Public App Logo
Profile Picture

Jashpur Junction

@ junctionjashpur
556Followers
0Following
बगीचा नगर के ऊर्जावान,सेवाभावी,कर्मठ एवं जुझारु युवा भाई रित्विक जैन (राजा भाई) को जन्मदिवस की मंगल शुभकामनाएं।आप यशस्वी हों ओजस्वी हों।
आप सभी के द्वारा मेरे जन्मदिवस पर प्रेषित संदेश निश्चित ही मुझे उर्जित करते हैं।आप सभी का स्नेह आशीर्वाद यूँ ही बनाए रखें।आप सभी का सहृदय धन्यवाद आभार।
प्रशासन ने कहा ऊपर से ऑर्डर है दरअसल आज बगीचा में गौरव पथ के लिए किए गए 30 फीट के मार्किंग पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तड़के शुरु कर दी गई।हाईस्कूल चौक से तहसील चौक तक गौरव पथ बनना है।यह वीडियो उस क्षण का है जब लोग प्रशासन से निवेदन करते दिखे कि थोड़ा समय दे दीजिए पर कहां सुनवाई होगी ऑर्डर ऊपर से जो था....अंततः जैन मंदिर का बाउंड्री भी गिरा ही दिया गया लोग दुखित हैं कि उनके चुने हुए नेता जिन पर जनता ने भरोसा किया वे भरोसा तोड़ कर घर में बैठे रहे।
सेवा संकल्प अभियान की असली सार्थकता यहीं है...
जशपुर में चल रहा सेवा संकल्प अभियान समाज के जरूरतमंद और वंचित परिवारों तक मदद पहुंचाने का संकल्प है। लेकिन किसी अभियान की सफलता केवल कार्यक्रमों और आयोजनों से नहीं, बल्कि उस मदद से तय होती है जो जरूरत के समय किसी जिंदगी को संभाल सके।

सन्ना तहसील के ग्राम कर्रीकोना का 32 वर्षीय पहाड़ी कोरवा युवक कालू राम पिछले 12 वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। इलाज के लिए परिवार जमीन तक बेच चुका है। पत्नी विकलांग हैं, दो छोटे बच्चे और माता-पिता की जिम्मेदारी है और अब परिवार के पास इलाज कराने के लिए भी पैसे नहीं हैं।

ऐसे में यदि सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से कालू राम तक प्रशासन और समाज की मदद पहुंचती है, उसे बेहतर अस्पताल में इलाज मिलता है और उसका परिवार फिर से उम्मीद के साथ जीवन जी पाता है, तो यही इस अभियान की सही मायनों में सफलता होगी।

आज जरूरत एक और कार्यक्रम की नहीं, बल्कि एक बीमार इंसान तक सेवा को पहुंचाने की है। उम्मीद है कि कालू राम की पीड़ा शासन-प्रशासन तक पहुंचेगी और उनका इलाज सुनिश्चित होगा।

<nis:link nis:type=tag nis:id=jashpur nis:value=jashpur nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=cmochhattisgarh nis:value=CMOChhattisgarh nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=cghealth nis:value=cghealth nis:enabled=true nis:link/>
श्री सर्वेश्वरी आश्रम बगीचा ( औघड़ बाबा का तकिया) से आज  प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरु की। सबसे पहले आश्रम की बाउंड्री तोड़ी गई हालांकि स्थानीय आस्थावान नागरिकों ने इसका प्रतिकार भी किया पर इसके बावजूद आस्था धरी की धरी रह गई।एक समय था जब परम पूज्य तपसी बाबा की छत्र छाया में श्रद्धालु अर्जी लगाया करते थे कि हमारा दिन ठीक हो जाए हमारी स्थिति ठीक हो जाए। आज उनकी कृपा से भक्त संपन्न सुखी भी होंगे,पद प्रतिष्ठा भी मिल गई होगी, सब कुछ आने के बाद अब जब उनके आश्रम पर आँच आई तो वे भक्त कहीं नजर नहीं आए यह सवाल है उन श्रद्धालुओं से कि आपको जब बाबा ने सब दिया तो आपने एक आवाज तक उठाना मुनासिब नहीं समझा।हांलांकि कार्रवाई प्रशासनिक रही बिना विवादों के पर वाकई जहां आस्था होती है वहां संवेदना भी आवश्यक है और संवेदनशीलता भी।आध्यात्मिक प्रभाव क्षणभंगुर नहीं होता यह चिरस्थाई होता है।
संवेदना जब सामने आती है तो निश्चित ही वह अपार संभावनाएं लेकर सामने आती है।आज हमने अपने खबर के माध्यम से इस संवेदनशील मामले को जिला प्रशासन तक पहुंचाया जिसपर जिला प्रशासन ने संवेदना दिखाते हुए तत्काल सन्ना तहसील के कर्रीकोना निवासी 
पहाड़ी कोरवा कालू राम की सुध ली और तत्काल इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए मेडिकल टीम को कालू राम के घर तक भेजकर उसके इलाज की शुरुआत की।कालू पिछले 12 वर्षों से पैर के कैंसर से पीड़ित है।बहरहाल बगिया कैंप कार्यालय,जिला कलेक्टर श्री रोहित व्यास समेत सीएमएचओ साहब का धन्यवाद जिन्होंने सेवा के इस अवसर को संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाया,अब निश्चित ही इस कालू को उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होगा।
इतनी तेजी से बगीचा में आज अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई... क्या गौरव पथ भी इतनी तेजी से बन पाएगा वह भी तब जब अभी तक पोल शिफ्टिंग का टेंडर नहीं हुआ,पेड़ों की कटाई नहीं हुई,स्थानीय नागरिकों ने नवरात्रि तक 10 दिन का समय मांगा पर नागरिकों की नहीं सुनी गई।निश्चित ही प्रशासन किसी भी शासन का हो सकता है... पर इस सरकार को जो चुनता है वह जनता हमेशा एक ही होती है।इसलिए जनता की आवाज सुननी चाहिए खैर अब नहीं सुनी गई मतलब मामला साफ है जयचंद अपने ही हैं।
यूसीसी पर महिलाओं की दो टूक: लिव-इन में साथ रहेंगे तो पंजीयन भी जरूरी!

