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Jashpur Junction

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ब्रेकिंग जशपुर जंक्शन।जयंत लकड़ा की बढ़त से बदले सियासी समीकरण जशपुर युवा कांग्रेस में किसका बजेगा डंका? 

11 दिन से जारी घमासान में करीब 7 हजार वोटिंग, विनय सील समर्थित जयंत लकड़ा आगे; रवि शर्मा गुट के संजय पाठक से सीधी टक्कर

जशपुर।10.09.2026

जशपुर युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में पिछले 11 दिनों से जारी सियासी घमासान अब रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। दो गुटों के बीच चल रही इस प्रतिष्ठा की लड़ाई में मौजूदा रुझान विनय सील समर्थित प्रत्याशी जयंत लकड़ा के पक्ष में जाते दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनके सामने रवि शर्मा गुट के संजय पाठक मैदान में हैं।

अब तक जिले में करीब 7 हजार वोटिंग हो चुकी है और सामने आ रहे रुझानों में जयंत लकड़ा बढ़त बनाए हुए बताए जा रहे हैं। हालांकि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर बदलने की गुंजाइश बनी हुई है।

दो चुनाव से रवि शर्मा गुट का दबदबा, क्या इस बार पलटेगा खेल?

जशपुर युवा कांग्रेस की सियासत में पिछले दो चुनावों से रवि शर्मा गुट का प्रभाव रहा है। ऐसे में इस बार जयंत लकड़ा की बढ़त ने चुनावी मुकाबले को महज प्रत्याशियों की लड़ाई न रखकर दो सियासी गुटों की ताकत के मुकाबले में बदल दिया है।

एक ओर रवि शर्मा गुट अपना पुराना दबदबा कायम रखने की कोशिश में है, तो दूसरी ओर विनय सील समर्थित जयंत लकड़ा बढ़त को जीत में बदलने की कोशिश में जुटे हैं। यही वजह है कि चुनाव के हर अगले रुझान पर कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

30 सितंबर तक जारी रहेगा इंतजार

फिलहाल शुरुआती तस्वीर जयंत लकड़ा के पक्ष में नजर आ रही है, लेकिन बाजी किसके हाथ लगेगी, इसका फैसला 30 सितंबर के बाद ही होगा।

क्या रवि शर्मा गुट लगातार तीसरी बार अपना दबदबा कायम रखेगा? या फिर जयंत लकड़ा की बढ़त जशपुर युवा कांग्रेस में सियासी सत्ता का नया अध्याय लिखेगी?

फिलहाल वोटिंग जारी है और मुकाबला बेहद दिलचस्प है अब सबकी नजर 30 सितंबर पर टिकी है।

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ए री सखी मंगल गाओ...
स्वर अवधेश पूरी जी
गाँव का छात्र इतना सीधा और स्वाभिमानी होता है डॉ साहब कि वह झूठ नहीं बोलता जब वह अंततः प्रताड़ित होता है तब वह दिमाग लगाता है।यह कोई पहला केस नहीं आपकी अंतरात्मा भी जानती है बिना ₹500,₹1000,₹1200,₹1500 के मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट में हस्ताक्षर नहीं करते। आप ऐसे जगह पर बैठे हैं जहां भले ही आपको बड़े सफेदपोशों का संरक्षण प्राप्त हो पर जो आपकी ड्यूटी है उसके लिए सरकार आपको पर्याप्त दे रही है।इस पर भी अगर कम पड़ रहा है तो लेते रहिए और सरकार को बदनामी देते रहिए सफेदपोशों का संरक्षण आपको हमेशा मिलता रहेगा,बाकी सब कुछ आपके लिए पैसा ही है ऊपर वाला जब हिसाब करेगा तो सब यहीं धरा रह जाएगा....खैर यहां हम बात कर रहे हैं वायरल वीडियो की जिसमें जशपुर जिला चिकित्सालय के डॉ धीरेंद्र अग्रवाल ₹500 लेते दिख रहे हैं...कहानी आप सुनिए मुकेश्वर की जुबानी.....

