महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में अस्मितामूलक विमर्श में साहित्य की भूमिका विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन गुरुवार को अपराह्न 1:00 बजे किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) मृत्युंजय सिंह ने कहा कि साहित्य केवल सौंदर्य बोध का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हाशिए के समाज की अस्मिता को पहचान दिलाने का वैचारिक औजार है।