दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद कूच के दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करता हूँ। लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार हर नागरिक को है।
छात्रों की आवाज़ को बल प्रयोग से नहीं, संवाद और संवेदनशीलता से सुना जाना चाहिए। ये निरंकुश शासन अंग्रेजी शासन की याद को ताजा कर रही है। छात्र/युवा की आवाज को लाठी और बंदूक के बल पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
बाबा साहब का संविधान किसी आंदोलन को दबाने की अनुमति नहीं देता है। आंदोलन तो लोकतंत्र का श्रृंगार है और साथ में हथियार भी...
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