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देखिए जशपुर के डॉ डीके अग्रवाल पर लगे गंभीर आरोप<nis:link nis:type=tag nis:id=jashpur nis:value=jashpur nis:enabled=true nis:link/>
जशपुर के डॉ. धीरेंद्र अग्रवाल पर कथित रिश्वत का वायरल वीडियो, जिला जांच समिति ने जुटाए डिजिटल साक्ष्य, शपथपूर्वक बयान में मुकेश्वर ने कहा फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए मांगे एक हजार ....

जशपुर जंक्शन,02 सितंबर 2026

जिला चिकित्सालय जशपुर में पदस्थ डॉ. धीरेंद्र कुमार अग्रवाल पर चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र बनाने के एवज में कथित रूप से रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों की जांच अब दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों तक पहुंच गई है। मामले में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जांच समिति गठित की। समिति के समक्ष शिकायतकर्ता मुकेश्वर राम का शपथपूर्वक बयान दर्ज किया गया, वहीं कथित घटना से संबंधित वीडियो को भी डिजिटल साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर लिया गया है।

फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए ₹1 हजार मांगने का दावा
मुकेश्वर राम ने जांच समिति के समक्ष दिए अपने शपथपूर्वक कथन में बताया कि 4 जुलाई 2026 को वह अपने दोस्त सहिन्द्र राम और करिश्मा बाई के साथ जिला अस्पताल जशपुर पहुंचे थे। करिश्मा बाई को पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में प्रवेश के लिए चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी।

मुकेश्वर के बयान के अनुसार, डॉ. धीरेंद्र अग्रवाल से फिटनेस प्रमाण पत्र बनाने के लिए संपर्क किया गया। आरोप है कि डॉक्टर ने प्रमाण पत्र बनाने के बदले ₹1,000 की मांग की। जब उनके द्वारा तत्काल पैसे नहीं होने की बात कही गई तो कथित रूप से प्रमाण पत्र नहीं बनाने की बात कही गई।

बयान में मुकेश्वर ने आगे बताया कि छात्रावास में प्रवेश के लिए प्रमाण पत्र आवश्यक होने के कारण उनके साथ मौजूद सहिन्द्र राम के पास रखे ₹500 दिए गए, जिसके बाद डॉक्टर ने फिटनेस प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए।

घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग का भी दावा

शपथपूर्वक बयान में मुकेश्वर राम ने दावा किया कि उन्होंने पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया था। उन्होंने इस वीडियो रिकॉर्डिंग को जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की बात कही है।

मामले से संबंधित सामने आए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रमाण-पत्र में वीडियो फाइल का नाम दर्ज है। दस्तावेज में फाइल का आकार और उसके विवरण भी दर्ज किए गए हैं। दस्तावेज में मुकेश्वर राम को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति बताया गया है।

इससे यह सामने आता है कि जांच में कथित वायरल वीडियो को केवल सोशल मीडिया सामग्री के तौर पर नहीं, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों के साथ जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया है।

10 जुलाई को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत

मुकेश्वर राम ने अपने शपथपूर्वक कथन में बताया है कि घटना के बाद उन्होंने 10 जुलाई 2026 को शाम लगभग 5:30 बजे सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत की थी।

इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, जशपुर की ओर से 29 जुलाई 2026 को पत्र जारी कर मुकेश्वर राम और सेन्द्रा राम को जांच समिति की बैठक में उपस्थित होने के लिए कहा गया।

पत्र में डॉ. धीरेंद्र कुमार अग्रवाल के विरुद्ध की गई शिकायत की विस्तृत जांच के लिए जांच समिति गठित किए जाने का उल्लेख है।

