही सिर्फ सांप्रदायिकता के इर्दगिर्द में घूमती है।