जनसुनवाई में एक महिला रोते हुए पहुँची। किसीने घर में आग लगा दी। आग में सब कुछ जल गया—घर का सामान, बच्चों के किडनी इलाज के ज़रूरी काग़ज़ात, और साथ ही जीवन का सहारा भी। आज उनके पास न छत बची है, न बच्चों को खिलाने का साधन।कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने पूरी संवेदनशीलता से महिला की पीड़ा सुनी। मामले की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने तत्काल मदद के निर्देश दिए.