जांच समिति की बैठक 31 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे कलेक्टर कार्यालय, जशपुर के कक्ष क्रमांक 37 में आयोजित की गई। इसी जांच प्रक्रिया में मुकेश्वर राम का शपथपूर्वक कथन दर्ज किया गया।

जीरो टॉलरेंस की नीति के बीच प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

प्रदेश सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल के डॉक्टर से जुड़े कथित रिश्वतखोरी के इस मामले में शिकायत के बाद जांच समिति का गठन, शिकायतकर्ता का शपथपूर्वक बयान और डिजिटल रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेज जुटाया जाना जांच की गंभीरता को दर्शाता है।

अब जांच समिति के सामने चुनौती वीडियो की वास्तविकता, उसमें दर्ज घटनाक्रम, शिकायतकर्ता के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर निष्कर्ष तक पहुंचने की है।

फिलहाल डॉ. धीरेंद्र कुमार अग्रवाल पर लगाए गए रिश्वत के आरोप जांच के अधीन हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मामले में डॉक्टर का पक्ष और जांच समिति का अंतिम निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

बड़ा सवाल यह है कि क्या वायरल वीडियो और शपथपूर्वक बयान में किए गए दावे जांच में सही साबित होंगे? क्या डिजिटल साक्ष्य के परीक्षण के बाद डॉ. अग्रवाल पर कार्रवाई होगी?अब नजर जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर है।
ब्रेकिंग जशपुर जंक्शन : जशपुर में पैसा लेते डॉ अग्रवाल के वायरल वीडियो से हरकत में जिला प्रशासन,कलेक्टर ने गठित की जांच टीम, CM हेल्पलाइन में हुई थी शिकायत,पहले भी लगे हैं गंभीर आरोप।

जशपुर,02 सितंबर 2026

जिला अस्पताल से जुड़े डॉ. धीरेंद्र अग्रवाल का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला अब प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है। वायरल वीडियो में डॉ. अग्रवाल को कथित तौर पर पैसे लेते हुए दिखाया गया है। वीडियो सामने आने के बाद मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से की गई थी।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर जशपुर ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जांच टीम गठित की है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जी.एस. जात्रा ने 1 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर जांच की स्थिति से अवगत कराया है।

पत्र में बताया गया है कि गठित जांच टीम द्वारा मामले की नियमानुसार जांच की जा रही है। जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उपलब्ध दस्तावेजों, अभिलेखों और अन्य संबंधित तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

जांच पूरी होने के बाद तय होगी कार्रवाई

CMHO जी.एस. जात्रा के अनुसार फिलहाल मामले की जांच प्रक्रियाधीन है। जांच पूरी होने के बाद जांच दल द्वारा प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद जांच में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

मामले में वायरल वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच चल रही है, इसलिए अभी डॉ. अग्रवाल को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है कि जांच टीम वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों को लेकर क्या निष्कर्ष सामने रखती है।

बहरहाल इस कथित वीडियो के सामने आने के बाद डॉ अग्रवाल समेत स्वास्थ्य विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है।अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है।
ये जशपुर जिला अस्पताल की लचर कार्यवाही,नशेड़ी को ड्रेसिंग की कमान....?
Jila hospital jashpur # jashpur junction
जशपुर की अनेश्वरी ने सोचा नहीं था सीएम खुद उसकी ई रिक्शा में बैठेंगे आज जब यह मौका आया तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा देखिए....
Cm house
जिसने जल चढ़ाया.....
पवन साय जी को जल्दी जल्दी दौरा करना चाहिए कहीं पद धारी नेता केवल कमीशन और ठेकेदारी में न रह जाएं...वरना लहर विरोधी होने का अनुभव वे स्वयं महसूस नहीं करते।।।
सियासत की हलचल से दूर, आज हाथ में थी हल 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गृहग्राम बगिया के खेत में बैलों के साथ हल चलाकर बियासी की।

