* एक बढ़ा सवाल... पवित्र चौरासी मंदिर में आयोजित सांस्कृतिक संध्या पर....
* चौरासी मंदिर भरमौर में लोकगायकों द्वारा ऐसे गीत गाना कितना उचित है?
* कठिन मणिमहेश यात्रा के बाद श्रद्धालु क्या ऐसी प्रस्तुतियों से धन्य महसूस करेंगे?
* गायकों के साथ आयोजकों को भी मंदिर की पवित्रता और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
* मनोरंजन के लिए धार्मिक भावनाओं को आहत करना किसी भी सूरत में उचित नहीं।
* ऐसे कार्यक्रम जरूरी हों तो मंदिर परिसर से दूर आयोजित किए जाने चाहिए।
* क्या भगवान के प्रांगण में भक्ति गीतों से सांस्कृतिक संध्या नहीं सज सकती?
* मास्टर सलीम ने भजनों से समा बाँधा, तो हमारे लोकगायक ऐसा क्यों नहीं कर सकते?
* श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है, मंदिर की मर्यादा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए...
जय भोलेनाथ 🙏🙏🙏
Nurpur, Kangra | Sep 20, 2026