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अधिकांश गरीब छात्र -छात्राएं उच्च शिक्षा से रहते वंचित, छतरपुर के गौरिहार में जरूरी महाविद्यालय - जन की बात।

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कागज पूरे, फिर भी ‘टोल’ जरूरी! MP से गुजरना है तो 112, वन विभाग बैरियर, ट्रैफिक पुलिस और रास्ते के ‘रखवालों’ का हिसाब भी रखिए

छतरपुर/महोबा।
उत्तर प्रदेश के महोबा से बकरी और भैंसों का व्यापार करने वाले व्यापारी इन दिनों एक अजीब गणित से परेशान हैं। उनका दावा है कि पशुओं को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के लिए उनके पास सभी वैध दस्तावेज, परमिट और आवश्यक कागजात होते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही उनका सामना ऐसे "अनौपचारिक खर्चों" से होने लगता है, जिनका कहीं कोई सरकारी रसीद रिकॉर्ड नहीं मिलता।

व्यापारियों के अनुसार महोबा से महाराष्ट्र और हैदराबाद तक जाने वाले उनके ट्रकों को मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर रोका जाता है। कहीं 200 रुपये, कहीं 500 रुपये तो कहीं 1000 रुपये तक की मांग की जाती है। उनका आरोप है कि एक चक्कर में केवल इस तरह की वसूली पर 8 से 10 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं।

व्यापारियों का कहना है कि छतरपुर जिले में महोबा ब्रिज, ट्रैफिक पुलिस थाना के सामने ,सागर रोड स्थित खेल ग्राम क्षेत्र, मातंगुवा और वन मंडल बैरियर के आसपास ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पैसे लेते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

कागज पूरे हैं तो फिर रकम किस बात की?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पशु परिवहन के सभी दस्तावेज वैध हैं, तो फिर हर कुछ किलोमीटर पर जेब हल्की क्यों कराई जा रही है? क्या नियमों की जांच के नाम पर यह नया "चलन" बन गया है, या फिर व्यवस्था के भीतर कोई ऐसी समानांतर व्यवस्था चल रही है जिसका हिसाब सरकारी फाइलों में नहीं मिलता?

मध्य प्रदेश में ही क्यों?

व्यापारियों का दावा है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में उन्हें इस प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उनका आरोप है कि केवल मध्य प्रदेश में ही बार-बार रोककर रकम मांगी जाती है। यदि यह दावा सही है तो सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

वीडियो सामने आए, कार्रवाई अब भी गायब

व्यापारियों के अनुसार कथित वसूली के कई वीडियो भी मौजूद हैं। इसके बावजूद यदि जांच और कार्रवाई नहीं होती तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आखिर शिकायतों और वीडियो के बावजूद जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच रही?

सवाल जो जवाब मांगते हैं

यदि दस्तावेज पूरे हैं तो वसूली किस आधार पर हो रही है?

कथित वसूली के वीडियो सामने आने के बाद जांच क्यों नहीं हुई?

क्या कुछ कर्मचारी नियमों की आड़ में अवैध वसूली कर रहे हैं?

यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?

और यदि आरोप सही हैं तो फिर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

(नोट: यह खबर व्यापारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके बयानों पर आधारित है। संबंधित विभागों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

कागज पूरे, फिर भी ‘टोल’ जरूरी! MP से गुजरना है तो 112, वन विभाग बैरियर, ट्रैफिक पुलिस और रास्ते के ‘रखवालों’ का हिसाब भी रखिए छतरपुर/महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा से बकरी और भैंसों का व्यापार करने वाले व्यापारी इन दिनों एक अजीब गणित से परेशान हैं। उनका दावा है कि पशुओं को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के लिए उनके पास सभी वैध दस्तावेज, परमिट और आवश्यक कागजात होते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही उनका सामना ऐसे "अनौपचारिक खर्चों" से होने लगता है, जिनका कहीं कोई सरकारी रसीद रिकॉर्ड नहीं मिलता। व्यापारियों के अनुसार महोबा से महाराष्ट्र और हैदराबाद तक जाने वाले उनके ट्रकों को मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर रोका जाता है। कहीं 200 रुपये, कहीं 500 रुपये तो कहीं 1000 रुपये तक की मांग की जाती है। उनका आरोप है कि एक चक्कर में केवल इस तरह की वसूली पर 8 से 10 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि छतरपुर जिले में महोबा ब्रिज, ट्रैफिक पुलिस थाना के सामने ,सागर रोड स्थित खेल ग्राम क्षेत्र, मातंगुवा और वन मंडल बैरियर के आसपास ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पैसे लेते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। कागज पूरे हैं तो फिर रकम किस बात की? सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पशु परिवहन के सभी दस्तावेज वैध हैं, तो फिर हर कुछ किलोमीटर पर जेब हल्की क्यों कराई जा रही है? क्या नियमों की जांच के नाम पर यह नया "चलन" बन गया है, या फिर व्यवस्था के भीतर कोई ऐसी समानांतर व्यवस्था चल रही है जिसका हिसाब सरकारी फाइलों में नहीं मिलता? मध्य प्रदेश में ही क्यों? व्यापारियों का दावा है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में उन्हें इस प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उनका आरोप है कि केवल मध्य प्रदेश में ही बार-बार रोककर रकम मांगी जाती है। यदि यह दावा सही है तो सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? वीडियो सामने आए, कार्रवाई अब भी गायब व्यापारियों के अनुसार कथित वसूली के कई वीडियो भी मौजूद हैं। इसके बावजूद यदि जांच और कार्रवाई नहीं होती तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आखिर शिकायतों और वीडियो के बावजूद जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच रही? सवाल जो जवाब मांगते हैं यदि दस्तावेज पूरे हैं तो वसूली किस आधार पर हो रही है? कथित वसूली के वीडियो सामने आने के बाद जांच क्यों नहीं हुई? क्या कुछ कर्मचारी नियमों की आड़ में अवैध वसूली कर रहे हैं? यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि आरोप सही हैं तो फिर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी? (नोट: यह खबर व्यापारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके बयानों पर आधारित है। संबंधित विभागों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Aug 8, 2026

Chhatarpur News: कचरा वाहन से शव ले जाने के मामले में नगर परिषद अध्यक्ष बड़ा मलहरा की आई प्रतिक्रिया...
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Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Aug 7, 2026

बड़ा मलहरा में महिला की हत्या का 24 घंटे में खुलासा, आरोपी गिरफ्तार

छतरपुर के बड़ा मलहरा में महिला की हत्या के मामले का पुलिस ने 24 घंटे के अंदर खुलासा कर आरोपी बुधवा उर्फ लल्लू अहिरवार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त धारदार हथियार भी बरामद किया गया।

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