कुर्सी चाहे कितनी भी बड़ी हो, अपनी माटी तक पहुंचने का रास्ता खेत से होकर ही गुजरता है।

आज खेत में न भाषण था, न मंच—बस मिट्टी, बैल और पुरानी यादें थीं।

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Ambikapur NH43 बदहाल
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राजनीति @जशपुर जंक्शन: सागर के हिलोरों में डुबकी लगाती कांग्रेस, खेवनहार कौन? जशपुर में पक रही सियासी खिचड़ी की महक दिल्ली दरबार तक, संगठन से लेकर दावेदारी तक शुरू हुई नई गोलबंदी

योगेश थवाईत। जशपुर

जशपुर का मौसम इन दिनों बड़ा सुहावना है। पहाड़ों पर बादल हैं, हवाओं में ठंडक है और राजनीति के तालाब में... हिलोरें।

सोचा, मौसम का फायदा उठाया जाए और जशपुर की राजनीति के उसी तालाब में एक नजर डाल ली जाए। आखिर सवाल बड़ा है.... कांग्रेस की नैया का खेवनहार कौन?

जब से जशपुर जिले को प्रदेश की सत्ता की कमान मिली है, जिले की राजनीति कुछ शांत-सी दिखाई दे रही है। सत्ता पक्ष के समर्थक अपने-अपने हिसाब से भविष्य की जमीन मजबूत करने में व्यस्त हैं। आखिर राजनीति अपनी जगह है और घर-परिवार की चिंता अपनी जगह।

दूसरी ओर, जो संगठन की दौड़ में पीछे रह गए, वे अब स्वाभिमान की चादर ओढ़कर अगली पारी की तैयारी में जुटे हैं। कुछ चेहरे अभी भी इंतजार में हैं....शायद कभी आसमान फटे और टिकट, पद या कोई बड़ी जिम्मेदारी सीधे गोद में आ गिरे!

लेकिन इतना तय है कि जशपुर को प्रदेश नेतृत्व मिलना अपने आप में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है। भाजपा ने संगठन के बूते जिस तरह जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया, उसने जशपुर की राजनीतिक हैसियत को और बढ़ा दिया है।

पहले भाजपा की पतवार देखिए...

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की तीनों सीटों पर जीत के दौरान संगठन की कमान संभालने वाले सुनील गुप्ता का नाम स्वाभाविक रूप से चर्चा में आता है। जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी पूरी होने के बाद उन्हें सरगुजा संभाग की जिम्मेदारी मिलना संगठन में उनकी भूमिका का विस्तार माना जा रहा है।

आगे कोई नई जिम्मेदारी मिले तो राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर आश्चर्य शायद ही होगा।

अब जिलाध्यक्ष भरत सिंह हैं। और उनकी राजनीति का एक खास पहलू है....हिंदुत्व के मुद्दे पर संगठन को एकजुट रखने की कोशिश। भाजपा की अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं अपनी जगह हैं, लेकिन चुनावी मैदान में जब हिंदुत्व का सवाल आता है तो संगठन का बड़ा हिस्सा एक मंच पर दिखाई देता है।

यही भाजपा की ताकत है और कांग्रेस की बड़ी चुनौती भी।

अब आइए कांग्रेस के सागर में...

जशपुर कांग्रेस की कहानी में एक दिलचस्प मोड़ उस समय आया जब कांग्रेस ने जिले में तीनों विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की।

उस दौर में जिलाध्यक्ष के रूप में पवन अग्रवाल की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विपरीत राजनीतिक माहौल में संगठन को खड़ा करना और तीनों सीटों पर कांग्रेस की जीत तक पहुंचाना आसान काम नहीं था।

लेकिन राजनीति में कुर्सी स्थायी नहीं होती।

संगठन बदला। नेतृत्व का समीकरण बदला। विधायकों को संगठन में ज्यादा महत्व मिला और पवन अग्रवाल की जगह यूडी के करीबी माने जाने वाले मनोज सागर यादव को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

यहीं से कांग्रेस के सागर में पहली बड़ी हिलोर उठी।

किस दिशा में नाव गई, यह कांग्रेस के भीतर बैठे लोग शायद हमसे बेहतर जानते हैं!

