श्री सर्वेश्वरी आश्रम बगीचा ( औघड़ बाबा का तकिया) से आज प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरु की। सबसे पहले आश्रम की बाउंड्री तोड़ी गई हालांकि स्थानीय आस्थावान नागरिकों ने इसका प्रतिकार भी किया पर इसके बावजूद आस्था धरी की धरी रह गई।एक समय था जब परम पूज्य तपसी बाबा की छत्र छाया में श्रद्धालु अर्जी लगाया करते थे कि हमारा दिन ठीक हो जाए हमारी स्थिति ठीक हो जाए। आज उनकी कृपा से भक्त संपन्न सुखी भी होंगे,पद प्रतिष्ठा भी मिल गई होगी, सब कुछ आने के बाद अब जब उनके आश्रम पर आँच आई तो वे भक्त कहीं नजर नहीं आए यह सवाल है उन श्रद्धालुओं से कि आपको जब बाबा ने सब दिया तो आपने एक आवाज तक उठाना मुनासिब नहीं समझा।हांलांकि कार्रवाई प्रशासनिक रही बिना विवादों के पर वाकई जहां आस्था होती है वहां संवेदना भी आवश्यक है और संवेदनशीलता भी।आध्यात्मिक प्रभाव क्षणभंगुर नहीं होता यह चिरस्थाई होता है।