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर यूसीसी समिति के सामने महिलाओं ने उठाया बड़ा सवाल, कहा- रिश्ते से जन्मे बच्चों के अधिकार भी हों सुरक्षित

रायपुर। आज के दौर में जब युवाओं के बीच लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर चर्चा और स्वीकार्यता बढ़ रही है, ऐसे समय में इस रिश्ते को लेकर कानून क्या कहता है और इसमें महिला तथा बच्चों के अधिकार कैसे सुरक्षित होंगे—यह सवाल अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की चर्चा के केंद्र में पहुंच गया है।

छत्तीसगढ़ में यूसीसी को लेकर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में महिलाओं ने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन को अनिवार्य करने की मांग रखी। महिलाओं का कहना था कि यदि दो वयस्क साथ रहने का निर्णय लेते हैं तो उनके रिश्ते की कानूनी स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में महिला के अधिकार सुरक्षित रह सकें।

लिव-इन से बच्चा हुआ तो अधिकार किसके?

महिलाओं ने यूसीसी समिति के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल रखा—लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों का क्या होगा?

बैठक में ऐसे बच्चों को पालन-पोषण और उत्तराधिकार का पूरा अधिकार देने तथा उनकी जैविक पहचान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। महिलाओं का कहना था कि माता-पिता के रिश्ते की प्रकृति का असर बच्चे के अधिकारों पर नहीं पड़ना चाहिए।

सिर्फ साथ रहना नहीं, कानूनी सुरक्षा भी जरूरी

अधिवक्ता सुचित्रा वर्धन ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कानूनी स्पष्टता की जरूरत बताई। वहीं महिलाओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि कानून ऐसा हो, जिससे रिश्ते में किसी महिला के साथ शोषण होने पर उसे प्रभावी कानूनी संरक्षण मिल सके।

संपत्ति और भरण-पोषण में भी बराबरी की मांग

बैठक में महिलाओं ने लिव-इन के साथ-साथ पैतृक संपत्ति में महिलाओं को बराबरी का अधिकार, भरण-पोषण के लिए समान नियम और आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग भी रखी।

शताब्दी पाण्डेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल प्रदेश है, इसलिए यूसीसी बनाते समय आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। पंचायत स्तर पर कानूनी सलाह के लिए विशेष डेस्क बनाने का सुझाव भी दिया गया।

बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं के सुझावों को सुना और उन पर विचार करने का आश्वासन दिया।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या बदलते रिश्तों के दौर में लिव-इन रिलेशनशिप को भी स्पष्ट कानूनी ढांचे में लाया जाना चाहिए?
आपकी क्या राय है? कमेंट में बताइए।
बगीचा में 31 हजार दीपों से जगमगाया डोंड़की नदी तट, काशी के पुरोहितों ने संपन्न कराई भव्य गंगा आरती

मां दुर्गा युवा शक्ति की पहल और नगरवासियों के सहयोग से हुआ भव्य आयोजन, मातृशक्ति ने दीप प्रज्वलित कर दिया आस्था का संदेश

छठ घाट पर दिखा श्रम, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम, आदियोगी की विशाल प्रतिमा के सानिध्य में गूंजे वैदिक मंत्र

बगीचा। नवरात्र पर्व की महानवमी के पावन अवसर पर बगीचा के डोंड़की नदी तट स्थित छठ घाट पर 31 हजार दीपों के प्रज्वलन के साथ भव्य गंगा आरती का आयोजन किया गया। मां दुर्गा युवा शक्ति की पहल और नगरवासियों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में आस्था, आध्यात्मिकता, सामाजिक एकजुटता और मातृशक्ति की सहभागिता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हजारों दीपों की रोशनी से नदी तट जगमगा उठा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम में काशी से आए पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा का आवाहन और दीप पूजन संपन्न कराया। इसके बाद मातृशक्ति ने 31 हजार दीप प्रज्वलित कर श्रद्धा और भक्ति की अनुपम छटा बिखेरी। नदी के चारों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने।

आदियोगी की विशाल प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र

डोंड़की नदी के मध्य लगभग 20 फीट ऊंची आदियोगी की प्रतिमा स्थापित की गई थी, जिसके चारों ओर आकर्षक ढंग से दीप सजाए गए थे। दीपों से मशाल, स्वास्तिक, ॐ, त्रिशूल और कलश सहित भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक परंपराओं को प्रदर्शित करती विभिन्न आकृतियां तैयार की गई थीं। हजारों दीपों की जगमगाहट और आदियोगी की विशाल प्रतिमा ने आयोजन को विशेष भव्यता प्रदान की।

कार्यक्रम की शुरुआत ‘ॐ नमः शिवाय’ के जप से हुई। इसके बाद गायत्री मंत्र के उच्चारण ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु आदियोगी की प्रतिमा के सानिध्य में मां गंगा की आरती में शामिल हुए और भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की।

