विष्णुगढ़: विष्णुगढ़, टाटीझरिया और दारू में धनरोपनी के साथ 'बनगडी-पंचाठी' की परंपरा जीवित, पर आधुनिकता के बीच सहेजने की चिंता
विष्णुगढ़, टाटीझरिया और दारू में धनरोपनी के साथ 'बनगडी-पंचाठी' की परंपरा जीवित, पर आधुनिकता के बीच सहेजने की चिंता। कादो की महक और लोकगीतों की तान; आधुनिकता के प्रभाव में भी अक्षुण्ण है यह सोंधी परंपरा। भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की सांसें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से चलती हैं। गांवों में आज भी धनरोपनी की समृद्ध परंपरा कायम है।