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भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।।

330 views | Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Apr 9, 2022

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लोकगीत सम्राट स्वर्गीय देशराज पटेरिया जी के आशीर्वाद से बुंदेली लोकगायन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रसिद्ध गायक जयप्रकाश पटेरिया से खास बातचीत।देखिए "टॉक शो विद राजेंद्र" में
जानिए उनके संगीत सफर, बुंदेली संस्कृति के प्रति समर्पण और सफलता के पीछे की प्रेरणादायक कहानी।

#TalkShowWithRajendra #JaiprakashPateriya #BundeliLokgeet #BundeliSinger #DeshrajPateriya Bundelkhand FolkMusic

लोकगीत सम्राट स्वर्गीय देशराज पटेरिया जी के आशीर्वाद से बुंदेली लोकगायन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रसिद्ध गायक जयप्रकाश पटेरिया से खास बातचीत।देखिए "टॉक शो विद राजेंद्र" में जानिए उनके संगीत सफर, बुंदेली संस्कृति के प्रति समर्पण और सफलता के पीछे की प्रेरणादायक कहानी। #TalkShowWithRajendra #JaiprakashPateriya #BundeliLokgeet #BundeliSinger #DeshrajPateriya Bundelkhand FolkMusic

Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Jun 4, 2026

*मझगुवां गौशाला में दो महीनों से गौवंश नहीं जबकि कागजों में दर्ज 102 गौवंश, व्यवस्थाओ पर सवाल।*
ग्राम पंचायतो मे बनी गौशालाए कागजो मे चल रही,जांच डाॅक्टर मोटी रकम लेकर सैकङो गौवंश दर्ज करते जबकि गौवंश नही।

छतरपुर जिले के जनपद पंचायत राजनगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत मझगुवां की गौशाला की स्थिति को देखकर व्यवस्थाओ पर सवाल उठ रहे है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौशाला में पिछले कई महीनों से कोई भी गौवंश दिखाई नहीं दे रहा है, जबकि सरकारी अभिलेखों में यहां 102 गौवंश दर्ज बताए जा रहे हैं।

स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने गौशाला के संचालन और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। गौशाला परिसर में न तो चारा-भूसे की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई देती है और न ही गौवंश के लिए पानी की समुचित सुविधा है। वहीं नियमित देखरेख के लिए कर्मचारियों की मौजूदगी भी नजर नहीं आती।

ऐसे में लोगों का कहना है कि गौशाला का संचालन केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है। वही प्रदेश सरकार आवारा गौवंश को सड़कों और किसानों की फसलों से दूर रखने के लिए गौशालाओं के संचालन पर लाखों रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद यदि गौशालाओं में पशु ही मौजूद नहीं हैं तो व्यवस्थाओं और खर्च की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मझगुवां गौशाला का संचालन एक स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है, जिसकी अध्यक्ष विमला यादव एवं सचिव कृष्ण प्रताप सिंह हैं। इस संबंध में समूह के पदाधिकारियों का कहना है कि गौशाला के आसपास संचालित क्रेशरों से अत्यधिक गर्मी और धूल उत्पन्न होती है, जिसके कारण गौवंश वहां नहीं रुकता और दूसरे स्थानों की ओर चला जाता है।

वही सरपंच राजेन्द्र सिंह परमार का कहना है कि अभिलेखों में गौशाला में 102 गौवंश दर्ज हैं। उन्होंने भी माना कि गौशाला के आसपास 4 से 5 क्रेशर संचालित होने के कारण क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी रहती है, जिससे गौवंश वहां जाने से बचता है।

जांच डाॅक्टर पर सवाल उठाए गए है कि अगर वहां दो महीने से गौवंश नही जा रहा है तो फिर जो डाॅक्टर टैग लगाने और जांच करने आते है वह पैसा लेकर 102 चढा देते है जबकि वहां एक भी गौवंश नही तो सरकार को लाखो का चूना लगा जाते है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा गौशाला में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। 

वही इस मामले मे जनपद पंचायत राजनगर सीईओ राकेश कुमार शुक्ला मुझे जानकारी मिली है जांच करवाता हूं। अगर सही है तो कार्यवाही की जाएगी।

गौशाला संचालक ने बताया कि नौतपा में गर्मी के कारण गायों को छोड़ दिया था फिर व्यवस्था करेंगे।

*मझगुवां गौशाला में दो महीनों से गौवंश नहीं जबकि कागजों में दर्ज 102 गौवंश, व्यवस्थाओ पर सवाल।* ग्राम पंचायतो मे बनी गौशालाए कागजो मे चल रही,जांच डाॅक्टर मोटी रकम लेकर सैकङो गौवंश दर्ज करते जबकि गौवंश नही। छतरपुर जिले के जनपद पंचायत राजनगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत मझगुवां की गौशाला की स्थिति को देखकर व्यवस्थाओ पर सवाल उठ रहे है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौशाला में पिछले कई महीनों से कोई भी गौवंश दिखाई नहीं दे रहा है, जबकि सरकारी अभिलेखों में यहां 102 गौवंश दर्ज बताए जा रहे हैं। स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने गौशाला के संचालन और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। गौशाला परिसर में न तो चारा-भूसे की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई देती है और न ही गौवंश के लिए पानी की समुचित सुविधा है। वहीं नियमित देखरेख के लिए कर्मचारियों की मौजूदगी भी नजर नहीं आती। ऐसे में लोगों का कहना है कि गौशाला का संचालन केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है। वही प्रदेश सरकार आवारा गौवंश को सड़कों और किसानों की फसलों से दूर रखने के लिए गौशालाओं के संचालन पर लाखों रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद यदि गौशालाओं में पशु ही मौजूद नहीं हैं तो व्यवस्थाओं और खर्च की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। मझगुवां गौशाला का संचालन एक स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है, जिसकी अध्यक्ष विमला यादव एवं सचिव कृष्ण प्रताप सिंह हैं। इस संबंध में समूह के पदाधिकारियों का कहना है कि गौशाला के आसपास संचालित क्रेशरों से अत्यधिक गर्मी और धूल उत्पन्न होती है, जिसके कारण गौवंश वहां नहीं रुकता और दूसरे स्थानों की ओर चला जाता है। वही सरपंच राजेन्द्र सिंह परमार का कहना है कि अभिलेखों में गौशाला में 102 गौवंश दर्ज हैं। उन्होंने भी माना कि गौशाला के आसपास 4 से 5 क्रेशर संचालित होने के कारण क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी रहती है, जिससे गौवंश वहां जाने से बचता है। जांच डाॅक्टर पर सवाल उठाए गए है कि अगर वहां दो महीने से गौवंश नही जा रहा है तो फिर जो डाॅक्टर टैग लगाने और जांच करने आते है वह पैसा लेकर 102 चढा देते है जबकि वहां एक भी गौवंश नही तो सरकार को लाखो का चूना लगा जाते है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा गौशाला में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। वही इस मामले मे जनपद पंचायत राजनगर सीईओ राकेश कुमार शुक्ला मुझे जानकारी मिली है जांच करवाता हूं। अगर सही है तो कार्यवाही की जाएगी। गौशाला संचालक ने बताया कि नौतपा में गर्मी के कारण गायों को छोड़ दिया था फिर व्यवस्था करेंगे।

Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Jun 4, 2026

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।। - Chhatarpur Nagar News