कई दिनों की मेहनत से साकार हुआ भव्य आयोजन

इस विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए मां दुर्गा युवा शक्ति की टीम ने नेतृत्व किया। पूरे ब्लॉक में अलग-अलग टीमें गठित की गई थीं, जिन्होंने समन्वय और व्यवस्थित तरीके से दीपों को सजाने तथा प्रज्वलित करने का कार्य किया। आयोजन के पीछे युवाओं की मेहनत, अनुशासन, सामूहिक सहभागिता और समर्पण साफ नजर आया।

नगरवासियों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में मातृशक्ति ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। दीपों को सजाने से लेकर उनके प्रज्वलन तक महिलाओं की सक्रिय भूमिका रही, जिसने आयोजन को सामाजिक एकता और सामूहिक आस्था का प्रतीक बना दिया।

नदी की सफाई कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

गंगा आरती के आयोजन के साथ मां दुर्गा युवा शक्ति के सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान नदी तट की सफाई कर गंदगी हटाई गई। स्वयंसेवकों ने एकजुट होकर श्रमदान किया और नदी के आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ बनाने में योगदान दिया।

युवाओं की इस पहल ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन केवल आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से सामाजिक जिम्मेदारी, स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जा सकती है। डोंड़की नदी तट पर श्रम, सेवा और समर्पण का यह संगम आयोजन की खास पहचान बना।

प्रशासन का मिला सहयोग, बनी रही व्यवस्था

कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन, स्थानीय एसडीएम और तहसीलदार सहित प्रशासनिक अमले का सहयोग मिला। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए यातायात एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए गए, जिससे आयोजन व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

अतिथियों का काशी के पुरोहितों ने किया सम्मान

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप सिन्हा, व्यापारी संघ अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष अरविंद गुप्ता और शारदा ऑटो के संचालक अनिल गुप्ता उपस्थित रहे। काशी से पधारे पुरोहितों ने अतिथियों को तिलक लगाकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम का संचालन पत्रकार योगेश थवाईत ने किया। उन्होंने दीप प्रज्वलन के दौरान ‘चलो करें स्वागत आरती सजा लें, दीप जला लें, नया युग चला आ रहा है’ गीत का गान किया, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्तिभाव का संचार हुआ।

महानवमी के अवसर पर आयोजित इस भव्य गंगा आरती ने बगीचा में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण और युवा शक्ति के सामूहिक प्रयासों की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की। 31 हजार दीपों की रोशनी से जगमगाता डोंड़की नदी तट लंबे समय तक श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार दृश्य बन गया।
इतनी तेजी से बगीचा में आज अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई... क्या गौरव पथ भी इतनी तेजी से बन पाएगा वह भी तब जब अभी तक पोल शिफ्टिंग का टेंडर नहीं हुआ,पेड़ों की कटाई नहीं हुई,स्थानीय नागरिकों ने नवरात्रि तक 10 दिन का समय मांगा पर नागरिकों की नहीं सुनी गई।निश्चित ही प्रशासन किसी भी शासन का हो सकता है... पर इस सरकार को जो चुनता है वह जनता हमेशा एक ही होती है।इसलिए जनता की आवाज सुननी चाहिए खैर अब नहीं सुनी गई मतलब मामला साफ है जयचंद अपने ही हैं।
प्रशासन ने कहा ऊपर से ऑर्डर है दरअसल आज बगीचा में गौरव पथ के लिए किए गए 30 फीट के मार्किंग पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तड़के शुरु कर दी गई।हाईस्कूल चौक से तहसील चौक तक गौरव पथ बनना है।यह वीडियो उस क्षण का है जब लोग प्रशासन से निवेदन करते दिखे कि थोड़ा समय दे दीजिए पर कहां सुनवाई होगी ऑर्डर ऊपर से जो था....अंततः जैन मंदिर का बाउंड्री भी गिरा ही दिया गया लोग दुखित हैं कि उनके चुने हुए नेता जिन पर जनता ने भरोसा किया वे भरोसा तोड़ कर घर में बैठे रहे।
श्री सर्वेश्वरी आश्रम बगीचा ( औघड़ बाबा का तकिया) से आज  प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरु की। सबसे पहले आश्रम की बाउंड्री तोड़ी गई हालांकि स्थानीय आस्थावान नागरिकों ने इसका प्रतिकार भी किया पर इसके बावजूद आस्था धरी की धरी रह गई।एक समय था जब परम पूज्य तपसी बाबा की छत्र छाया में श्रद्धालु अर्जी लगाया करते थे कि हमारा दिन ठीक हो जाए हमारी स्थिति ठीक हो जाए। आज उनकी कृपा से भक्त संपन्न सुखी भी होंगे,पद प्रतिष्ठा भी मिल गई होगी, सब कुछ आने के बाद अब जब उनके आश्रम पर आँच आई तो वे भक्त कहीं नजर नहीं आए यह सवाल है उन श्रद्धालुओं से कि आपको जब बाबा ने सब दिया तो आपने एक आवाज तक उठाना मुनासिब नहीं समझा।हांलांकि कार्रवाई प्रशासनिक रही बिना विवादों के पर वाकई जहां आस्था होती है वहां संवेदना भी आवश्यक है और संवेदनशीलता भी।आध्यात्मिक प्रभाव क्षणभंगुर नहीं होता यह चिरस्थाई होता है।
इस खूबसूरत एहसास को अधूरा मत छोड़िए…
कहानी अभी बाकी है…
पूरा गीत सुनने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। 🎵❤️
“किताब का वो पन्ना हो तुम…”
एक ऐसा गीत, जो शायद आपके दिल की कोई बात कह जाए। 