अब नाव पर यूडी बैठे हैं... लेकिन मंजिल ?

आज कांग्रेस संगठन की कमान यूडी मिंज के हाथों में है। सवाल यह नहीं कि यूडी खेवनहार बन सकते हैं या नहीं। सवाल यह है कि क्या वे पूरे जिले की कांग्रेस को एक नाव में बैठाकर किनारे तक ले जा पाएंगे?

क्योंकि जशपुर कांग्रेस में सबसे बड़ी समस्या शायद नाव की नहीं, नाव में बैठे अलग-अलग यात्रियों की दिशा की है।

जशपुर में एक धड़ा, कुनकुरी में दूसरा समीकरण और पत्थलगांव में अपनी अलग राजनीतिक गणित,ऐसे में जिलाध्यक्ष के सामने चुनौती केवल भाजपा से मुकाबले की नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर समन्वय बैठाने की भी है।

और यही वह जगह है जहां सागर की गहराई शुरू होती है।

विनयशील की एंट्री,सियासत में पैराशूट या नई उड़ान ?

कुनकुरी नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील गुप्ता ने जिस आक्रामक अंदाज में स्थानीय मुद्दों को उठाना शुरू किया है, उससे यह साफ है कि वे राजनीति को दर्शक दीर्घा से देखने वालों में नहीं हैं।

पत्रों के जरिए सवाल, सोशल मीडिया के जरिए हमला और स्थानीय मुद्दों को सत्ता तक पहुंचाने की कोशिश—यह शैली धीरे-धीरे उनकी राजनीतिक पहचान बनाती दिखाई दे रही है।

विरोधियों ने उन्हें कभी अनुभवहीन कहा, कभी पैराशूट लैंडिंग वाला नेता बताया। मगर राजनीति का गणित बड़ा बेरहम है,यहां अनुभव का प्रमाणपत्र जनता देती है, विरोधी नहीं।और विनयशील फिलहाल मैदान में दौड़ रहे हैं।

दिल्ली तक उनकी सक्रियता और राहुल गांधी की टीम के साथ बढ़ती नजदीकी की चर्चा जशपुर की राजनीति में उन्हें आने वाले समय का महत्वपूर्ण चेहरा बना सकती है।

कांग्रेस के पास एक और युवा चेहरा "आशिका कुजूर"

जशपुर के बगीचा क्षेत्र के छोटे से गांव ओड़का से निकलकर जिला पंचायत तक पहुंची आशिका कुजूर की राजनीतिक यात्रा भी कांग्रेस के लिए कम महत्वपूर्ण नहीं है।

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में लंबी दूरी तक साथ चलने वाली युवा पीढ़ी के चेहरों में उनका नाम रहा। प्रदेश युवा कांग्रेस में जिम्मेदारियां और संगठनात्मक भूमिका उन्हें भविष्य की राजनीति के लिए तैयार करती दिखाई देती है।

गांव से शुरू हुई राजनीति यदि दिल्ली तक पहुंचती है, तो उसे सिर्फ संयोग कहकर खारिज करना राजनीतिक भूल होगी।

कांग्रेस के पास शायद यही सबसे बड़ा मौका है,पुराने चेहरों की राजनीति और नए चेहरों की ऊर्जा को एक मंच पर लाना।

विश्व आदिवासी दिवस ने भी दे दिया संकेत ?

