लोहे में संस्कृति की आकृति – शिल्प नगरी कोंडागांव
बस्तर की पहचान केवल उसके घने जंगल और झरने ही नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध जनजातीय कला भी है। कोंडागांव की राॅट आयरन कला साधारण लोहे को अद्भुत कलाकृतियों में बदलने की सदियों पुरानी परंपरा है।
यहाँ के कुशल शिल्पकार आग, हथौड़े और अपनी कल्पनाशक्ति से लोहे को नया जीवन देते हैं। जनजातीय जीवन, प्रकृति, वन्यजीव और लोक संस्कृति इन कलाकृतियों में जीवंत दिखाई देती है।
हर शिल्प केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि बस्तर की संस्कृति, परंपरा और कारीगरों की मेहनत की कहानी है।
📍 शिल्प नगरी – कोंडागांव, बस्तर (छत्तीसगढ़)
Kondagaon, Chhattisgarh | Aug 2, 2026