https://youtu.be/VNn124CS3Pg
वर्ष 2018 से लेकर 2023 तक कांग्रेस को प्रदेश की जनता ने जनादेश दिया था। उनके जनघोषणा पत्र में बहुत तरह के वादे थे, लेकिन पाँच वर्षों में उन्होंने वादे पूरे नहीं किए। बल्कि पूरे प्रदेश को अपराध का गढ़ बना दिया, भ्रष्टाचार का गढ़ बना दिया। आज भी उनके अनेक लोग जेल के अंदर हैं। छत्तीसगढ़ की जनता से वे विश्वास खो चुके हैं। अब वे कुछ भी करें, जनता का विश्वास अर्जित नहीं कर पाएँगे।

श्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

<nis:link nis:type=tag nis:id=bjp nis:value=bjp nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bjpcg nis:value=bjpcg nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=cmochhattisgarh nis:value=CMOChhattisgarh nis:enabled=true nis:link/>
❤️ इस खूबसूरत एहसास को अधूरा मत छोड़िए…

कहानी अभी बाकी है…
पूरा गीत सुनने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। 🎵❤️

“किताब का वो पन्ना हो तुम…”
एक ऐसा गीत, जो शायद आपके दिल की कोई बात कह जाए। 💕

<nis:link nis:type=tag nis:id=https://youtu.be/vnn124cs3pg nis:value=https://youtu.be/VNn124CS3Pg nis:enabled=true nis:link/>

<nis:link nis:type=tag nis:id=jashpur nis:value=jashpur nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jashpurjunction nis:value=jashpurjunction nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=musiclover nis:value=musiclover nis:enabled=true nis:link/>
https://youtu.be/VNn124CS3Pg
जशपुर जंक्शन: 50 लाख का मुआवजा, चक्काजाम और पलटी सियासत,पत्थलगांव में फिर गूंजा पुराना सवाल,तब कांग्रेस सरकार ने दिए थे 50 लाख, आज भाजपा राज में दो आदिवासी मजदूरों के परिजन भी उसी रकम पर अड़े...

जशपुर, 30 सितंबर

जिले के पत्थलगांव में दो मजदूरों की मौत के बाद भड़का विरोध अब महज हादसे के बाद का प्रदर्शन नहीं रह गया है। 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग, शव लेने से इनकार और एनएच-43 पर चक्काजाम के बीच पत्थलगांव में वर्ष 2021 की वह घटना फिर सुर्खियों में है, जब गौरव अग्रवाल की मौत के बाद इसी शहर में मुआवजे और कार्रवाई को लेकर सड़क से सत्ता तक हड़कंप मच गया था।

फर्क सिर्फ इतना है कि तब सत्ता में कांग्रेस थी और भाजपा विपक्ष में।आज सत्ता भाजपा के हाथ में है और कांग्रेस विपक्ष में।

2021 में गौरव अग्रवाल की मौत के बाद सुलग उठा था पत्थलगांव

अक्टूबर 2021 में पत्थलगांव में दुर्गा विसर्जन जुलूस के दौरान तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से गौरव अग्रवाल की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पत्थलगांव में जबरदस्त आक्रोश फूट पड़ा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौरव अग्रवाल के परिवार को 50 लाख रुपये की सहयोग राशि देने की घोषणा की थी। पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई थी।

उस समय पत्थलगांव के विधायक रामपुकार सिंह कांग्रेस से थे, जबकि भाजपा विपक्ष में थी। घटना के विरोध में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी पत्थलगांव में मोर्चा खोला था। उपलब्ध समकालीन रिपोर्टों में भाजपा के प्रदेश नेता अनुराग सिंह देव,ओपी चौधरी और अन्य भाजपा के दिग्गज नेता धरने में शामिल हुए थे है।

तब मृतक गैर-आदिवासी परिवार से था, आज मृतक आदिवासी परिवारों से हैं।

वर्ष 2021 में मृतक गौरव अग्रवाल गैर-आदिवासी परिवार से थे। उस समय कांग्रेस सरकार ने उनके परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता दी थी। आज भाजपा सरकार के कार्यकाल में जिन दो मजदूरों की मौत हुई है, वे आदिवासी परिवारों से हैं। मृतकों के परिजन और ग्रामीणों का कहना है कि सहायता और न्याय के मामले में परिवारों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

आज सत्ता बदली, सवाल वही

पांच साल बाद पत्थलगांव में फिर दो मौतों के बाद 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम है। इस बार सत्ता में भाजपा सरकार है और पत्थलगांव की विधायक गोमती साय भाजपा से हैं।

हादसे में जान गंवाने वाले दोनों मजदूर आदिवासी परिवारों से हैं। मृतकों के परिजन और ग्रामीण साफ कह रहे हैं कि उन्हें भी 50-50 लाख रुपये का मुआवजा चाहिए।

परिजनों का सवाल सीधा है—यदि वर्ष 2021 में एक गैर-आदिवासी परिवार के युवक की मौत के बाद 50 लाख रुपये की सहायता दी जा सकती है, तो आज आदिवासी मजदूरों की मौत पर वही मदद क्यों नहीं?

