देवास। वार्ड क्रमांक 31 की श्रीनगर कॉलोनी में गणेश उत्सव के चंदे को लेकर सामने आए विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। पार्षद विकास जाट के खिलाफ सिटी कोतवाली में दिए गए आवेदन को लेकर गणेश उत्सव समिति के कोषाध्यक्ष निलेश मालवीय ने अब इसे वापस लेने के लिए नया आवेदन देने की बात कही है। निलेश के मुताबिक पहला आवेदन उन्होंने डर और गलतफहमी की स्थिति में दिया था और आवेदन की पूरी सामग्री भी उन्होंने नहीं पढ़ी थी।
निलेश मालवीय ने बताया कि वे गणेश उत्सव समिति में कोषाध्यक्ष हैं, जबकि आश्विन वारिया समिति के अध्यक्ष हैं। उनके अनुसार गणेश उत्सव के लिए चंदे की आवश्यकता होने पर उन्होंने रात करीब साढ़े 10 बजे पार्षद विकास जाट को फोन किया था। बातचीत के दौरान पार्षद के गुस्से में होने से वे डर गए। इसके बाद उन्होंने गौरव व्यास को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद उन्हें सिटी कोतवाली ले जाकर आवेदन दिलाया गया।
निलेश का कहना है कि पुलिस थाने में तैयार किए गए आवेदन को उन्होंने पूरा नहीं पढ़ा था और केवल शुरुआत का हिस्सा पढ़कर उस पर हस्ताक्षर कर दिए थे। अब वे कहना है कि वह आवेदन गलतफहमी और डर की स्थिति में दिया गया था, इसलिए उसे वापस लेने के लिए नया आवेदन दिया जा रहा है।
चंदे की राशि को लेकर निलेश ने बताया कि पार्षद विकास जाट की ओर से 11 हजार रुपये देने की बात हुई थी, जिसमें 3,100 रुपये पहले ही दिए जा चुके थे और शेष राशि को लेकर बातचीत होनी थी।
वहीं, पार्षद विकास जाट ने पूरे मामले को लेकर कहा कि संबंधित परिवार से उनके करीब 40 वर्षों से पारिवारिक संबंध हैं और गणेश उत्सव में छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिनमें नाबालिग बच्चे भी हैं। उनके अनुसार वे पहले ही चंदे की राशि भेज चुके थे और आगे भी अपनी इच्छा के अनुसार सहयोग करने की बात कही थी।
विकास जाट के मुताबिक वे उस समय आगर में थे। इसी दौरान रात करीब साढ़े 10 बजे उन्हें एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने गणेश उत्सव के बकाया चंदे की राशि मांगी। जब उन्होंने फोन करने वाले की पहचान पूछी तो कथित तौर पर फोन काट दिया गया। इसके बाद उन्होंने समिति के अध्यक्ष से संपर्क कर मामले को समझने की कोशिश की।
पार्षद विकास जाट ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के लिए आर्थिक सहयोग व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए। धर्म के नाम पर किसी व्यक्ति पर चंदा देने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में धार्मिक आयोजनों में चंदा लेने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन पर विचार होना चाहिए, ताकि चंदे के नाम पर विवाद की स्थिति पैदा न हो।
उन्होंने युवाओं और नाबालिग बच्चों को किसी भी राजनीतिक या व्यक्तिगत विवाद में इस्तेमाल किए जाने पर भी सवाल उठाए। विकास जाट के अनुसार संबंधित बच्चों के परिवार से उनके पुराने संबंध हैं और उन्होंने परिवार से बातचीत कर मामले को समाप्त करने की कोशिश की।
विकास जाट ने आरोप लगाया कि यदि किसी ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए धार्मिक आयोजन या बच्चों का इस्तेमाल किया है, तो यह उचित नहीं है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है और मामले में संबंधित अन्य पक्षों का पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा।
अब इस पूरे घटनाक्रम ने गणेश उत्सव के चंदे से आगे एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या हिंदू समाज और धार्मिक आयोजनों को चंदे को लेकर होने वाले विवादों से मुक्त कराने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए?
हर वर्ष गणेश उत्सव और नवरात्रि जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान चंदा संग्रह किया जाता है। अधिकांश लोग श्रद्धा और स्वेच्छा से सहयोग करते हैं, लेकिन यदि किसी व्यक्ति को दबाव, विवाद या जबरदस्ती का अनुभव होता है तो इससे पूरे धार्मिक आयोजन की छवि प्रभावित होती है।
ऐसे में सवाल यह भी है कि आने वाली नवरात्रि से पहले क्या हिंदू संगठन और धार्मिक आयोजन समितियां चंदा संग्रह को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी करेंगी? क्या चंदा देने की पूरी प्रक्रिया स्वैच्छिक, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में कोई व्यवस्था होगी?
धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने के लिए होते हैं। ऐसे में चंदे को लेकर होने वाले विवाद किसी व्यक्ति या किसी एक समिति तक सीमित नहीं रहने चाहिए। जरूरत इस बात की है कि धार्मिक आयोजनों में सहयोग पूरी तरह स्वेच्छा से हो, राशि और उपयोग में पारदर्शिता हो और किसी भी व्यक्ति पर दबाव न बनाया जाए।
फिलहाल पार्षद विकास जाट के खिलाफ दिए गए आवेदन को वापस लेने के लिए समिति पदाधिकारी द्वारा नया आवेदन दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस इस संबंध में आगे क्या निर्णय लेती है, यह उसके बाद ही स्पष्ट होगा। मामले में सामने आए आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना भी बाकी है।