इस बार विश्व आदिवासी दिवस पर जशपुर में दिखाई दिया सामाजिक-सामुदायिक उत्साह आने वाले चुनावी समीकरणों का संकेत माना जा सकता है।

उरांव समाज की सक्रियता बढ़ी है और ईसाई आदिवासी समाज से राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग भी लंबे समय से उठती रही है।

कांग्रेस ने पिछले चुनाव में कुनकुरी से यूडी मिंज को मैदान में उतारकर इस समीकरण को साधने की कोशिश की थी। उस प्रयोग ने कांग्रेस को जीत भी दिलाई।हांलाकि इसे यूडी बरक़रार नहीं रख पाए। 

अब सवाल यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इसी सामाजिक समीकरण को आगे बढ़ाएगी या कोई नया राजनीतिक प्रयोग करेगी?

टिकट का फैसला अभी दूर है, लेकिन टिकट की राजनीति की तैयारी काफी पहले शुरू हो चुकी है।

जशपुर में विनय भगत का वोट बैंक भी भूले नहीं

जशपुर विधानसभा की राजनीति में विनय भगत का दौर भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण रहा। कांग्रेस का वोटबैंक 50 हजार के आसपास से आगे बढ़कर 70 हजार के पार पहुंचा—यह बदलाव पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत था।

लेकिन राजनीति में एक वोट बढ़ता है तो दूसरा वोट कहीं और से खिसकता भी है।

हिंदुत्व के मुद्दे पर कांग्रेस की सक्रियता ने उसके परंपरागत मतदाताओं के एक हिस्से को असहज किया,ऐसी राजनीतिक चर्चा भी होती रही। दूसरी ओर भाजपा ने नए मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश की और वर्तमान विधायक रायमुनि भगत ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की।

नतीजा सामने है।

कांग्रेस के पास वोट था, भाजपा के पास चुनावी मैनेजमेंट।

कुनकुरी,सबसे गर्म कुर्सी

अब आते हैं उस विधानसभा पर, जहां मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र भी है, भाजपा के जिलाध्यक्ष भी हैं और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी।

जी हां "कुनकुरी"

यह सीट आने वाले समय में सिर्फ विधानसभा चुनाव का मैदान नहीं होगी, बल्कि संगठनात्मक ताकत की परीक्षा भी होगी।

एक तरफ भाजपा के भरत सिंह, दूसरी ओर कांग्रेस के यूडी मिंज और मैदान में लगातार सवाल उठाते विनयशील गुप्ता।

यहां की राजनीति में अभी बहुत कुछ खुलकर सामने नहीं आया है।

क्योंकि राजनीति में युद्ध से पहले की खामोशी कई बार सबसे ज्यादा शोर करती है।

पत्थलगांव की पहेली

पत्थलगांव में जिला बनाने का मुद्दा कांग्रेस के लिए पुराना राजनीतिक घाव है।

रामपुकार सिंह की हार ने यह साबित किया कि लंबे समय से मजबूत माने जाने वाले राजनीतिक समीकरण भी एक मुद्दे पर उलट सकते हैं।

आज भी पत्थलगांव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बेहद रोचक है। विधायक गोमती साय राजनीतिक रूप से अनुभवी हैं और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने में माहिर मानी जाती हैं।

अगर पत्थलगांव जिला बनता है तो यह सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं होगा,इसके राजनीतिक फायदे-नुकसान का हिसाब भी चुनावी पंडित अपनी-अपनी डायरी में लिखेंगे।

कांग्रेस को तब नई रणनीति के साथ मैदान में उतरना पड़ेगा।

तो आखिर कांग्रेस का खेवनहार कौन?