उनका कहना है कि मुआवजे के नाम पर आदिवासी परिवारों के साथ दोहरा मापदंड नहीं चल सकता।

कांग्रेस का आरोप: भाजपा सरकार आदिवासी परिवारों की उपेक्षा कर रही

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार आदिवासी परिवारों की उपेक्षा कर रही है। उनका कहना है कि जब गैर-आदिवासी परिवार के मृतक को 50 लाख रुपये की सहायता दी गई थी, तो आज आदिवासी मजदूरों के परिजनों को समान मुआवजा देने में सरकार पीछे क्यों हट रही है।

कांग्रेस का कहना है कि सरकार को मृतकों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं, बल्कि समानता और न्याय के आधार पर मुआवजा तय करना चाहिए।

जिस एनएच-43 पर भाजपा ने कभी धरना दिया था, वहीं आज कांग्रेस का मोर्चा

आज का राजनीतिक दृश्य 2021 से पूरी तरह उलट है। तब भाजपा विपक्ष में रहकर पत्थलगांव में कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रही थी। आज कांग्रेस विपक्ष में है और उसके नेता उसी एनएच-43 पर मृतक परिवारों के समर्थन में धरने पर बैठे हैं।

चक्काजाम में कांग्रेस के तीन पूर्व विधायक रामपुकार सिंह, यूडी मिंज और हृदयराम राठिया शामिल हुए। इनके साथ नगर पंचायत कुनकुरी के अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता विनयशील गुप्ता, डीडीसी आरती सिंह, रत्ना पैंकरा समेत अन्य कांग्रेस नेता और बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद हैं।

कांग्रेस नेताओं और मृतक परिवारों की मांग है कि दोनों मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की सहायता दी जाए। साथ ही हादसे के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और विद्युत विभाग के संबंधित जेई के खिलाफ एफआईआर की मांग भी जोर पकड़ रही है।

तब भाजपा सड़क पर थी, आज कांग्रेस सड़क पर है

पत्थलगांव की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि 50 लाख रुपये का मुआवजा अब सिर्फ राहत की रकम नहीं, बल्कि सियासी कसौटी बन चुका है।

2021 में भाजपा ने गौरव अग्रवाल के परिवार के लिए मुआवजे की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 50 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की।

आज वही पत्थलगांव भाजपा सरकार के कार्यकाल में दो आदिवासी मजदूरों की मौत के बाद 50 लाख रुपये प्रति परिवार की मांग को लेकर आंदोलन का केंद्र बना हुआ है।

अब लड़ाई रकम की नहीं, बराबरी की है

मृतक परिवारों के लिए यह लड़ाई सिर्फ आर्थिक सहायता की नहीं है। उनके सामने बड़ा सवाल यह भी है कि क्या सरकारें बदलने के साथ मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे का मापदंड भी बदल जाना चाहिए?

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार आदिवासी परिवारों की उपेक्षा कर रही है और उन्हें वही सम्मान व सहायता नहीं दी जा रही, जो पहले गैर-आदिवासी परिवार को दी गई थी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों परिवारों को 50-50 लाख रुपये की सहायता देनी चाहिए।

प्रशासन मामले में मजिस्ट्रियल जांच की बात कह रहा है। जांच में हादसे की परिस्थितियों, ठेकेदार की भूमिका, विभागीय जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था जैसे पहलुओं की पड़ताल होगी।

फिलहाल परिजन शव लेने से इनकार कर रहे हैं और एनएच-43 पर चक्काजाम जारी है। पत्थलगांव में पांच साल पुरानी 50 लाख रुपये की मिसाल और आज उसी रकम की मांग के बीच सियासत ने करवट ले ली है—लेकिन सवाल अब भी वही है: मुआवजे में बराबरी कब होगी?
3 साल पहले का परिदृश्य....तब भी आज भी
सेवा संकल्प पखवाड़ा के तहत “सेवा मेरा योगदान” वाकथन कार्यक्रम, जशपुर में निकली भव्य पदयात्रा

जशपुर जंक्शन। सेवा संकल्प पखवाड़ा के अंतर्गत “सेवा मेरा योगदान” कार्यक्रम के तहत आज जशपुर नगर में भव्य पदयात्रा का आयोजन किया गया। पदयात्रा जयस्तंभ चौक से प्रारंभ होकर महाराजा चौक होते हुए रणजीता स्टेडियम पहुंची।

पदयात्रा में जशपुर विधायक रायमुनी भगत, नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगा राम भगत, मंडल अध्यक्षगण, महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, पार्षद एवं एल्डरमैन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए।

कार्यक्रम में जशपुर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की। पदयात्रा के दौरान नशामुक्ति, स्वच्छता और स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।

पदयात्रा के रणजीता स्टेडियम पहुंचने के बाद विधायक रायमुनी भगत ने उपस्थित लोगों को नशामुक्त समाज और स्वच्छ भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया।

कार्यक्रम के माध्यम से लोगों से नशे से दूर रहने, स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया गया।

“नशामुक्त जशपुर, स्वच्छ जशपुर और स्वस्थ जशपुर” के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में सेवा को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का संदेश दिया गया।
यूसीसी पर महिलाओं की दो टूक: लिव-इन में साथ रहेंगे तो पंजीयन भी जरूरी!