यही तो असली सवाल है।

यूडी मिंज के पास संगठन है और पुराना राजनीतिक अनुभव।

विनयशील गुप्ता के पास युवा आक्रामकता, स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता और संगठन से बाहर अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश।

आशिका कुजूर के पास युवा और आदिवासी नेतृत्व का चेहरा बनने की संभावनाएं हैं।

वहीं कांग्रेस के पुराने नेताओं के पास अपना अनुभव, जनाधार और राजनीतिक नेटवर्क है।

लेकिन कांग्रेस की सबसे बड़ी जरूरत किसी एक व्यक्ति की नहीं, एक ऐसी टीम की है जो जशपुर की तीनों विधानसभा सीटों को एक राजनीतिक रणनीति में बांध सके।

क्योंकि भाजपा ने जशपुर को सिर्फ चुनावी मैदान नहीं समझा। उसने इसे संगठन की प्रयोगशाला बनाया।

कांग्रेस को भी अब तय करना होगा कि वह सिर्फ चुनाव के समय जागने वाली पार्टी बनेगी या अगले चुनाव से काफी पहले बूथ से लेकर दिल्ली तक अपनी राजनीतिक पटकथा लिखेगी।

फिलहाल जशपुर कांग्रेस के सागर में हिलोरें तेज हैं।

नावें कई हैं। पतवारें भी कई हाथों में हैं।

लेकिन किनारे तक कौन पहुंचेगा?

यह अभी सागर के गर्त में छिपा है।

और राजनीति की सबसे मजेदार बात यही है

जिसका नाम आज खेवनहारों की सूची में नहीं है,जो अपने नाम की तलाश में हैं हो सकता है कल वही पूरी नाव का कप्तान बनकर सामने आ जाए।

जशपुर की राजनीति में अभी मौसम सुहावना है... लेकिन चुनाव तक तूफान आने की पूरी संभावना है।
"कालिख से मालाओं तक..." जनपद CEO का दिलचस्प सफर,रिटायरमेंट के बाद ससम्मान विदाई।

By योगेश थवाईत

लोकतंत्र बड़ा दिलचस्प है। यहां कभी शब्दों की तलवारें खिंच जाती हैं, तो कभी वही हाथ सम्मान की माला भी पहना देते हैं।

कुछ दिन पहले जशपुर जिले के जनपद पंचायत बगीचा की बैठक में जो दृश्य सामने आया था, वह किसी से छिपा नहीं था।

आरोप-प्रत्यारोप, तीखी बहस और फिर एक-दूसरे को "देख लेने" की चेतावनी। एक ओर "कालिख पोतकर वापस भेजने" जैसी तल्ख टिप्पणी, तो दूसरी ओर "देख लेंगे" का जवाब। 

वीडियो वायरल हुआ, चर्चाएं हुईं और लोगों ने अपने-अपने पक्ष चुन लिए।समय बीता... मामला शांत हो गया।

आज वही जनपद कार्यालय था, वही लोग थे, लेकिन तस्वीर बिल्कुल अलग थी। फूलों की मालाएं थीं, केक था, तालियां थीं और सेवानिवृत्त हो रहे सीईओ के कार्यकाल की प्रशंसा के साथ भावभीनी विदाई भी।

अब लोग उस पुराने वायरल वीडियो को फिर याद कर रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उस दिन कैमरे में गुस्सा कैद हुआ था, और आज सम्मान।

शायद यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती भी है और सबसे बड़ी विडंबना भी "जहां मतभेद स्थायी हो सकते हैं, लेकिन रिश्ते हमेशा वैमनस्य के नहीं होते।सार्वजनिक जीवन में तकरार भी होती है और समय आने पर गरिमा के साथ सम्मान भी।"

हो सकता है उस दिन की कड़वाहट पूरी तरह कभी खत्म न हुई हो, और मन की टीस कहीं न कहीं रह गई हो। लेकिन यह भी सच है कि विदाई के अवसर पर व्यक्तिगत कटुता से ऊपर उठकर सम्मान देना लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत माना जाता है।

आखिरकार, राजनीति और प्रशासन में "कालिख" से ज्यादा देर तक "माला" ही याद रहती है। और शायद यही संदेश इस पूरे घटनाक्रम से भी निकलकर सामने आता है।

खैर!राजनीतिक मसला जो भी हो एक जिम्मेदार व्यक्तित्व के साथ दबंगई से काम करने वाले अधिकारी रिटायर्ड सीईओ विनोद सिंह अपनी कार्यशैली को लेकर हमेशा याद किए जाएंगे।जशपुर जंक्शन की ओर से आपको उज्जवल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई....

खास बात यह है कि सीईओ साहब को फिर से  नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं जो सेवा के क्षेत्र में योगदान देते हुए पुनः हम सबके बीच होंगे....
Video 18
भजन बिना देहियाँ न सोहे रामा
हाल ए बतौली बगीचा स्टेट हाईवे....
लोक निर्माण विभाग के अधिकारी सरकार की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे.....

सनद रहे "सड़क सरकार का आईना होती है"

सड़क खराब हो तो पहली बात जुबां पर आती है कैसी सरकार है....सड़क तक नहीं बनवाती...पर जब सरकार सड़क के लिए विभाग को पैसे दे चुकी टेंडर हो गया...ठेकेदार को वर्क ऑर्डर मिल गया....तो ईई,इंजीनियर और एसडीओ की शत प्रतिशत जिम्मेदारी होती है कि वह ठेकेदार से बेहतर काम कराए, यात्रियों को आवागमन में कोई दिक्कत न हो ...यहां तो दिक्कत हो दिक्कत है.....28 किलोमीटर में बतौली से गड्ढों की शुरुआत होती है जो दुर्गापारा तक कमर तोड़ रही है....पुलिया के डायवर्शन में पानी भरा हुआ है....गड्ढों को भरने के लिए डाला गया जीएसबी कीचड़ हो चुका है...गाड़ियां फंस रही है.....

जब सड़क बरसात में नहीं बनानी थी तो उखाड़ना नहीं था पर...कैसे भी करके बंदरबाट जो करना है....

अच्छा है करते रहिए और सरकार की छवि को दागदार बनाते रहिए
श्रीराम जानकी.....
वो भारत देश है मेरा
बगीचा म्यूजिकल ग्रुप
7 साल बाद खिला ब्रह्मकमल, साहू दंपत्ति ने विश्व कल्याण की कामना के साथ भगवान शिव को किया समर्पित

जशपुर/बगीचा ,जशपुर जंक्शन 27 जुलाई 

जशपुर जिले के बगीचा निवासी एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बगीचा में पदस्थ सुपरवाइजर दशरथ साहू के वार्ड 10 स्थित घर में सात वर्ष पूर्व बसंत पंचमी के पावन अवसर पर लगाया गया दुर्लभ ब्रह्मकमल 24 जुलाई 2026 की रात्रि लगभग 10 बजे खिल उठा। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद पुष्प के खिलने से परिवार में खुशी और आस्था का माहौल बन गया। इसकी जानकारी मिलते ही आसपास के लोग भी इस दुर्लभ पुष्प के दर्शन के लिए उनके घर पहुंचे।

दशरथ साहू ने बताया कि ब्रह्मकमल अत्यंत दुर्लभ और पवित्र पुष्प माना जाता है।जो हिमालय में पाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका खिलना शुभता, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। सात वर्षों की देखभाल के बाद पौधे में पहली बार ब्रह्मकमल खिलना उनके परिवार के लिए अविस्मरणीय क्षण रहा।

ब्रह्म कमल के खिलने पर दशरथ साहू एवं उनकी धर्मपत्नी ने विधि-विधान से धूप-दीप प्रज्वलित कर ब्रह्मकमल का स्वागत किया। इसके बाद एकादशी के पावन अवसर पर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और मानवता के मंगल की कामना करते हुए ब्रह्मकमल भगवान शिव को समर्पित किया।

ब्रह्मकमल के खिलने की खबर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। आसपास के लोगों ने भी इस दुर्लभ पुष्प के दर्शन कर इसे प्रकृति का अनमोल उपहार और शुभ संयोग बताया। साहू परिवार ने सभी के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हुए इस दिव्य अवसर को ईश्वर का आशीर्वाद बताया।