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर यूसीसी समिति के सामने महिलाओं ने उठाया बड़ा सवाल, कहा- रिश्ते से जन्मे बच्चों के अधिकार भी हों सुरक्षित

रायपुर। आज के दौर में जब युवाओं के बीच लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर चर्चा और स्वीकार्यता बढ़ रही है, ऐसे समय में इस रिश्ते को लेकर कानून क्या कहता है और इसमें महिला तथा बच्चों के अधिकार कैसे सुरक्षित होंगे—यह सवाल अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की चर्चा के केंद्र में पहुंच गया है।

छत्तीसगढ़ में यूसीसी को लेकर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में महिलाओं ने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन को अनिवार्य करने की मांग रखी। महिलाओं का कहना था कि यदि दो वयस्क साथ रहने का निर्णय लेते हैं तो उनके रिश्ते की कानूनी स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में महिला के अधिकार सुरक्षित रह सकें।

लिव-इन से बच्चा हुआ तो अधिकार किसके?

महिलाओं ने यूसीसी समिति के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल रखा—लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों का क्या होगा?

बैठक में ऐसे बच्चों को पालन-पोषण और उत्तराधिकार का पूरा अधिकार देने तथा उनकी जैविक पहचान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। महिलाओं का कहना था कि माता-पिता के रिश्ते की प्रकृति का असर बच्चे के अधिकारों पर नहीं पड़ना चाहिए।

सिर्फ साथ रहना नहीं, कानूनी सुरक्षा भी जरूरी

अधिवक्ता सुचित्रा वर्धन ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कानूनी स्पष्टता की जरूरत बताई। वहीं महिलाओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि कानून ऐसा हो, जिससे रिश्ते में किसी महिला के साथ शोषण होने पर उसे प्रभावी कानूनी संरक्षण मिल सके।

संपत्ति और भरण-पोषण में भी बराबरी की मांग

बैठक में महिलाओं ने लिव-इन के साथ-साथ पैतृक संपत्ति में महिलाओं को बराबरी का अधिकार, भरण-पोषण के लिए समान नियम और आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग भी रखी।

शताब्दी पाण्डेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल प्रदेश है, इसलिए यूसीसी बनाते समय आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। पंचायत स्तर पर कानूनी सलाह के लिए विशेष डेस्क बनाने का सुझाव भी दिया गया।

बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं के सुझावों को सुना और उन पर विचार करने का आश्वासन दिया।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या बदलते रिश्तों के दौर में लिव-इन रिलेशनशिप को भी स्पष्ट कानूनी ढांचे में लाया जाना चाहिए?
आपकी क्या राय है? कमेंट में बताइए।
संवेदना जब सामने आती है तो निश्चित ही वह अपार संभावनाएं लेकर सामने आती है।आज हमने अपने खबर के माध्यम से इस संवेदनशील मामले को जिला प्रशासन तक पहुंचाया जिसपर जिला प्रशासन ने संवेदना दिखाते हुए तत्काल सन्ना तहसील के कर्रीकोना निवासी 
पहाड़ी कोरवा कालू राम की सुध ली और तत्काल इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए मेडिकल टीम को कालू राम के घर तक भेजकर उसके इलाज की शुरुआत की।कालू पिछले 12 वर्षों से पैर के कैंसर से पीड़ित है।बहरहाल बगिया कैंप कार्यालय,जिला कलेक्टर श्री रोहित व्यास समेत सीएमएचओ साहब का धन्यवाद जिन्होंने सेवा के इस अवसर को संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाया,अब निश्चित ही इस कालू को उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होगा।
सेवा संकल्प अभियान की असली सार्थकता यहीं है...
जशपुर में चल रहा सेवा संकल्प अभियान समाज के जरूरतमंद और वंचित परिवारों तक मदद पहुंचाने का संकल्प है। लेकिन किसी अभियान की सफलता केवल कार्यक्रमों और आयोजनों से नहीं, बल्कि उस मदद से तय होती है जो जरूरत के समय किसी जिंदगी को संभाल सके।

सन्ना तहसील के ग्राम कर्रीकोना का 32 वर्षीय पहाड़ी कोरवा युवक कालू राम पिछले 12 वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। इलाज के लिए परिवार जमीन तक बेच चुका है। पत्नी विकलांग हैं, दो छोटे बच्चे और माता-पिता की जिम्मेदारी है और अब परिवार के पास इलाज कराने के लिए भी पैसे नहीं हैं।

ऐसे में यदि सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से कालू राम तक प्रशासन और समाज की मदद पहुंचती है, उसे बेहतर अस्पताल में इलाज मिलता है और उसका परिवार फिर से उम्मीद के साथ जीवन जी पाता है, तो यही इस अभियान की सही मायनों में सफलता होगी।

आज जरूरत एक और कार्यक्रम की नहीं, बल्कि एक बीमार इंसान तक सेवा को पहुंचाने की है। उम्मीद है कि कालू राम की पीड़ा शासन-प्रशासन तक पहुंचेगी और उनका इलाज सुनिश्चित होगा।

<nis:link nis:type=tag nis:id=jashpur nis:value=jashpur nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=cmochhattisgarh nis:value=CMOChhattisgarh nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=cghealth nis:value=cghealth nis:enabled=true nis:link/>
डिजिटल इंडिया की रंगोली ने दिया ‘कनेक्टेड इंडिया, स्ट्रॉन्गर इंडिया’ का संदेश

रणजीता स्टेडियम में रंगोली के जरिए साकार हुआ डिजिटल भारत का विजन, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया अवलोकन

जशपुर जंक्शन, 06 अक्टूबर 2026। 

सेवा संकल्प अभियान के तहत रणजीता स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के विजन को आकर्षक रंगोली के माध्यम से जीवंत रूप दिया गया। रंग-बिरंगे रंगों और दीपों से सजी इस विशेष रंगोली में डिजिटल कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस, तकनीकी सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने रणजीता स्टेडियम पहुंचकर रंगोली का अवलोकन किया और उसके चारों ओर दीप प्रज्ज्वलित कर सहभागिता निभाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से डिजिटल विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डिजिटल तकनीक ने जहां आम नागरिकों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और सुशासन को भी मजबूती दी है। इस अवसर पर विधायक रायमुनी भगत भी मौजूद रहीं।

रंगोली में दिखी डिजिटल भारत की तस्वीर

रंगोली के मध्य में ‘डिजिटल इंडिया’ का संदेश प्रमुखता से अंकित किया गया था। इसके ऊपर बने वाई-फाई के प्रतीक ने देश में बढ़ती डिजिटल कनेक्टिविटी और इंटरनेट की पहुंच को दर्शाया। कंप्यूटर और क्लाउड तकनीक के चित्र डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन जानकारी और आधुनिक तकनीकी संसाधनों का प्रतीक बने।

मोबाइल फोन और सरकारी भवन के चित्रों के जरिए मोबाइल तकनीक तथा ई-गवर्नेंस को दर्शाया गया। रंगोली में हरी पत्तियों और पौधे के चित्र के माध्यम से डिजिटल विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश दिया गया।

भारत के मानचित्र को दोनों हाथों से थामे हुए चित्र के जरिए तकनीक के माध्यम से देश को सशक्त बनाने और प्रत्येक नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की भावना अभिव्यक्त की गई। मानचित्र के भीतर बनी विभिन्न रंगों की डिजिटल लाइनें देश के अलग-अलग हिस्सों को तकनीक के माध्यम से जोड़ने का प्रतीक बनीं।

दीपों ने दिया जागरूकता और सकारात्मकता का संदेश

रंगोली के नीचे लिखा ‘Connected India, Stronger India’ संदेश डिजिटल रूप से जुड़े नागरिकों के माध्यम से मजबूत भारत की परिकल्पना को सामने रखता है। रंगोली के चारों ओर जलते दीप भारतीय संस्कृति, प्रकाश और सकारात्मकता के प्रतीक बने।

दीपों के माध्यम से डिजिटल जागरूकता की रोशनी से अज्ञानता और डिजिटल दूरी के अंधकार को दूर कर नए अवसरों की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम भगत, पार्षद विक्रांत सिंह एवं देवधन नायक, मनोनीत पार्षद रुपेश सोनी, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 11 अक्टूबर को,जशपुर में चार केंद्रों पर 1320 परीक्षार्थी होंगे शामिल, परीक्षार्थियों के लिए दिशा-निर्देश जारी

जशपुर जंक्शन 06 अक्टूबर 2026 छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल, नवा रायपुर द्वारा सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा (एलएसएटी-26) का आयोजन 11 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। जिले में परीक्षा के सुचारु एवं व्यवस्थित संचालन के लिए चार परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां कुल 1320 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा के सुचारु संचालन एवं आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए श्री डिप्टी कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह बिसेन को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

चार परीक्षा केंद्रों पर होगी परीक्षा

जिले में बनाए गए परीक्षा केंद्रों में शासकीय आर.बी.आर. एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जशपुर में 360 परीक्षार्थियों की बैठक व्यवस्था है। शासकीय विजय भूषण सिंहदेव कन्या महाविद्यालय, जशपुर में 360, शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जशपुर में 360 तथा शासकीय एम.एल.बी. कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जशपुर में 240 परीक्षार्थियों के लिए व्यवस्था की गई है। इस प्रकार चारों केंद्रों में कुल 1320 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे।

परीक्षा से पहले केंद्र का अवलोकन करने की सलाह

कर्मचारी चयन मंडल द्वारा परीक्षार्थियों के लिए जारी निर्देशों के अनुसार अभ्यर्थियों को परीक्षा के एक दिन पूर्व अपने परीक्षा केंद्र का अनिवार्य रूप से अवलोकन कर लेने की सलाह दी गई है, ताकि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की असुविधा न हो। परीक्षार्थियों को परीक्षा प्रारंभ होने से कम से कम दो घंटे पूर्व केंद्र में पहुंचना होगा। इस दौरान उनकी सुरक्षा जांच एवं फोटोयुक्त मूल पहचान पत्र से सत्यापन किया जाएगा। परीक्षा प्रारंभ होने के 30 मिनट पूर्व परीक्षा केंद्र का मुख्य द्वार बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ड्रेस कोड और प्रतिबंधित वस्तुओं का रखें ध्यान

परीक्षार्थियों को हल्के रंग के आधी बांह वाले कपड़े पहनकर परीक्षा में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। काले, गहरे नीले, गहरे हरे, जामुनी, मैरुन, बैंगनी एवं गहरे चॉकलेटी रंग के कपड़े पहनना प्रतिबंधित रहेगा। धार्मिक एवं सांस्कृतिक पोशाक में आने वाले परीक्षार्थियों को सामान्य समय से पहले केंद्र में रिपोर्ट करना होगा और अतिरिक्त सुरक्षा जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा। परीक्षा केंद्र में जूते पहनकर आना प्रतिबंधित है। परीक्षार्थी केवल चप्पल पहनकर आएं। कान में किसी भी प्रकार के आभूषण, मोबाइल फोन, ब्लूटूथ उपकरण, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक घड़ी, पर्स, पाउच, स्कार्फ, बेल्ट, टोपी आदि परीक्षा कक्ष में ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

केवल काला या नीला बॉल प्वाइंट पेन लाएं

परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में केवल काले या नीले रंग का बॉल प्वाइंट पेन लेकर आने की अनुमति होगी। परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग किए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी तथा संबंधित अभ्यर्थी की अभ्यर्थिता समाप्त कर दी जाएगी।
जशपुर जंक्शन : कर्मवीर सिंह के जशपुर आगमन ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी, पवन साय की मौजूदगी ने भी खींचा ध्यान,गिरांग मोड़ से बालाछापर तक दिखा भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, संगठन की नई रणनीति और जमीनी सक्रियता के संकेत

जशपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश महामंत्री संगठन कर्मवीर सिंह के प्रथम जशपुर आगमन ने जिले के राजनीतिक और संगठनात्मक माहौल में नई हलचल पैदा कर दी। उनके साथ झारखंड भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन पवन साय की मौजूदगी ने इस दौरे को और महत्वपूर्ण बना दिया। गिरांग मोड़ से बालाछापर स्थित सरना रिसोर्ट तक जिस तरह कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं का स्वागत किया, उसने भाजपा के संगठनात्मक नेटवर्क और कार्यकर्ताओं की सक्रियता का स्पष्ट संदेश दिया।

गिरांग मोड़ पर जिला भाजपा के पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से दोनों संगठन नेताओं का स्वागत किया। इसके बाद बालाछापर तक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और स्वागत का सिलसिला जारी रहा। राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह महज स्वागत कार्यक्रम नहीं, बल्कि जिले में संगठन की जमीनी ताकत और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिए तैयारियों का प्रदर्शन भी माना जा रहा है।

संगठन की नब्ज टटोलते नजर आए कर्मवीर सिंह

सरना रिसोर्ट में कर्मवीर सिंह ने जिला एवं मंडल स्तर के पदाधिकारियों से परिचय प्राप्त किया और संगठनात्मक गतिविधियों पर संवाद किया। पवन साय की मौजूदगी में हुए इस संवाद को भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

भाजपा में संगठन महामंत्री की भूमिका चुनावी राजनीति से अलग होकर संगठन को बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक सक्रिय और मजबूत बनाए रखने की होती है। ऐसे में कर्मवीर सिंह का पहला जशपुर दौरा केवल औपचारिक परिचय तक सीमित न रहकर स्थानीय संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और आने वाले राजनीतिक दौर की जमीन को समझने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

पवन साय की मौजूदगी ने बढ़ाया राजनीतिक संदेश

कर्मवीर सिंह के साथ झारखंड भाजपा के महामंत्री संगठन पवन साय का जशपुर पहुंचना भी चर्चा का विषय रहा। दोनों नेताओं ने कार्यकर्ताओं से संवाद किया और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

विशेष रूप से जशपुर जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आदिवासी क्षेत्र में प्रदेश और पड़ोसी राज्य के संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की एक साथ मौजूदगी को भाजपा के व्यापक संगठनात्मक दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रदेश से मंडल तक एक मंच पर नजर आया संगठन

कार्यक्रम में प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन के कई वरिष्ठ चेहरों की मौजूदगी ने आयोजन को शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया। मंत्री राजेश अग्रवाल, प्रदेश भाजपा महामंत्री अखिलेश सोनी एवं रामु रोहरा, पूर्व राज्यसभा सांसद राजा रणविजय सिंह जूदेव, गुजरात प्रदेश की सह प्रभारी एवं पत्थलगांव विधायक गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, जिलाध्यक्ष भरत सिंह, पूर्व प्रदेश महामंत्री कृष्ण कुमार राय और भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष अमित टिकरिहा सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

पूर्व जिलाध्यक्ष, जिला पंचायत एवं नगर निकाय के जनप्रतिनिधियों, जिला महामंत्रियों, मोर्चा अध्यक्षों और मंडल अध्यक्षों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि भाजपा संगठन जिले में ऊपर से नीचे तक अपने नेटवर्क को सक्रिय रखने पर जोर दे रहा है।

युवा मोर्चा की रथ यात्रा से भी जुड़ा संवाद

इसी दौरान गुजरात के वडनगर से बनारस के लिए निकली युवा मोर्चा की सेवा ज्योति रथ यात्रा के यात्रियों से भी कर्मवीर सिंह और पवन साय ने संवाद किया। इससे कार्यक्रम में संगठन, युवा गतिविधियों और वैचारिक अभियान का पक्ष भी जुड़ गया।

आगे की राजनीति के लिए क्या संकेत?

कर्मवीर सिंह का जशपुर आगमन ऐसे समय हुआ है जब प्रदेश की राजनीति में भाजपा सरकार के कामकाज के साथ-साथ संगठन की सक्रियता भी लगातार चर्चा में है। जशपुर भाजपा के लिए विशेष राजनीतिक महत्व रखता है और यहां संगठन की मजबूती का सीधा असर आने वाले स्थानीय एवं व्यापक राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

इस लिहाज से गिरांग मोड़ से बालाछापर तक उमड़ा कार्यकर्ताओं का उत्साह सिर्फ स्वागत तक सीमित नहीं माना जा सकता। यह भाजपा की ओर से अपने संगठनात्मक आधार को सक्रिय रखने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और आने वाले राजनीतिक मुकाबलों के लिए जमीन मजबूत करने का संदेश भी माना जा रहा है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि कर्मवीर सिंह के इस पहले दौरे के बाद जशपुर भाजपा संगठन में क्या नई रणनीति दिखाई देती है और प्रदेश नेतृत्व की प्राथमिकताओं का स्थानीय राजनीति पर कितना असर पड़ता है।